दो साल में टेक्सटाइल और लैदर सेक्टर में 611 करोड़ के 100 निवेश प्रस्ताव

Published at :03 Jul 2024 12:31 AM (IST)
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दो साल में टेक्सटाइल और लैदर सेक्टर में 611 करोड़ के 100 निवेश प्रस्ताव

बिहार में टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी को लागू हुए ठीक दो साल हो चुके हैं. इन दो सालों के अंदर 611 करोड़ से अधिक के 100 निवेश प्रस्ताव आये हैं.

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संवाददाता,पटना बिहार में टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी को लागू हुए ठीक दो साल हो चुके हैं. इन दो सालों के अंदर 611 करोड़ से अधिक के 100 निवेश प्रस्ताव आये हैं. उद्योग विभाग ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दी है. जमीन भी आवंटित की गयी है.आये प्रस्तावों में से करीब 50 फीसदी प्रस्ताव धरातल पर उतर भी गये हैं. टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी के तहत आवेदन की प्रक्रिया 30 जून को खत्म हो चुकी है.हालांकि वित्तीय मंजूरी के लिए आवेदन 30 जून 2025 तक जमा किये जा सकेंगे.उद्योग विभाग के आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पॉलिसी की आवेदन प्रक्रिया के समयावधि प्रस्ताव बढ़ाने की तैयारी अंतिम दौर में है. जानकारी के अनुसार,टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी के तहत आये 100 प्रस्तावों में 88 प्रस्ताव अकेले टेक्सटाइल सेक्टर में आये हैं.इनमें 481.89 करोड़ रुपये के निवेश होने का अनुमान है. बिहार की अर्थव्यवस्था में यह बड़ा बदलाव है.दरअसल पूरे भारत में सबसे अधिक टेक्सटाइल के कुशल श्रमिक बिहार के हैं. इन निवेश प्रस्तावों के चलते टेक्सटाइल के कुशल श्रमिकों को न केवल अपने घर में रोजगार मिलेगा,बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. यह देखते हुए कि बिहार के उत्पादों को न केवल समूचे पूर्वी भारत,बल्कि बांग्लादेश और नेपाल तक बाजार भी मिलेगा.इधर,इस पॉलिसी के तहत लैदर सेक्टर में बिहार में पॉलिसी के तहत 129.47 करोड़ के 12 निवेश प्रस्ताव आये हैं.इनमें अधिकतर धरातल पर उतरे हैं.काफी कुछ उतरने वाले हैं. टेक्सटाइल सेक्टर के बड़े निवेश प्रस्ताव: वी-टू , आरएससीएस इंटरनेशनल, कॉसमॉस टेक्सटाइल, देवनिट टेक्सटाइल, हाई स्प्रिट कॉमर्सियल वेंचर,निजिल जैसे ब्रांड और मुजफ्फरपुर और पटना के बैग क्लस्टर आदि शामिल हैं. लेदर सेक्टर के बड़े प्रस्ताव:लेदर सेक्टर में मधुबनी में सावी लेदर्स, वैशाली में कॉम्पीटेंस एक्सपोर्ट और पटना के पालीगंज में आरकेडी स्पोर्ट्स जैसे ब्रांड बिहार आ चुके हैं. सावी लैदर्स का मधुबनी में 100 करोड़ से अधिक का निवेश है. विशेष: टेक्सटाइल एवं लैदर पॉलिसी जून 2022 में आयी. वित्तीय वर्ष 2022-23 में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक उत्पादन और मांग कम होने की वजह से इन दोनों सेक्टर में बाजार अच्छा नहीं रहा. लेकिन पिछले साल अप्रैल 2023 से बाजार में सुधार हुआ. इससे बिहार में कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई .

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