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नीतीश का आयुष चिकित्सकों को बड़ा तोहफा, एलोपैथिक की तर्ज पर मिलेगा वेतन

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री ने राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सकों को बड़ा तोहफा दिया है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुर्वेदिक चिकित्सकों को नसीहत देते हुए कहा है कि जिस विधा में डिग्री और प्रशिक्षण ली है, उसी पद्धति से इलाज करें. उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों से यह उनकी अपेक्षा है और इसकी पड़ताल […]

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री ने राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सकों को बड़ा तोहफा दिया है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुर्वेदिक चिकित्सकों को नसीहत देते हुए कहा है कि जिस विधा में डिग्री और प्रशिक्षण ली है, उसी पद्धति से इलाज करें. उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों से यह उनकी अपेक्षा है और इसकी पड़ताल के लिए वे राज्य के आयुर्वेदिक अस्पतालों में कभी भी पहुंचकर पूछताछ करने लगेंगे. उन्होंने कहा कि एलोपैथ का इतना ज्यादा प्रचार हो गया है कि दूसरी चिकित्सा पद्धति में शिक्षित और प्रशिक्षित लोग भी डायवर्ट करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और यूनानी सहित अन्य पुरानी और देशी चिकित्सा पद्धतियों में सबकी अपनी अहमियत है. ऐसे में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ऐतिहासिक और वैज्ञानिक है. नीतीश कुमार ने कहा कि बहुत सारे लोग असहजता महसूस करते हैं कि एलोपैथ वाले डॉक्टर कहलाते हैं और हजारों वर्ष पुरानी चिकित्सा प्रणाली वाले वैद्य. ऐसी भावना मन से निकाल देनी चाहिये और मजबूती का एहसास होना चाहिये क्योंकि एलोपैथ में इलाज से थकने के बाद लोग आयुर्वेद का सहारा लेते हैं, इसलिये आपमें ज्यादा दम है. आयुष चिकित्सकों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने इस विशिष्टता को समझिए और गर्व कीजिए तभी इस आयुर्वेद पर्व की उपलब्धि मानी जायेगी.

आयुष संयुक्त सचिव से आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सकों में आत्म सम्मान का भाव आ सके, इसके लिए आप जिस प्रकार एलोपैथिक चिकित्सकों को सुविधाएं मुहैया कराते हैं, उसी प्रकार आयुष और यूनानी चिकित्सकों का भी ख्याल रखें. आयुर्वेद में भी हो अनुसंधान आयुर्वेद में शिक्षित प्रशिक्षित होने वाली नई पीढ़ी के लोगों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसंधान की तरफ भी जरूर ध्यान दें. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो आयुर्वेद में दम है, वह अन्य चिकित्सा पद्धति में नहीं है लेकिन जितना अनुसंधान इस क्षेत्र में होना चाहिये, उतना नहीं हुआ. इस दिशा में अनुसंधान होगा तो बहुत सारी नई बीमारियों का इलाज भी इस चिकित्सा पद्धति के माध्यम से संभव हो सकेगा. उन्होंने कहा कि बीमारी न हो इसके लिए दिनचर्या, खानपान और आचार-व्यवहार का कांसेप्ट होना चाहिये, जिसे प्रचारित करने की जरूरत है ताकि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागृति आ सके.

आयुष मेडिकल एसोसिएशनसेजुड़े और बिहार के बक्सर जिले से पहुंचेचिकित्सकोंने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए उनके द्वारा उठाये जा रहे कदमों की प्रशंसाकी.डुमरांवप्रखंड के कोरान सराय में सर्वहारा केसाथआम लोगों के लिएवर्षोंसे हेल्थ प्रहरी बने डॉ. धर्मवीरउपाध्यायने कहा कि मुख्यमंत्री ने एसोसिएशन की तरफ से लगातार की जा रही इस बेहद जरूरी मांगों को पूरा कर आयुष चिकित्सकों को सम्मान देने का काम किया है. वहीं सम्मेलन में भाग लेने आये डॉ. विमल पांडेय, डॉ. सुभाष चंद्र ओझा, डॉ. एम हेशाम, डॉ. एम कैमुद्दीन, डॉ. बी के पांडेयऔर डॉ. राम सुरेश उपाध्याय ने कहा कि महाविद्यालयों को खोलने की घोषणा भी स्वागतयोग्य कदम है. उनकी घोषणा से सूबे के आयुष जगत में खुशी की लहर दौड़ गयी है.

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Prabhat Khabar Digital Desk
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