डेढ़ करोड़ का हॉस्टल, एक दिन भी नहीं रहीं छात्राएं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Nov 2017 6:20 AM (IST)
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लापरवाही . नशेड़ियों ने इस छात्रावास को अपना अड्डा बनाया पटना/अारा : भोजपुर में डेढ़ करोड़ की लागत से ओबीसी हॉस्टल बनाया गया. पांच साल से हॉस्टल बनकर तैयार है, पर छात्राएं एक दिन भी नहीं रही हैं. वजह हस्तानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई. इतने में यह हॉस्टल खंडहर बन गया है. भवन निर्माण […]
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लापरवाही . नशेड़ियों ने इस छात्रावास को अपना अड्डा बनाया
पटना/अारा : भोजपुर में डेढ़ करोड़ की लागत से ओबीसी हॉस्टल बनाया गया. पांच साल से हॉस्टल बनकर तैयार है, पर छात्राएं एक दिन भी नहीं रही हैं. वजह हस्तानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई. इतने में यह हॉस्टल खंडहर बन गया है. भवन निर्माण विभाग और पिछड़ा व अति पिछड़ा विभाग के अफसरों की लापरवाही सामने आयी है. नशेड़ियों ने इस छात्रावास को अपना अड्डा बना लिया है. खास बात यह कि सरकारी मशीनरी ने इस हॉस्टल के लिए हाथ खोलकर धन दिया. पहले बनाने के लिए करीब डेढ़ करोड़ दिये, अब जीर्णोद्धार के लिए करीब 70 लाख रुपये दे दिये गये.
विभागीय मंत्री ने किया दौरा तो खुली पोल
पिछड़ा व अति पिछड़ा विभाग के मंत्री बृजकिशोर बिंद ने भोजपुर में बने इस हॉस्टल का दौरा किया था. हॉस्टल की स्थिति देखकर वह भी भौंचक्क रह गये. विभाग ने छात्राओं के लिए बेहतर आवासीय शैक्षणिक माहौल बनाने की मंशा से करीब डेढ़ करोड़ रुपये दिये थे. जानकारी करने पर पता चला कि भवन निर्माण विभाग ने करीब पांच साल पहले इस भवन का निर्माण पूरा कर लिया, परंतु हस्तानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई. मंत्री ने हॉस्टल का जो नजारा देखा, जरा आप भी जान लें. बकौल बृजकिशोर बिंद, खिड़कियों से चौखट-दरवाजे गायब हैं. बिजली की वायरिंग में तार नहीं हैं. एक-आध जगह जरूर ताल लटकते दिख जाते हैं. हॉस्टल के कमरों में जानवरों का बसेरा था. गंदगी और गोबर फैला था. खिड़कियों में लगे कांच टूटकर बिखरे पड़े थे. नल-टोंटी ही नहीं पाइप तक उखाड़ लिये गये थे. कमरों से लेकर बाथरूम तक का नजारा खंडहर जैसा था.
खतरे से खाली नहीं है भवन
पिछड़ा व अति पिछड़ा विभाग के मंत्री बृजकिशोर बिंद ने कहा कि भवन में रहना खतरे से खाली नहीं है. छात्रावास का स्ट्रक्चर खराब है. दीवारों में मोटी-मोटी दरारें पड़ गयी हैं. फर्श भी कई जगह बैठ गया है. इसमें बच्चे क्या पढ़ेंगे. कहीं कोई हादसा हो गया तो लेने के देने और पड़ जायेंगे. ईश्वर जाने डेढ़ करोड़ रुपये कहां और कैसे खर्च कर दिये गये.
पांच साल पहले भोजपुर में बना था ओबीसी हॉस्टल
सालों बीतने के बाद हस्तानांतरण की कार्यवाही नहीं हुई पूरी
अब जीर्णोद्धार के लिए 70 लाख दे दिये, निर्माण एजेंसी और पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग विभाग की लापरवाही आयी सामने
आला अधिकारी नहीं चाहते कार्रवाई करना
इस हॉस्टल की कहानी से सभी वाकिफ हैं. परंतु इतनी बड़ी रकम को लेकर जमकर बंदरबांट हुई है. इसीलिए विभाग के आला अधिकारी भी कुछ करने को तैयार नहीं. सूत्र तो यह भी बताते हैं कि निरीक्षण में तमाम खामियां मिलीं थीं, परंतु अधिकारियों ने फाइल दबा ली. उसे आगे बढ़ाते तो एफआईआर तक की नौबत आती. अब जब मंत्री ने खुद देखा तो इस बंदरबांट की पोल खुली है.
मैंने जो भी देखा, उससे तो यह साफ है कि हर कदम पर लापरवाही हुई है. साथ ही सरकार की इतनी बड़ी राशि को बर्बाद किया गया है. मैंने भवन निर्माण विभाग से पूरी रिपोर्ट तलब की है. दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा.
बृजकिशोर बिंद, मंत्री, पिछड़ा व अति पिछड़ा विभाग
करीब पांच साल पहले ओबीसी हॉस्टल का निर्माण हुआ था. किन्हीं कारणों से इसका हस्तानांतरण नहीं हो पाया. फिर से करीब 70 लाख रुपये मिले हैं. इस राशि से जीर्णोद्धार कराया जायेगा. टेंडर भी हो गया है.
कमलेश कुमार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, भवन निर्माण विभाग, आरा
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