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एविएशन सेक्टर में क्षमताएं बढ़ानी होंगी

Updated at : 10 Mar 2026 10:47 AM (IST)
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Aviation sector

एविएशन सेक्टर

Aviation sector : उड्डयन के प्रति रुचि जगाने के लिए उड्डयन में रोजगार केंद्रित सोच को और बढ़ावा देना होगा, जो कि सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों से प्रेरित हो. युवाओं को उड्ड्यन से जुड़ी शिक्षा मिले, जो इनके अनुभवों को जिज्ञासा एवं जुनून में बदले.

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Aviation sector : नागरिक उड्डयन अब केवल पायलटों, विमान पारिचारिकाओं और विमान अभियंताओं तक ही सीमित नहीं रह गया है. यह एक विशाल इकोसिस्टम है, जिसमें वायु यातायात नियंत्रक, हवाई अड्डा नियोजन, सुरक्षा प्रबंधन, सततता, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, नीति निर्माण तथा डिजिटल प्रौद्योगिकियां शामिल हैं. ऐसे परिप्रेक्ष्य में, एयर शो (उड्डयन प्रदर्शनी) शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता मंच के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो जटिल उड्ड्यन प्रणालियों और आम जनता की समझ के बीच की दूरी कम करते हैं.

एयर शो एक सार्वजनिक या उद्योग-केंद्रित उड्डयन आयोजन होता है, जिसमें मुख्यतः विमानों को भूमि पर और आकाश में प्रदर्शित किया जाता है, ताकि हवाई जहाज की उड़ान क्षमता, उड्डयन तकनीक, सुरक्षा, परिचालन, दक्षता एवं नागरिक व्यावसायिक और रक्षा उड्डयन जैसी संभावनाएं प्रदर्शित की जा सकें.
ब्रिटिश राज में उड्डयन प्रदर्शन मुख्यतः सैन्य और डाक सेवा एवं विशिष्ट वर्ग तक ही सीमित था. स्वतंत्रता के बाद (1950-1980) उड्डयन के प्रति जनता में जागरूकता बढ़ी. इसका एहसास भारतीय विमानन क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण के माध्यम से इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया की स्थापना से हुआ.

हमारे देश में जेट हवाई जहाज बेड़ों का आगमन शुरू हुआ एवं नियामक निकायों के गठन के साथ-साथ एयरोनॉटिकल शिक्षा पर भी जोर दिया गया. वर्ष 1990 के बाद से उदारीकरण के कारण निजी एयरलाइंस एवं वैश्विक मूल उपकरण निर्माताओं (ओइएम) का आगमन हुआ और संगठित एयर शो और एक्सपो की शुरुआत हुई. यों तो प्रारंभिक नागरिक एयर शो (1977) बेगमपेट एयरपोर्ट, हैदराबाद पर आयोजित हुआ था, जिसे हैदराबाद स्टेट एयर क्लब ने आयोजित किया था, किंतु आधुनिक युग की रक्षा एवं एयरोस्पेस विशेष प्रदर्शनी की शुरुआत, जो एयरो इंडिया’ के नाम से जानी जाती है, 1996 से येलहंका एयर फोर्स स्टेशन बेंगलुरु में हुई. इसी तरह नागरिक उड्डयन केंद्रित एयर शो 2008 में बेगमपेट एयरपोर्ट, हैदराबाद में शुरू हुआ, जिसे विंग्स इंडिया के नाम से जाना जाता है. आज यह एशिया का प्रमुख नागरिक उड्डयन एयर शो बन चुका है. इसी प्रकार देश के विभिन्न शहरों में राष्ट्रीय या क्षेत्रीय उत्सवों अथवा वायुसेना दिवस के अवसरों पर सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम द्वारा सार्वजनिक एरोबेटिक एयर शो का आयोजन होता है. वायुयान संबंधित तकनीकी विशेष एयर शो, जैसे ड्रोन तथा शहरी वायु गतिशीलता पर भी एयर शो का आयोजन किया जा रहा है. अमरावती ड्रोन समिट, आंध्र प्रदेश इसका उदाहरण है.


आज के इस दौर में जेन-जी में उड्डयन ज्ञान बढ़ाने तथा इसके प्रति उनमें रुचि जगाने एवं प्रोत्साहित करने के लिए एक स्पष्ट, अनुभव-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है, जहां उन्हें स्कूल स्तर पर बुनियादी धारणाओं, जैसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल, हवाई अड्डा संचालन, उड़ान सुरक्षा, मौसम आदि का पूर्ण परिचय दिया जाये. विकसित देशों में जिज्ञासु शिक्षा देश के संग्रहालयों, स्कूली कार्यक्रमों एवं एयर शो के माध्यम से दी जाती है. उड्डयन तकनीकी रूप से एक जटिल विषय है. अतः इसे रोचक बनाने के लिए इसे कहानी आधारित दैनिक जीवन से जुड़े विषयों एवं दृश्यात्मक ढंग से परोसना चाहिए. उड्डयन शिक्षा के दौरान इनमें छिपे विज्ञान, इंजीनियरिंग, पर्यावरण एवं गणित को विस्तृत रूप से बताया जाना चाहिए. युवा मन चंचल होता है.

उड्डयन के प्रति रुचि जगाने के लिए उड्डयन में रोजगार केंद्रित सोच को और बढ़ावा देना होगा, जो कि सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों से प्रेरित हो. युवाओं को उड्ड्यन से जुड़ी शिक्षा मिले, जो इनके अनुभवों को जिज्ञासा एवं जुनून में बदले. समय-समय पर रोल-मॉडल से संवाद एवं परिचय इनके आत्मविश्वास को बढ़ावा भी देगी. जेन-जी डिजिटल इंटरेक्टिव माध्यम से ज्यादा सीखती है, अतः इसका खास ध्यान रखा जाना चाहिए. अभी देश में युवा पीढ़ी के बीच विमान-रोजगार को लेकर प्रेरित होने का कोई विश्वसनीय आंकड़ा नहीं है. या यों कहें कि विशिष्ट प्रतिशत दर पर आधारित कोई सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है. देश में विमान म्यूजियम की संख्या भी गिनी-चुनी है, जिनमें प्रमुख हैं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, एयरोस्पेस म्यूजियम- बेंगलुरु, टीयू 142 एयरक्राफ्ट म्यूजियम, विशाखापत्तनम, नौसैनिक एविएशन म्यूजियम, गोवा, भारतीय वायुसेना हेरिटेज म्यूजियम, चंडीगढ़, विशाखा एयरक्राफ्ट म्यूजियम, विशाखापत्तनम एवं भारतीय वायुसेना म्यूजियम, नयी दिल्ली आदि.

उड्ड्यन प्रदर्शनी अथवा एयर शो के दौरान उड्डयन शिक्षा के सभी सुअवसर एक ही जगह पर विस्तृत रूप से प्रदर्शित किये जाते हैं. उड़ान प्रदर्शन के दौरान वाणिज्यिक विमान बिजनेस जेट एवं नये मॉडल हेलीकाप्टरों की डेमो उड़ान की जाती है. एक या अनेक जहाजों के एरोबेटिक टीम शो होते हैं. इन सभी हवाई जहाजों एवं ड्रोन का स्थिर प्रदर्शन भी किया जाता है. इसके अलावा इनसे जुड़े एवं एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग उपकरणों की भी प्रदर्शनी लगायी जाती है. नागरिक उड्डयन नीति, सतत उड्डयन ईंधन, एयरपोर्ट आधुनिकीकरण, विमान लीजिंग, हवाई अड्डा प्रबंधन और एयर ट्रैफिक प्रबंधन जैसे विषयों पर खुला सम्मेलन एवं सेमिनार होते हैं. व्यावसायिक बीटूबी बैठक होती है, जहां विमान खरीद-बिक्री पर एमओयू होता है, एमआरओ अनुबंध बनते हैं एवं तकनीकी साझेदारी पर सहमति बनायी जाती है. कौशल विकास एवं जनसंपर्क को बढ़ावा देने के लिए उड्डयन रोजगार सत्र रखे जाते हैं. पायलट-एटीसी जागरूकता कार्यक्रम होता है एवं इंजीनियरिंग एवं मेंटेनेंस प्रदर्शनी होती है. सरकारी एवं नियामक संस्थानों के साथ देश-विदेश के एयरलाइंस समूह अपने जहाजों एवं संबंधित विशेषज्ञों के साथ उपस्थित रहते हैं.
विमान एवं इंजन निर्माता, एमआरओ, एयरपोर्ट एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियां भी भाग लेती हैं.

प्रतिष्ठित प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थाओं को विशेष आमंत्रण होता है, जहां वे उभरती हुई ड्रोन कंपनियाें, इवीटोल, स्टार्ट-अप, एसएएफ निर्माता, टेक इनोवेटर्स और एविएशन सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ संवाद कर सकते हैं. पेरिस एयर शो, फार्नबरो एयर शो, दुबई एयर शो की तुलना में भारतीय एयर शो तेजी से अंतराष्ट्रीय स्तर की ओर बढ़ रहे हैं. भारत को वैश्विक उड्ड्यन का नेतृत्व देने, वैश्विक एयरोस्पेस हब बनाने, उड्डयन के क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ एवं आत्मनिर्भर भारत की क्षमताएं बढ़ाने एवं निर्यात बढ़ाने की आवश्यकता है. भारतीय प्रतिभावान युवाओं को स्टार्ट-अप एयरोस्पेस या ड्रोन जैसे भविष्य की तकनीक से जुड़ने का मौका देने की भी बेहद जरूरत है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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ओएस एक्का

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By ओएस एक्का

ओएस एक्का is a contributor at Prabhat Khabar.

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