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पटना हाई कोर्ट ने खगड़िया जिला न्यायाधीश की पुत्री को नजरबंद करने के मामले में आदेश पारित किया

Updated at : 26 Jun 2018 9:38 AM (IST)
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पटना हाई कोर्ट ने खगड़िया जिला न्यायाधीश की पुत्री को नजरबंद करने के मामले में आदेश पारित किया

पटना : पटना उच्च न्यायालय ने खगड़िया जिला न्यायाधीश द्वारा अपनी पुत्री को कथित तौर पर नजरबंद करने के मामले में आज आदेश दिया कि 25 वर्षीय युवती को अगले 15 दिन के लिए गेस्ट हाउस में रखने के साथ ही पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी जाये. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद […]

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पटना : पटना उच्च न्यायालय ने खगड़िया जिला न्यायाधीश द्वारा अपनी पुत्री को कथित तौर पर नजरबंद करने के मामले में आज आदेश दिया कि 25 वर्षीय युवती को अगले 15 दिन के लिए गेस्ट हाउस में रखने के साथ ही पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी जाये. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एक खंडपीठ ने मीडिया में इस बारे में खबर आने के बाद इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए युवती को कल न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया था.

युवती ने आज खंडपीठ के समक्ष बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ सहज नहीं है और अलग रहना चाहती है. अदालत में युवती के माता-पिता भी उपस्थित थे और खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख आगामी 12 जुलाई निर्धारित की. युवती के पिता वर्तमान में खगड़िया जिले में न्यायाधीश के पद पर तैनात हैं. युवती के माता-पिता ने दिल्ली स्थित उच्चतम न्यायालय में कार्यरत एक वकील से उसके शादी करने के फैसले का विरोध किया था.

अदालत ने आदेश दिया कि युवती को पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) में 15 दिनों की अवधि के लिए रखा जाये. अदालत ने इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को उसे पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि युवती को 24 घंटे के लिए एक गार्ड (महिला पुलिसकर्मी) उपलब्ध कराया जाये. अदालत ने कहा कि युवती गेस्ट हाउस में रहने के दौरान महिला सुरक्षा गार्ड के माध्यम जिससे भी चाहे बातचीत करने के लिए स्वतंत्र है. अदालत के कहने पर उसे एक मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराया गया है.

अदालत ने युवती को मामले की अगली सुनवाई की तारीख तक पटना में रहने का निर्देश किया. हालांकि, वह इस शहर में घूमने फिरने के लिए स्वतंत्र है तथा अदालत ने उसके लिए सीएनएलयू के रजिस्ट्रार को उसके परिवहन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. अदालत ने मीडिया से युवती और उनके माता-पिता का नाम और समाचार वस्तु जो उसकी प्रतिष्ठा और करियर या उसके माता-पिता या उसके परिवार की प्रतिष्ठा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है, को प्रकाशित करने से मना किया है.

क्या है मामला

समाचार पोर्टल ‘बार एंड बेंच’ की खबर के अनुसार, पीड़िता 24 साल की यशस्विनी पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से विधि स्नातक हैं. खबर के अनुसार, उनके पिता और खगड़िया के जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र चौरसिया ने दिल्ली के एक वकील सिद्धार्थ बंसल से संबंधों के कारण महिला को खगड़िया स्थित आवास पर कथित रूप से कैद कर लिया है. खबर में दावा किया गया है कि न्यायाधीश और उनकी पत्नी ने अपनी बेटी से मारपीट भी की और उसकी चीखों को फोन पर बंसल को सुनाया गया. प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेने के बाद मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की. मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा, ‘हम काफी शर्मिंदा हैं कि आप जैसे ज्यूडिशियल ऑफिसर हमारे अंदर काम कर रहे हैं.’

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