जेपी गंगा पाथ-वे पर फूड स्टॉल आवंटन में देरी, सैकड़ों परिवारों की रोजी पर संकट

Delay in allotment of food stalls on JP Ganga Path-Way, livelihood of hundreds of families in danger
Patna News: पटना का मरीन ड्राइव चमक रहा है, लेकिन इसके किनारे रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों लोगों की जिदगी ठहरी हुई है. JP गंगा पाथ-वे पर फूड स्टॉल आवंटन में हो रही देरी अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि आजीविका का गंभीर संकट बन चुकी है.
Patna News: राजधानी पटना के जे.पी. गंगा पाथ-वे पर लगाए जाने वाले फूड स्टॉल्स के आवंटन में लगातार हो रहे विलंब से सैकड़ों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. इनमें बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं शामिल हैं, जिनके लिए ये फूड स्टॉल आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन का जरिया थे. अब आवंटन प्रक्रिया अटकी होने से उनकी आमदनी पूरी तरह ठप हो चुकी है.
जब मरीन ड्राइव बना था रोजगार का केंद्र
गंगा पाथ-वे के शुरुआती दौर में यहां सैकड़ों फूड स्टॉल्स संचालित हो रहे थे. शाम ढलते ही यह इलाका स्थानीय लोगों और पर्यटकों से गुलजार रहता था. चाय, चाट, स्नैक्स और स्थानीय व्यंजनों के जरिए न सिर्फ शहर की रौनक बढ़ती थी, बल्कि सैकड़ों परिवारों की रसोई भी चलती थी.
खास बात यह थी कि इन स्टॉल्स का संचालन करने वालों में बड़ी संख्या उन महिलाओं की थी, जिनके पास रोजगार के सीमित विकल्प थे.
आवंटन में देरी और बढ़ती आर्थिक परेशानी
फूड स्टॉल्स के नए सिरे से आवंटन की प्रक्रिया शुरू तो हुई, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है. इस देरी का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह इसी पर निर्भर थी.
कई परिवारों के सामने किराया, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से अपील
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. राजद नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से अपील की है कि फूड स्टॉल आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतते हुए त्वरित निर्णय लिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि गंगा पाथ-वे का इलाका काफी विस्तृत है और मौजूदा संख्या से ज्यादा फूड स्टॉल्स लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके.
सरकार की ओर से पहले संकेत दिए गए थे कि प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों का संचालन जीविका और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किया जाएगा. इससे महिलाओं को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जगी थी. अब देखना यह है कि प्रशासन इस दिशा में कितनी जल्दी फैसला लेता है और मरीन ड्राइव फिर से रोजगार का हब बन पाता है या नहीं.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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