बिहार में राजद-कांग्रेस निभा सकते हैं मजबूत विपक्ष की भूमिका

Updated at : 27 Jul 2017 7:40 AM (IST)
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बिहार में राजद-कांग्रेस निभा सकते हैं मजबूत विपक्ष की भूमिका

पटना :बिहारमें मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद भाजपा का समर्थन करने की घोषणा से राजनीतिक हलचलें तेज हो गयी. ऐसे में राजद काे कांग्रेस से उम्मीदें बढ़ गयी है. दोनों एक साथ रह कर मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा सकते हैं. राजद के 80 तो कांग्रेस के 27 विधायक हैं. […]

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पटना :बिहारमें मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद भाजपा का समर्थन करने की घोषणा से राजनीतिक हलचलें तेज हो गयी. ऐसे में राजद काे कांग्रेस से उम्मीदें बढ़ गयी है. दोनों एक साथ रह कर मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा सकते हैं. राजद के 80 तो कांग्रेस के 27 विधायक हैं. महागठबंधन में जदयू, राजद व कांग्रेस शामिल थी. जदयू के अलग होने से महागठबंधन में राजद व कांग्रेस बच गयी है. सांप्रदायिक ताकतों को परास्त करने व सत्ता से दूर रखने के लिए राजद व कांग्रेस पूरजोर प्रयास करेगी. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने संकेत दिये कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए नये नेता का चयन तीनों दलों के विधायकों की बैठक कर होनी चाहिए. लेकिन नीतीश कुमार को भाजपा द्वारा समर्थन करने की घोषणा से जदयू का राजद व कांग्रेस के साथ वापस होना संभव नहीं है.

पहले भी राजद व कांग्रेस मिल कर सत्ता में रही है. पिछले एक दशक से अधिक समय बाद पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति अच्छी रही. कांग्रेस के 27 उम्मीदवार चुनाव में जीते. महागठबंधन में शामिल होने का फायदा कांग्रेस को मिला. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात को जोर देकर कह रहे हैं कि सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए महागठबंधन बना था. पांच साल के लिए यह गठबंधन हुआ था. जदयू का उससे अलग होना दुर्भाग्यपूर्ण है. नीतीश कुमार ऐसे लोगों के साथ जाकर फिर मिल गये जिसे देश से मुक्त करने के लिए निकले थे. ऐसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अशोक चौधरी पटना से बाहर हैं. कांग्रेस के सूत्र ने बताया कि राजद के साथ कांग्रेस के तालमेल को लेकर आलाकमान निर्णय लेगा. फिलहाल कोई कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं.

जानकारों की माने तो राजद को कांग्रेस का साथ मिलना तय है. दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी व पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पर सीबीआइ ने केस किया है. ऐसे में कांग्रेस का राजद को साथ देने से भ्रष्टाचार का समर्थन करने का आरोप कांग्रेस पर लगेगा. इससे कांग्रेस बचने की कोशिश करेगी. पहले भी कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के कई आरोप को लेकर उसकी देश भर में किरकिरी हुई है. अब देखना है कि राजद व कांग्रेस का क्या स्टैंड रहेगा.
एनडीए : नीतीश कुमार प्लस, उपेंद्र कुशवाहा माइनस!
पटना : एनडीए में नीतीश कुमार का पूरी पार्टी जदयू समेत शामिल होने की घोषणा के साथ ही एनडीए में राजनीतिक दलों की संख्या में इजाफा होने जा रहा है. परंतु क्या यह इजाफा बना रहेगा, शायद नहीं. क्योंकि एनडीए में पहले से शामिल उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली रालोसपा (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) का एनडीए से दूर होना तकरीबन तय माना जा रहा है. इसकी बुनियाद भी पड़ने लगी है. रालोसपा के भूदेव चौधरी ने नीतीश कुमार के खिलाफ काफी कड़ा बयान दिया है. उन्होंने नीतीश कुमार को मौका परस्त बताते हुए जमकर भड़ास निकाली है. सिर्फ रालोसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो एनडीए में नीतीश कुमार के शामिल होने का विरोध कर रही है. जबकि उसकी अन्य दोनों सहयोगी पार्टियां लोजपा और हम इस फैसले का स्वागत कर रही हैं.
भाजपा की नयी सरकार को समर्थन देने की घोषणा के साथ ही रालोसपा के तेवर पूरी तरह से बदल गये हैं. यह दीगर बात है कि नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा दोनों एक साथ किसी दल या गठबंधन में रहें. शायद भाजपा भी इस बात के लिए पहले से तैयार भी थी. तभी इस विरोध को लेकर भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि रालोसपा के अलग होने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा. रालोसपा के तीन विधायक और पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा समेत तीन सांसद हैं. इससे केंद्र और राज्य दोनों सरकार की सेहत पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
मांझी के सामने धर्म संकट, कहा नीतीश का फैसला सराहनीय

पटना : हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने नीतीश कुमार के इस्तीफे का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने उच्च नैतिकता को फिर से स्थापित किया है. देर से ही सही पर उन्होंने दुरुस्त निर्णय लिया है. नीतीश कुमार द्वारा जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद वे काफी नाराज थे. व्यक्तिगत रूप से नीतीश कुमार की वे तारीफ करते रहे. तेजस्वी का इस्तीफा नहीं लिये जाने पर जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार पर आरोप भी लगाये थे. उन्होंने कहा था कि दलित होने के कारण हमसे इस्तीफा ले लिया गया था.

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