Bihar News : 27 हजार ई-रिक्शा, सिर्फ 643 EV कनेक्शन! मुफ्त बिजली से चार्जिंग और पेसू को रोज लाखों चूना

घरेलू बिजली से चार्जिंग से पेसू को हर दिन लाखों का नुकसान.
Patna E-Rickshaw Charging : पटना में 27 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं लेकिन सिर्फ 643 ने EV चार्जिंग कनेक्शन लिया है. घरेलू बिजली से चार्जिंग से पेसू को हर दिन लाखों का नुकसान हो रहा है.
Patna E-Rickshaw Charging : अनुपम कुमार, पटना : राजधानी पटना की सड़कों पर हर दिन 27 हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं. मगर चौंकाने वाली बात ये है कि महज 643 लोगों के पास अब तक इवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) चार्जिंग का एलटी कनेक्शन है. अब सवाल ये है कि से 2000 से अधिक ई-रिक्शा कैसे चार्ज हो रहे हैं? क्या ये चोरी की बिजली से चार्ज हो रहे हैं या डोमेस्टिक कनेक्शन से?
पेसू को लगाया जा रहा चूना
बिहार में 125 यूनिट बिजली फ्री दी जा रही है. इसके अलावा भी सरकार बिजली पर सब्सिडी भी दे रही है. मगर ये घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है. सरकार की इस सस्ती बिजली का उपयोग व्यावसायिक किया जा रहा है. इससे पेसू को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित रियायती दर पर बिल चुकाया जा रहा है और पेसू को चूना लगाया जा रहा है.
परिवहन कार्यालय में रजिस्टर्ड हुए 26173 ई-रिक्शा
आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 तक छह वर्षों में पटना जिला परिवहन कार्यालय में 26173 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हुए हैं. इनमें से पहले भी जिला परिवहन कार्यालय में लगभग 10 हजार ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हो चुके हैं. इन 36 हजार ई-रिक्शा में से नौ हजार पटना जिला के देहाती क्षेत्राें में चलते हैं. जबकि 27 हजार हर दिन पटना शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं.
चार्जिंग स्टेशन चलाने वालों ने ही लिया कनेक्शन
ईवी को चार्ज करने के लिए व्यावसायिक कनेक्शन लेने वालों में ज्यादातर ऐसे हैं, जो अपना चार्जिंग स्टेशन चलाते हैं. इनके पास पांच से सात चार्जिंग प्वाइंट बने होते हैं. जिनसे हर रोज ये 10 से 15 ई-रिक्शा चार्ज करते हैं. हर दिन लगभग छह से सात हजार ई-रिक्शा चालक इन चार्जिंग स्टेशनों पर ई-रिक्शा चार्ज करते हैं, लेकिन लगभग 20 हजार ई-रिक्शा चालक ऐसे हैं, जो घर पर ही लगे प्वाइंट से ई-रिक्शा चार्ज करते हैं. यानी बिहार सरकार और पेसू को चूना लगाते हैं.
प्रति यूनिट 2.25 से 3.30 रुपये तक का लग रहा घाटा
घरेलू कनेक्शन से किराया पर चलाने के लिए ई-रिक्शा को चार्ज करने से पेसू को प्रति यूनिट 2.25 से 3.30 रुपये तक का नुकसान हो रहा है. घरेलू उपभोक्ताओं को 5.42 रुपये और 6.47 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है, वहीं, ईवी कनेक्शन से चार्ज करने पर 8.72 पैसे प्रति यूनिट देना पड़ता है.
तीन से आठ घंटे तक लगते हैं बैटरी चार्ज में
ई-रिक्शा में दाे तरह की बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें पुरानी तकनीक वाली बैटरी, जिसमें पांच बैटरी लगी होती है, इसे चार्ज करने में आठ से नौ घंटे तक का समय लगता है. जबकि नयी तकनीक वाली बैटरी जो सिंगल बैटरी होती है. इसे चार्ज करने में वोल्टेज की उपलब्धता के आधार पर तीन से चार घंटे का समय लगता है. बैटरी के पूरा चार्ज हो जाने पर ई-रिक्शा 100 से 120 किमी तक की दूरी तय कर सकता है.
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लेखक के बारे में
By Keshav Suman Singh
बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्स.कॉम बतौर असिसटेंट न्यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।
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