अप्रैल में दो एकादशी व्रत, नोट करें वरुथिनी और मोहिनी एकादशी की डेट और मुहूर्त

Updated at : 28 Mar 2026 4:44 PM (IST)
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Bhagwan Vishnu

भगवान विष्णु

April 2026 Ekadashi Date: अप्रैल के महीने में वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 तारीख को रखा जाएगा, वहीं मोहिनी एकादशी का व्रत 27 तारीख को रखा जाएगा. इन दोनों व्रतों को क्यों किया जाता है और इनका क्या महत्व है, जानने के लिए पढ़ें यह खबर.

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April 2026 Ekadashi Date: एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. अप्रैल 2026 में वरुथिनी एकादशी और मोहिनी एकादशी मनाई जाएंगी. मान्यता है कि इस व्रत को करने से भक्तों के पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

वरुथिनी एकादशी 2026

वरुथिनी एकादशी का व्रत सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जाता है. ‘वरुथिनी’ का अर्थ ‘कवच’ या ‘रक्षक’ होता है. मान्यता है कि यह व्रत भक्त को हर प्रकार के कष्टों और बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करता है. साथ ही, व्यक्ति को दस हजार वर्षों की तपस्या के समान फल प्राप्त होता है.

  • तिथि: 13 अप्रैल 2026, सोमवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल, सुबह 01:16 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल, सुबह 01:08 बजे
  • पारण का समय: 14 अप्रैल को सूर्योदय के बाद सुबह 06:11 से 08:42 के बीच

मोहिनी एकादशी 2026

जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकला था, तब भगवान विष्णु ने असुरों से अमृत की रक्षा करने के लिए ‘मोहिनी’ रूप धारण किया था. इसी उपलक्ष्य में मोहिनी एकादशी मनाई जाती है. मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य मोह-माया के बंधनों से मुक्त होता है और उसके संचित पापों का नाश होता है. मान्यता है कि भगवान राम ने भी अपने वनवास के दौरान इस व्रत का पालन किया था.

  • तिथि: 27 अप्रैल 2026, सोमवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल, शाम 06:06 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल, शाम 06:15 बजे
  • पारण का समय: 28 अप्रैल को सुबह 05:43 से 08:21 के बीच

एकादशी व्रत के नियम

  • दशमी से परहेज: एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाते हैं. इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन और मांस से बचना चाहिए.
  • चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है.
  • पारण: व्रत का समापन हमेशा द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, तभी व्रत का पूर्ण फल मिलता है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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