पटना : तेज प्रताप ने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ की बैठक

Updated at : 07 Jul 2018 9:04 AM (IST)
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पटना : तेज प्रताप ने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ की बैठक

पटना : पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव अल्पसंख्यकों के बीच पार्टी की गहरी पैठ बनाने में जुट गये हैं. शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय पर उन्हाेंने राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की. तेज प्रताप यादव ने कहा कि राजद को जिला, प्रखंड, पंचायत और वार्ड स्तर पर मजबूत करने में कोई कसर […]

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पटना : पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव अल्पसंख्यकों के बीच पार्टी की गहरी पैठ बनाने में जुट गये हैं. शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय पर उन्हाेंने राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की. तेज प्रताप यादव ने कहा कि राजद को जिला, प्रखंड, पंचायत और वार्ड स्तर पर मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़नी है.
अल्पसंख्यक समाज के लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि उनका हित राजद के साथ रहने में है. हमारी ही ऐसी पार्टी है जो सांप्रदायिक ताकतों को रोक सकती है. प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामचंद्र पूर्वे, आलोक मेहता, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष एवं समस्तीपुर से विधायक मो. अख्तरूल इस्लाम शाहीन, अब्दुल बारी सिद्दीकी, डा. तनवीर हसन, छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष आकाश यादव मौजूद रहे.
चुकंदर की बंपर पैदावार, नहीं है बाजार, किसान लाचार
अमिताभ श्रीवास्तव
पटना सिटी : जल्ला के गांव में किसान बीते दस वर्षों से अधिक समय से चुकंदर की खेती कर रहे हैं. गर्मी व जाड़ा के मौसम में होने वाली खेती से बढ़ी पैदावार ने किसानों को लाचार बना दिया है क्योंकि बाजार नहीं रहने की स्थिति में किसान चुकंदर को पटना के बाजारों में खपा रहे हैं.
किसानों का दर्द यह है कि खेती के समय बीज व खाद में जो लागत लगी थी, उसकी बात तो छोड़ दे अभी उपज को खेत से उखाड़ने, ढुलाई में खर्च हो रही राशि भी नहीं निकल पा रही. स्थिति यह है कि चुकंदर थोक में तीन से चार रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में यह 18 से 22 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. ऐसे हालात सुधारने के इंतजार में खेतों में किसान चुकंदर को छोड़ रखा है. किसान जल्ला के लगभग एक सौ बीघा में इसकी खेती कर हैं.
चार से सात हजार रुपये किलो मिलता है हाईब्रिड बीज
जल्ला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनोहर लाल बताते हैं कि चुकंदर की खेती में उपयोग आने वाला हाईब्रीड बीज बाजार में चार से सात हजार रुपये प्रति किलो बिकता है. किसान चुकंदर की दो फसलों की खेती करते हैं. इनमें जाड़ा के समय अक्तूबर -नवंबर में इसकी बुआई होती है, जबकि फसल तैयार होकर जनवरी- फरवरी तक आती है. इसी प्रकार गर्मी के मौसम में मार्च- अप्रैल के समय बुआई होती है.
इसके बाद तैयार फसल मई- जून से आने लगता है. हालांकि, बाजार नहीं रहने व उचित मूल्य नहीं मिलने की स्थिति में हालात यह है कि लागत मूल्य भी नहीं मिलने की स्थिति में किसानों ने खेतों में चुकंदर की तैयार फसल को छोड़ दिया है. इस कारण दूसरे सब्जी की खेती प्रभावित हो रही है. विवश व लाचार किसान पटना के बाजार में इसको खपा रहे हैं.
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