प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता में है बिहार

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पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोकस में अब बिहार भी शामिल है. हाल के दिनों में उनकी बिहार यात्रा को देखते हुए यह उम्मीद जगी है कि केंद्र बिहार की लंबित परियोजनाओं पर ध्यान देगा और विकास के लिए जो कुछ पूर्व की मांगें रही हैं उन पर गौर करेगा. हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने […]

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पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोकस में अब बिहार भी शामिल है. हाल के दिनों में उनकी बिहार यात्रा को देखते हुए यह उम्मीद जगी है कि केंद्र बिहार की लंबित परियोजनाओं पर ध्यान देगा और विकास के लिए जो कुछ पूर्व की मांगें रही हैं उन पर गौर करेगा.

हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह कह दिया है कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान विशेष राज्य का दर्जा का मसला केंद्र में नहीं होगा, पर अरसे बाद दिल्ली और पटना में एक ही धारा की सरकार होने से बिहार के लोगों को उम्मीद जगी है कि उसके साथ अब भेदभाव नहीं होगा. पटना विवि को केंद्रीय विवि का दर्जा मिलने की बिहार की पुरानी मांग रही है. इसके अलावा राज्य की कई लंबित याेजनाओं को लेकर भी बिहार की उम्मीद भरी नजरें प्रधानमंत्री की ओर टिकी हैं.


बाढ़ से हुई क्षति की भरपायी के लिए राज्य सरकार ने 7636 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की है. राज्य को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपने दौरे में इस संबंध में भी गौर करेंगे. 2015 के अगस्त महीने में आरा की एक सभा में उन्होंने पटना से बक्सर तक जाने वाली चार लेन की सड़क का शिलान्यास किया था. इसी दौरान उसी मंच से उन्हाेंने राज्य के विकास के लिए सवा लाख करोड़ रुपये की विशेष पैकेज की भी घाेषणा की थी.
आरा की सभा में सवा लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की थी
विधानसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री ने अपनी आरा की सभा में बिहार के लिए सवा लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की गयी थी. पीएम की उस घोषणा की भाजपा ने जहां स्वागत किया था, वहीं तत्कलीन विपक्ष ने आलोचना की थी. वैसे तो उन दिनों से ही बिहार उनके फोकस में आ गया था. लेकिन, तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियां दूसरी थी. नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू उस समय राजद के साथ खड़ी थी. भाजपा विरोध में थी. अब समय और काल बदला है. नीतीश कुमार की सरकार में भाजपा एक बार फिर साथ खड़ी है. जदयू एनडीए का अंग बन चुका है.
आगमन को लेकर विशेष उत्सुकता: प्रदेश में अब भाजपा भी सरकार में बराबर की भागीदार है. इस नाते भी प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर राज्यवासियों में विशेष उत्सुकता है. प्रधानमंत्री इसके पहले इसी साल जनवरी में सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के साढ़े तीन सौ साल वें प्रकाशोत्सव समारोह में शिरकत करने पटना आये थे. इस दौरान उन्होंने शराबबंदी की तारीफ की थी. उन्होंने बिहार को केंद्र सरकार की ओर से सौ करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी. इसके बाद राज्य की बाढ़ त्रासदी का जायजा लेने उनका बिहार दौरा हुआ था. इस दौरान पीएम सीधे दिल्ली से पूर्णिया पहुंचे थे. पांच सौ करोड़ रुपये की सहायता की भी घोषणा की थी. 2005 के अंत में जब बिहार में राजद को परास्त कर एनडीए की सरकार बनी थी तो उस समय भी यही समीकरण सत्तारूढ़ हुआ था.

राज्य के लिए यह सुखद है कि राज्य में नीतीश कुमार की सरकार काम कर रही है जिसने कई ऐतिहासिक कार्य किये हैं. वहीं विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने प्रधानमंत्री के नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले की सराहना की थी. इस बार की सरकार में भी नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी की जोड़ी काम कर रही है. केंद्र के समक्ष बिहार को मदद नहीं करने को लेकर अब कोई आधार भी नहीं है. प्रधानमंत्री ने खुद भी माना है कि बिहार उनके फोकस में है. 27, अक्तूबर, 2013 को पटना के गांधी मैदान में भाषण के दौरान बम विस्फोट से दस लोगों की जानें गयी थीं. सुरक्षा एजेंसियों ने किसी घटना की आशंका जतायी थी. लेकिन, पीएम ने गांधी मैदान में सभा को संबोधित किया था. बाद में वे इस हादसे में मारे गये सभी लोगों के परिजनों को सांत्वना देने भी गये थे.

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