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GST : 20 लाख से कम टर्न ओवर वालों को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं, होंगे ये फायदे

Updated at : 14 Jun 2017 8:05 AM (IST)
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GST : 20 लाख से कम टर्न ओवर वालों को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं, होंगे ये फायदे

पटना :बिहारमें वाणिज्यकर मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को संवाद भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंसकेदौरान जीएसटी से जुड़े तमाम तथ्यों पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से बिहार को काफी फायदा मिलेगा. इससे टैक्स चोरी तकरीबन बंद हो जायेगी. साथ ही वर्तमान में केंद्र और राज्य के स्तर पर […]

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पटना :बिहारमें वाणिज्यकर मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को संवाद भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंसकेदौरान जीएसटी से जुड़े तमाम तथ्यों पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से बिहार को काफी फायदा मिलेगा. इससे टैक्स चोरी तकरीबन बंद हो जायेगी. साथ ही वर्तमान में केंद्र और राज्य के स्तर पर जितने भी अप्रत्यक्ष टैक्स हैं, उन सभी को जोड़ कर इनके स्थान पर सिर्फ एक टैक्स जीएसटी लागू होने जा रहा है. इसमें छोटे और बड़े सभी तरह के व्यापारियों को लाभ होगा. 20 लाख से नीचे जिन व्यापारियों का सालाना टर्न ओवर है, उन्हें जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है.

जिनका 75 लाख तक सालाना टर्न ओवर है, वे कंपाउंडिंग टैक्स जमा कर सकते हैं. इसके तहत एक फीसदी टैक्स देना होगा. इसी तरह इतने टर्न ओवर वाले रेस्टोरेंट व्यवसायी भी 2.50प्रतिशत कंपाउंडिंग टैक्स जमा कर सकते हैं. जिन बड़े व्यापारियों का डेढ़ करोड़ का टर्न ओवर है, उन्हें दो अंकों का एचएसएन (हर्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नॉमिक्लेचर) लेना होगा, जबकि पांच करोड़ टर्न ओवर वाले व्यापारियों को चार अंक का एचएसएन लेना पड़ेगा.
जीएसटी विदेशी शराब और तमाम पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू नहीं होगा. जीएसटी लागू करने को लेकर अब तक 16 बैठकें केंद्रीय जीएसटी कमेटी के साथ हो चुकी हैं. इसमें 99प्रतिशत वस्तुओं और 95प्रतिशत नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है. पूरे राज्य में जीएसटी लागू करने के लिए विधानमंडल ने पहले ही प्रस्ताव पारित कर चुका है.
पूरी व्यवस्था हो जायेगी ऑनलाइन
जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स जमा करने, रिटर्न दायर करने से लेकर पूरी व्यवस्था कंप्यूटराइज्ड हो जायेगी. व्यापारियों को सिर्फ बिक्री का रिटर्न दायर करना होगा और उन्हें प्रत्येक महीने यह पता चल जायेगा कि उन्हें कितना टैक्स देना है. इसमें व्यक्ति का हस्तक्षेप कम-से-कम हो जायेगा. एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान बेचने या भेजने में टैक्स की कोई समस्या नहीं रहेगी. किसी एक स्थान पर रजिस्ट्रेशन कराने पर यह सभी जगहों के लिए काम करेगा.
1.37 लाख डीलरों ने ही कराया निबंधन
राज्य में 2.28 लाख डीलर वैट के तहत रजिस्टर्ड हैं. इनमें अब तक सिर्फ 1.37 लाख ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराया है. आठ हजार डीलर ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पैन नंबर अब तक अपडेट नहीं किया है. राज्य में व्यापारी से लेकर अन्य सभी वर्गों के 25 हजार से ज्यादा लोगों को जीएसटी की ट्रेनिंग दी जा चुकी है. इस सिलसिले में 17 जून को केंद्रीय राजस्व सचिव डॉ हसमुख अधिया पटना आ रहे हैं. इस मौके पर एसकेएम हॉल में एक बड़ा कार्यक्रम होगा.
दो कारणाें से बिहार को फायदा
1. बिहार कंज्यूमर प्रधान राज्य है और जीएसटी डेस्टिनेशन आधारित टैक्स है. बिहार में उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा वर्ग हैं. यहां जितने सामान की खरीद होगी, उतने ज्यादा टैक्स का फायदा राज्य को मिलेगा. ऑनलाइन खरीदारी में डिलिवरी एड्रेस के अनुसार इसका टैक्स राज्य को मिलेगा.
2. बिहार को उत्पादक राज्यों की तुलना में क्षतिपूर्ति भी मिलेगी.
जीएसटी से होंगे ये फायदे
– किसी व्यापारी को कई स्थानों पर रजिस्ट्रेशन और टैक्स देने की झंझट से निजात मिलेगी.
– व्यवसाय में लिक्विडिटी बढ़ेगी. पूरा देश एक बाजार के रूप में उभरेगा.
– राज्य का टैक्स बेस या कलेक्शन बढ़ेगा.
– सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स खत्म हो जायेंगे. सिर्फ चार टैक्स श्रेणियां- 4, 12, 18 और 28 प्रतिशत रहेंगी.
– विदेशी निवेश का वातावरण विकसित होगा. टैक्स चोरी बंद होगी. जहां जिस माल की खपत होगी, उन राज्यों को मिलेगा टैक्स.
– पूरे देश में एक ही इ-वे चालान व्यवस्था लागू होगी. इससे कोई राज्य देख सकता है कि, किस ट्रक पर क्या सामान आ रहा.
– वाणिज्यकर विभाग की जांच चौकियों का उपयोग होगा समाप्त.
कई दवाओं के दाम 2.29फीसद तक बढ़ेंगे
नयी दिल्ली : जीएसटी प्रणाली के लागू होने के बाद अधिकांश जरूरी दवाओं के दाम 2.29प्रतिशत तक बढ़ जायेंगे. सरकार ने अधिकांश जरुरी दवाओं पर 12 प्रतिशत की जीएसटी दर तय की है. मौजूदा व्यवस्था में इन पर लगभग नौ प्रतिशत का कर लगता है. वैसे इंसुलिन सहित कुछ दवाओं के दाम कम होंगे, क्योंकि सरकार ने इनके लिए जीएसटी की दर पूर्व प्रस्तावित 12 प्रतिशत से घटा कर पांच प्रतिशत की है. जरूरी दवाओं की राष्टीय सूची में हेपरिन, वार्फेरिन, डिलटियाजेम, डियाजेपेम, इबुप्रोफेन, प्रोप्रानोलोल व इमातिनिब शामिल है. इस बीच केंद्र ने स्पष्ट किया कि जीएसटी एक जुलाई से ही लागू होगा.
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