धड़ल्ले से जेल में मनचाहा सामान ले जाते हैं कैदी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jul 2018 5:10 AM
पटना : पुलिस की अनदेखी से आपत्तिजनक सामग्री को जेल के अंदर ले जाने में कैदी कामयाब हो जाते हैं. इनमें मोबाइल व सिम कार्ड प्रमुख होते हैं. यह खेल कैदियों के न्यायालय में पेशी के दौरान शुरू होता है. जब किसी कैदी को बेऊर या फुलवारीशरीफ जेल से न्यायालय में पेशी के लिए लाया […]
पटना : पुलिस की अनदेखी से आपत्तिजनक सामग्री को जेल के अंदर ले जाने में कैदी कामयाब हो जाते हैं. इनमें मोबाइल व सिम कार्ड प्रमुख होते हैं. यह खेल कैदियों के न्यायालय में पेशी के दौरान शुरू होता है. जब किसी कैदी को बेऊर या फुलवारीशरीफ जेल से न्यायालय में पेशी के लिए लाया जाता है, तो उन्हें वहां बने हाजत में रखा जाता है. इसके बाद एक-एक कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जाता है. उनकी सुरक्षा को लेकर एक या दो पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है.
न्यायालय में पेश करने तक तो मामला सही रहता है, लेकिन वहां से लौटने के बाद ही खेल शुरू हो जाता है. महज चंद रुपयों के लालच में पुलिसकर्मी कैदियों को न्यायालय परिसर में स्थित दुकानों से सामान खरीदने की इजाजत दे देते हैं. इसके अलावा उनके सगे-संबंधियों द्वारा दिये गये सामान की भी सही तरीके से जांच नहीं करते हैं. मोबाइल या सिम कार्ड इतने छोटे होते हैं कि कैदी उन्हें अपने साथ आसानी से छिपा कर ले जा सकते हैं. न्यायालय से कैदी वैन से कैदी आसानी से सामान लेकर जेल गेट पर पहुंचते हैं और वहां के सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर जेल के अंदर लेकर चले जाते हैं. इसके बाद उसका इस्तेमाल क्रिमिनल गतिविधियों को संचालित करने के लिए करते हैं.
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