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बिहार के मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं, टेलीमेडीसिन के जरिए उठा सकते हैं ओपीडी का लाभ

Updated at : 18 Jan 2023 11:07 PM (IST)
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बिहार के मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं, टेलीमेडीसिन के जरिए उठा सकते हैं ओपीडी का लाभ

बिहार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुदूर गांव या शहर के मरीजों को सोमवार से लेकर शनिवार तक ओपीडी की सेवा दी जा रही है. इसमें मरीजों को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मुफ्त टेलीमेडीसिन और इ-संजीवनी के माध्यम से ओपीडी का परामर्श दिया जा रहा है.

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बिहार में अब मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए न किसी अस्पताल जाने की आवश्यकता है और न ही इसके लिए किसी खर्च की जरूरत है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर पर ही इलाज की सुविधा पहुंचाने के लिए ओपीडी की सेवा बहाल की गयी है. टेलीमेडीसिन और इ-संजीवनी एप से बिहार के औसतन 20 हजार मरीज ओपीडी सेवा का लाभ उठा रहे हैं. ऐसे मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर लंबी कतार में खड़े होने की आवश्यकता भी नहीं है.

सुबह नौ से शाम चार बजे तक दिया जाता है परामर्श

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुदूर गांव या शहर के मरीजों को सोमवार से लेकर शनिवार तक ओपीडी की सेवा दी जा रही है. इसमें मरीजों को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मुफ्त टेलीमेडीसिन और इ-संजीवनी के माध्यम से ओपीडी का परामर्श दिया जा रहा है. राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक टेलीमेडिसीन के माध्यम से राज्य में 29 लाख 10 हजार मरीजों को परामर्श दिया गया है, जबकि इ-संजीवनी एप के माध्यम से 64 हजार 500 मरीज इसका लाभ उठा चुके हैं.

मुफ़्त में मिल जाती है दवा

संजय कुमार सिंह ने बताया कि टेलीमेडिसिन के लिए मरीज को अपने गांव के स्वास्थ्य उपकेंद्र पर जाना होता है. वहां पर एएनएम या सीएचओ द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मरीजों की डॉक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करायी जाती है. साथ ही चिकित्सक द्वारा दिये गये परामर्श के अनुसार उपलब्ध दवा भी मरीज को मुफ्त में मिल जाती है.

प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं इ-संजीवनी एप

इ-संजीवनी एप को कोई भी व्यक्ति गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर उसके माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डॉक्टरों से परामर्श ले सकता है. गांव के मरीजों को इस सुविधा का अधिक लाभ मिल रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय पार्ट-2 में सुदूर गांवों में इसके माध्यम से इलाज की सुविधा आसानी से पहुंचायी जा रही है.

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