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जापानी टूरिस्ट से सामूहिक दुष्कर्म मामले में हाइकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया, अभियुक्तों की अपील खारिज

Updated at : 27 Jul 2017 5:17 PM (IST)
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जापानी टूरिस्ट से सामूहिक दुष्कर्म मामले में हाइकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया, अभियुक्तों की अपील खारिज

पटना : बिहार के गया जिले में जापानी टूरिस्ट के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले के अभियुक्तों को किसी भी प्रकार का राहत देने से साफ तौर पर इनकार करते हुए पटना हाइकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दिये गये आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराते हुए उस पर अपनी मुहर लगा दी और अपील […]

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पटना : बिहार के गया जिले में जापानी टूरिस्ट के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले के अभियुक्तों को किसी भी प्रकार का राहत देने से साफ तौर पर इनकार करते हुए पटना हाइकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दिये गये आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराते हुए उस पर अपनी मुहर लगा दी और अपील को खारिज कर दिया. जस्टिस समरेंदर प्रताप सिंह एवं जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने पप्पू कुमार, लिट्टू यादव एवं अन्य की ओर से दायर अपील पर 31 जनवरी, 2017 को सुनवाई पूरी कर रखे गये सुरक्षित आदेश में गुरुवार को अपना फैसला सुनाया.

क्या है मामला

जापानी युवती साची नोमूरा बोधगया घूमने आयी थीं. जापानी टूरिस्ट के साथ 16 अप्रैल, 2010 की रात को गैंग रेप की वारदात हुई थी. युवती उससमय बोधगया से गया रेलवे स्टेशन जा रही था. अमवां गांव के पास पप्पू कुमार, लिट्टू यादव व उदय कुमार समेत पांच अभियुक्तों ने ऑटो रिक्शा से जापानी टूरिस्ट साची नोमूरा को जबरदस्ती उतार लिया. उसके बाद एक जगह पर ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया.

एक माह से कम समय में ही निचली अदालत ने सुना दिया था फैसला

जापानी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज जयंत कुमार ने पप्पू कुमार, उदय कुमार और अनुज कुमार उर्फ लिट्टू यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. साथ ही साथ अदालत ने सभी दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था.इस मामले में पुलिस ने 22 अप्रैल को पप्पू, उदय और अनुज के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था.इस बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में अदालत ने रिकॉर्ड एक माह से कम समय में मामले की सुनवाई पूरी करते हुए 17 मई, 2010 को ही अभियुक्तों को सजा सुना दी थी. निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अभियुक्तों ने पटना हाइकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए 31 जनवरी, 2017 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.

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