क्लिक करके पढि़ए सृजन घोटाले की पूरी कहानी

Updated at : 19 Aug 2017 7:55 AM (IST)
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दो महिलाओं के साथ मनोरमा ने शुरू की थी संस्था भागलपुर : यूं तो सृजन के गढ़ने की कहानी के पीछे स्वावलंबन, महिला अधिकार, सेवा, जागरूकता जैसे लोक लुभावने शब्दों को उछाला गया, लेकिन इसने घोटाले के कई कीर्तिमान स्थापित कर लिये. सृजन संस्था की शुरुआत महज दो महिलाओं के साथ मनोरमा देवी ने की […]

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दो महिलाओं के साथ मनोरमा ने शुरू की थी संस्था
भागलपुर : यूं तो सृजन के गढ़ने की कहानी के पीछे स्वावलंबन, महिला अधिकार, सेवा, जागरूकता जैसे लोक लुभावने शब्दों को उछाला गया, लेकिन इसने घोटाले के कई कीर्तिमान स्थापित कर लिये.
सृजन संस्था की शुरुआत महज दो महिलाओं के साथ मनोरमा देवी ने की थी. धीरे-धीरे महिलाओं की संख्या बढ़ कर करीब छह हजार हो गयी. गरीब, पिछड़ी, महादलित महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें आत्मनिर्भर करने के उद्देश्य से इस संस्था की शुरुआत की गयी थी. महिलाओं का तकरीबन 600 स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार से सृजन ने जोड़ा.
पति के निधन बाद भागलपुर आ गयी थी मनोरमा : वर्ष 1991 में मनोरमा देवी के पति अवधेश कुमार का असामयिक निधन हो गया था. उनके पति रांची में लाह अनुसंधान संस्थान में वरीय वैज्ञानिक के रूप में पदस्थापित थे.
उनके नहीं रहने पर छह बच्चों की परवरिश का जिम्मा मनोरमा पर आ गया. वर्ष 1993-94 में उन्होंने सबौर में किराये के एक कमरे में सुनीता और सरिता नामक दो महिलाओं के सहयोग से एक सिलाई मशीन रखकर कपड़ा सिलने का काम शुरू किया. इसके बाद रजंदीपुर पैक्स ने 10 हजार रुपये कर्ज दिया. इससे कारोबार को बल मिला और कपड़े तैयार कर बाजर में बेचा जाने लगा. आमदनी बढ़ने लगी, तो सिलाई-कढ़ाई का काम आगे बढ़ता गया. एक से बढ़ कर कई सिलाई मशीनों पर काम होने लगा. इसके साथ-साथ महिलाओं की संख्या भी बढ़ने लगी.
वर्ष 1996 में मिला था रजिस्ट्रेशन : वर्ष 1996 में सृजन महिला का समिति के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ. इसमें मनोरमा देवी सचिव के रूप काम कर रही थी. महिलाओं को समिति से जुड़ता देख सहकारिता बैंक ने 40 हजार रुपये कर्ज दिया. काम से प्रभावित होकर सबौर स्थित ट्रायसम भवन में समिति को अपनी गतिविधियों के आयोजन की अनुमति मिली. बाद में 35 साल की लीज पर यह भवन समिति को मिल गया.
मनोरमा की मौत के बाद प्रिया बनी सचिव : मनोरमा देवी की मौत 69 वर्ष की उम्र में 14 फरवरी 2017 को हो गयी. इसके बाद उनकी बहू और अमित कुमार की पत्नी ने सचिव पद पर योगदान दिया. प्रिया कुमार शहर में बेस्ट मदर प्रतियोगिता का भी हाल में आयोजन किया था. मनोरमा देवी के बड़े पुत्र डॉ प्रणव कुमार ऑस्ट्रेलिया में चिकित्सक हैं.
छोटे पुत्र अमित कुमार भागलपुर के तिलकामांझी स्थित तुलसीनगर कॉलोनी में कुछ वर्ष पूर्व तक लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का अध्ययन केंद्र डॉ ए कुमार इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में चलाया करते थे. इसके बाद अध्ययन केंद्र बंद कर उसमें इथिकल हैकिंग का कंप्यूटर कोर्स शुरू किया.
बाद के दिनों में डॉ ए कुमार इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन के बाद कुमार क्लासेस नाम से इंस्टीट्यूट चलाने लगे. इसी दौरान एक प्रयास नामक संस्था की कुमार ने शुरुआत की. इसके अंतर्गत रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाने लगा. दूसरी ओर कुमार क्लासेस की बिल्डिंग में ही इ-बिहार झारखंड नाम से न्यूज पोर्टल भी संचालित किया जाता था. अमित कुमार एक पत्रिका लीडर्स स्पीक का प्रकाशन भी कर रहे थे, जिसके वे चीफ एडिटर थे.
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