केके पाठक के बाद अब पटना हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के इस अवर सचिव पर लगाया अर्थदंड, जानें पूरा मामला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Jul 2023 10:44 PM

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तलब किये जाने के बाद भी हाजिर नहीं होने पर नाराज हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अवर सचिव पर पांच हजार रूपए का अर्थदंड लगाया है. जस्टिस पी बी बजंत्री व जस्टिस जितेंद्र कुमार की खंडपीठ ने सुजीत सुमन द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

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पटना. कोर्ट द्वारा तलब किये जाने के बाद भी हाजिर नहीं होने पर नाराज हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अवर सचिव पर पांच हजार रूपए का अर्थदंड लगाया है. जस्टिस पी बी बजंत्री व जस्टिस जितेंद्र कुमार की खंडपीठ ने सुजीत सुमन द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इससे पहले पटना हाईकार्ट ने तारीख पर उपस्थित नहीं होने के लिए शिक्षा विभाग के अवर सचिव पर अर्थदंड लगाया था.

हाईकोर्ट ने अगस्त 2021 में दिया था निर्देश

यह मामला केंद्रीय एस सी सी परीक्षा में चयन होने के बाद सड़क परिवहन मंत्रालय में याचिकाकर्ता की नियुक्ति का है. कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया की हाईकोर्ट ने अगस्त 2021 में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि दो महीने के अंदर याचिकाकर्ता की बहाली के संदर्भ में एक ठोस निर्णय लें. लेकिन दो साल के बाद भी अब तक निर्णय नहीं लिया जा सका इसीलिए अवमानना की यह याचिका दायर की गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता एसीसी परीक्षा से चयन होने के बाद सड़क परिवहन मंत्रालय में लोअर डिविजन क्लर्क की बहाली हेतु अनुशंसित किया गया था.

चार जुलाई 2023 को अंडर सेक्रेट्री को हाजिर होना था

इसके बाद उक्त मंत्रालय ने याचिकाकर्ता को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के तहत काम करने को भेजा जहां उसे मेडिकल के रूप से अनफिट घोषित किया गया. अपने कैरियर को अधर में लटका देख याचिकाकर्ता पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर किया. आदेश का दो साल से अनुपालन नहीं होने पर नाराज खंडपीठ में चार जुलाई 2023 को अंडर सेक्रेट्री को हाजिर होने का आदेश दिया था, लेकिन सुनवाई में वह हाइकोर्ट में उपस्थित नहीं हुए. एडीशनल सॉलीसीटर जनरल डॉक्टर के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि संबंधित वकील की गलती से अंडर सेक्रेट्री को कोर्ट के आदेश को प्रेषित नहीं किया जा सका.

निजी विद्यालयों में को 25 प्रतिशत कोटे के लिए कितना दिया अनुदान

इधर, राज्य योजना अंतर्गत कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के क्रियान्वयन के अंतर्गत प्रस्वीकृत प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत कोटे के अधीन कमजोर और अलाभकारी समूह के नामांकित छात्र, छात्राओं की प्रतिपूर्ति के लिए वित्तीय सहायक अनुदान के रूप में दी जाने वाली राशि को स्वीकृत एवं विमुक्ति नहीं करने पर हाइकोर्ट ने गंभीर रुख अख्तियार करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है . मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायाधीश पार्थसारथी की खंडपीठ ने इस मामले को लेकर अभिषेक कुमार एवं अन्य द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.

समय पर उपलब्ध नहीं करायी जा रही राशि

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया कि बिहार के निजी एवं प्रस्वीकृत विद्यालयों के कमजोर और और अलाभकारी समूह के नामांकित 25 प्रतिशत छात्र, छात्राओं को प्रतिपूर्ति हेतु आवंटित की गई राशि को समय पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसके लिए बनाये गये नियम और नियमावली के तहत राशि सरकार द्वारा आवंटित किया जा रहा है पर कुछ जिलों के विद्यालयों में राशि उपलब्ध कराई जा रही है और कुछ जिलों के विद्यालयों में यह राशि उपलब्ध नहीं हो रही है .संबंधित पदाधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर ऐसा किया जा रहा है .

राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखा गया था पत्र

मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने 19 दिसंबर 2022 को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी और सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को पत्र लिखता. पत्र में उन्होंने कहा है कि राज्य योजना अंतर्गत बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के क्रियान्वयन के अंतर्गत प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों में कमजोर एवं और अलाभकारी समूह के नामांकित 25 प्रतिशत छात्र छात्राओं की प्रतिपूर्ति हेतु जिलों को आवंटित राशि संबंधित विद्यालयों को समय उपलब्ध कराया जाये. इस पत्र के निर्गत होने के बाद भी बहुत सारे ऐसे विद्यालय हैं. जहां की यह राशि उपलब्ध नहीं कराई गयी है.

कुल राशि एक अरब तीन करोड़ों छब्बीस लाख अस्सी हजार पांच सौ बीस रुपया

उन्होंने कोर्ट को बताया कि वित्तीय वर्ष 2022 – 23 में राज्य योजना अंतर्गत बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के क्रियान्वयन के अंतर्गत स्वीकृत प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत कोटे के अधीन कमजोर एवं अलाभकारी समूह के नामांकित छात्र-छात्राओं की प्रतिपूर्ति हेतु वित्तीय वर्ष 2018 -19 के लिए शेष देय कुल राशि एक अरब तीन करोड़ों छब्बीस लाख अस्सी हजार पांच सौ बीस रुपया स्वीकृत की गई लेकिन उसके बावजूद भी यह राशि उपलब्ध नहीं कराई गई. इससे सरकार द्वारा वर्ग एक से आठ तक के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के कानून एवं उसके कार्यान्वयन में काफी परेशानियां हो रही है . कमजोर एवं गरीब तबके के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं.

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