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बिहार : सबसे बड़े सियासी परिवार पर आफत, बेटों का राजनीतिक कैरियर और पार्टी को बचाने की चुनौती

Updated at : 08 Jul 2017 10:03 AM (IST)
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बिहार : सबसे बड़े सियासी परिवार पर आफत, बेटों का राजनीतिक कैरियर और पार्टी को बचाने की चुनौती

आशुतोष कुमार पांडेय @ पटना पटना : बिहार का सबसे बड़ा सियासी परिवार इन दिनों दान में मिली जमीन को लेकर पूरी तरह मुसीबत में घिरता नजर आ रहा है. परिवार के मुखिया राजद सुप्रीमो लालू यादव की कौन कहे, राजनीति में नये-नये सक्रिय हुए परिवार के चेहरे भीमुसीबतों की जद में हैं. एक तरह […]

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आशुतोष कुमार पांडेय @ पटना

पटना : बिहार का सबसे बड़ा सियासी परिवार इन दिनों दान में मिली जमीन को लेकर पूरी तरह मुसीबत में घिरता नजर आ रहा है. परिवार के मुखिया राजद सुप्रीमो लालू यादव की कौन कहे, राजनीति में नये-नये सक्रिय हुए परिवार के चेहरे भीमुसीबतों की जद में हैं. एक तरह से कहें, तो लालू यादव का पूरापरिवार ही संकट के दौर से गुजर रहा है. सीबीआई ने लालू के साथ उनकी पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पुत्र उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. इसके पूर्व से ही पुत्री मीसा भारती आयकर विभाग के जांचवपूछताछ का सामना कर रही हैं, बड़े पुत्र और स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव पेट्रोल पंप वाले मामले को लेकर घिरे हुए हैं. लालू यादव पर चारा घोटाले को लेकर सुनवाई चल रही है. इस बीच भाजपा नेता सुशील मोदी की ओर से लगातार हो रहा हमला और अब बेनामी संपत्ति पर सीबीआई का शिकंजा. ऐसा लगता है मानों पूरे परिवार पर आफत आयी है, वह भी एक साथ.

एफआइआर में राबड़ी का भी नाम

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी लालू परिवार का अहम हिस्सा हैं. इनके ऊपर भी गंभीर आरोप लगे हैं. राबड़ी देवी की राजनीतिक पहचान भी लालू यादव के सियासी सरोकारों के अंदर तक ही सिमटी है. हां, कई बार लालू के जेल जाने के बाद राबड़ी ने परिवार को मजबूती से संभाला, लेकिन उस दौरान पार्टी पूरी तरह निष्क्रिय रही. इन दिनों राबड़ी मीडिया में लालू के इशारे पर या विधान परिषद जाने के दौरान कभी-कभार किसी राजनीतिक मुद्दे पर अपना बयान दे देती हैं, लेकिन जानकार मानते हैं कि ओवरवॉल राबड़ी से पार्टी संभल नहीं पायेगी. राबड़ी देवी पर यह आरोप है कि उन्होंने लालू के रेल मंत्री और अपने मुख्यमंत्री रहते हुए अपने नाम से 18 फ्लैट लिखवाए. सुशील मोदी ने अपने आरोपों में यह दावा कियाहै कि 18,652 स्क्वायर फीट में बने यह फ्लैट राबड़ी देवी के नाम पर हैं. सीबीआई ने राबड़ी देवी पर भी एफआइआर दर्ज किया है.सीबीआईएफआइआर के अनुसार आईआरसीटीसी डील में भी राबड़ी को भी फायदा पहुंचा है.

चर्चित चेहरा तेज प्रताप

लालू यादव के बड़े पुत्र कभी बांसुरी बजाकर, तो कभी जलेबी बनाकर सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में चर्चा का विषय बने रहते हैं. जानकारों की मानें, तो तेज प्रताप के पास योग्यता के रूप में राजनीतिक विरासत का होना बहुत बड़ा फैक्टर है. तेज प्रताप अपने दम पर पार्टी के किसी कोने को संभालने में सक्षम नहीं हैं. स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर अभी तक काम-काज भी सामान्य रहा है. सुशील मोदी के खुलासे की मानें तो तेज प्रताप को भाजपा सांसद रमा देवी ने जमीन दान में दी थी. 13 एकड़ जमीन 1992 में तेज प्रताप को गिफ्ट में मिली. उस समय तेज प्रताप की उम्र महज तीन साल कुछ महीने रही होगी. आरोपों के मुताबिक, यह जमीन तेज प्रताप द्वारा किये गये सेवा के नाम पर दी गयी. जमीन मुजफ्फरपुर के कुढ़नी में है. साथ ही,यहभीआरोप है कितेजने गलत जमीन आवंटन के दस्तावेज देकर पेट्रोल पंप का आवंटन कराया और अपने मॉल की मिट्टी को बिना टेंडर चिड़िया घर को देकर मिट्टी घोटाले को अंजाम दिया.

उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी घेरे में

तेजस्वी यादव इस परिवार के एक अहम किरदार हैं. इसी वर्ष राजगीर में आयोजितपार्टी की बैठक में लालू यादव ने मंच से यह इशारा भी कर दिया, कि उनके बाद उनकी राजनीतिक विरासत को तेजस्वी ही संभालेंगे. तेजस्वी बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं. तेजस्वी को लालू यादव ने अभी राजनीति में प्रोजेक्ट करने का काम ही शुरू किया था, तब तक सीबीआई ने अपने एफआइआर में उनका नाम जोड़ दिया. सीबीआई के एफआइआर के मुताबिक लालू के रेल मंत्री बनने के बाद सुजाता होटल्स के मालिक हर्ष और विनय कोचर, लालू के करीबी प्रेमचंद्र गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता और आईआरसीटीसी के अधिकारियोंनेएक साथ मिलकर कथित तौर पर वित्तीय और आपराधिक साजिश रची और इसी साजिश के तहत विनय कोचर ने 25 फरवरी, 2005 को पटना में तीन एकड़ की कीमती जमीन को महज 1.47 करोड़ रुपये में डिलाइट मार्केटिंग को बेच दी. जो सर्किल रेट से काफी कम थी. एफआईआर के मुताबिक इस कंपनी का मालिकाना हक पीसी गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता के पास था, जो हकीकत में लालू यादव की बेनामी कंपनी थी. इसके लाभार्थी तेजस्वी यादव के अलावा लालू का पूरा परिवार भी है.

पार्टी को एकजुट रखने का संकट

लालू यादव एक हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति के अलावा चारा घोटाले के आरोपों से लगातार दो चार हो रहे हैं. 16 मई को आयकर विभाग ने लालू की बेनामी संपत्ति के 22 ठिकानों पर छापेमारी की, जबकि 7 जुलाई 2017 को 12 ठिकानों पर जिसमें पुरी, गुरूग्राम दिल्ली, पटना, रांची और भुनेश्वर के ठिकानों पर की गयी. उधर, हाल में राज्यसभा सांसद बनी बेटी मीसा भारती और दामाद शैलेश पर भी करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है. मीसा व शैलेश पर आरोप है कि उन्होंने शैल कंपनियों के जरिये आने वाले पैसों से दिल्ली में फॉर्म हाउस खरीदे. वित्तीय गड़बड़ी को लेकर आयकर विभाग मीसा भारती से पूछताछ कर चुका है. कुल मिलाकर, इस बड़े सियासी परिवार के सामने चुनौती यह है कि इस संकट के समय पार्टी को एकजुट कैसे रखा जाये. लालू को यह आशंका पहले से है कि वह जेल जा सकते हैं. राजद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं से एकजुटता का आह्वान इसका ताजा प्रमाण है. वहीं, जानकारों की मानें तो पार्टीमें अंदरखाने पद और परिवारवाद को लेकर काफी दिनों से असंतोष का आलम है. पार्टी यदि थोड़ी भी बिखरती है, तो विपक्ष के साथ पार्टी के असंतुष्ट भी हावी होने की कोशिश कर सकते हैं.

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