मवेशियों को जिंदा रखने के लिए जान जोखिम में डाल रहे बाढ़ पीड़ित
Updated at : 28 Aug 2017 7:01 PM (IST)
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बखरी (बेगूसराय) : बाढ़ की त्रासदी का कहर अब भी जारी है. बाढ़ पीड़ितों के सामने खुद के लिए भोजन जुटाने के साथ मवेशियों को भी जिंदा रखना परेशानी का सबब बनता जा रहा है. बाढ़ पीड़ित अपनी जान जोखिम में डाल कर मवेशियों के लिए चारा का इंतजाम कर रहे हैं. जल प्रलय से […]
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बखरी (बेगूसराय) : बाढ़ की त्रासदी का कहर अब भी जारी है. बाढ़ पीड़ितों के सामने खुद के लिए भोजन जुटाने के साथ मवेशियों को भी जिंदा रखना परेशानी का सबब बनता जा रहा है. बाढ़ पीड़ित अपनी जान जोखिम में डाल कर मवेशियों के लिए चारा का इंतजाम कर रहे हैं. जल प्रलय से सारे खेत डूब गये हैं. मवेशियों को जिंदा रखने की जद्दोजहद में ये बाढ़ पीड़ित हथेली पर मौत लेकर यात्रा करने को मजबूर हैं. सलौना-खगड़िया रेलखंड पर जान जोखिम में डालने का यह नजारा आम-सा हो गया है.
बाढ़ की त्रासदी से त्रस्त मानसी से लेकर सहरसा तक पशुओं के लिए चारा जुटाने के लिए बाढ़ पीड़ित जान जोखिम में डाल कर हर संभव कोशिश कर रहे हैं. पानी में खेत डूबने से पशुओं का चारा समाप्त हो चुका है. पशु चारा के लिए सलौना में ट्रेनों पर चारा लाद कर मवेशियों की जान बचाने की कोशिश में जुटे हैं. ट्रेनों में हर तरफ चारा बांध कर लटका दिया जा रहा है. इस सफर के दौरान आम यात्रियों की सुरक्षा भी ताक पर है. बड़ी बात यह है कि इतनी बड़ी चूक से घटना की आशंका के बावजूद रेल अधिकारी अब तक अनजान हैं.
समस्तीपुर-खगड़िया रेलखंड के सलौना स्टेशन पर ट्रेन पर चढ़ने के लिए महिला यात्रियों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है. वहीं, चारा ले जानेवालों का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित इलाके मानसी से लेकर सहरसा तक चारा ले जाने के लिए एकमात्र विकल्प ट्रेन ही है. गाड़ी की कमी होने से लोगों को जान जोखिम मे डाल कर कर यात्रा करना पड़ रहा है. आलम यह है कि गाड़ी के अंदर जगह नहीं रहने के कारण मौत हथेली पर लेकर यात्री ट्रेनों की छतों पर भी सफर करना मजबूरी बन गयी है.
क्या कहता है आरपीएफ
आरपीएफ ओपी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह ने बताया कि छत पर सफर करनेवाले यात्री हो या ट्रेन मे लटक कर यात्रा करनेवाले यात्री, उनके ऊपर कार्रवाई की जायेगी. क्योंकि, इस तरह ट्रेन में सफर करना अपराध है.
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