BPSC पेपर लीक मामले में नया खुलासा, EOU टीम की जांच में शक्ति के बैंक खाते से भारी ट्रांजेक्शन का चला पता
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 02 Jul 2022 7:27 AM
BPSC Paper Leak Case: इओयू की टीम इन सभी लेन-देनों की जांच कर रही है. जांच टीम ने गया के डीएम को भी नोटिस जारी कर इस बात का लिखित जवाब मांगा है कि किस आधार पर रामशरण सिंह इवनिंग कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने की अनुशंसा की गयी, जबकि इसकी मान्यता रद्द थी.
बीपीएससी पेपर लीक मामले में गया के डेल्हा स्थित रामशरण सिंह इवनिंग कॉलेज के प्राचार्य और केंद्र अधीक्षक शक्ति कुमार ने इओयू के समक्ष कई राज खोले हैं. शक्ति कुमार से इस मामले की जांच कर रही इओयू की टीम ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की. शुक्रवार को शक्ति की रिमांड अवधि समाप्त हो गयी. उसे वापस जेल भेज दिया गया. सूत्रों के मुताबिक शक्ति के विभिन्न बैंक खातों में पिछले एक दो महीने के भीतर लाखों रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं.
इओयू की टीम इन सभी लेन-देनों की जांच कर रही है. जांच टीम ने गया के डीएम को भी नोटिस जारी कर इस बात का लिखित जवाब मांगा है कि किस आधार पर रामशरण सिंह इवनिंग कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने की अनुशंसा की गयी, जबकि इसकी मान्यता रद्द थी. डीएम की रिपोर्ट आने के बाद इससे जुड़े कई और लोगों की गिरफ्तारी संभावित है. इओयू ने 24 जून को शक्ति कुमार को गिरफ्तार किया था.
आरोपित शक्ति कुमार के आर्म्स लाइसेंस को डीएम डॉ त्यागराजन ने शुक्रवार को रद्द कर दिया. डीएम कार्यालय से बताया गया है कि शुक्रवार को शस्त्र शाखा की कुछ विभिन्न संचिकाओं की जांच में यह पाया गया कि डेल्हा थाने की न्यू कॉलोनी के रहनेवाले तारकेश्वर प्रसाद के बेटे शक्ति कुमार का शस्त्र लाइसेंस दिसंबर, 2021 में इश्यूकिया गया था. जांच के दौरान डीएम ने शक्ति कुमार के आर्म्स लाइसेंस को रद्द कर दिया.
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पटना हाइकोर्ट ने बीपीएससी की 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया. चीफ जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने संजीव कुमार मिश्रा द्वारा दायर लोकहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इस जनहित याचिका में कहा गया है कि 67वीं पीटी का में जो पेपर लीक हुआ है, इसकी जांच सीबीआइ से करायी जाये, ताकि जिला प्रशासन के साथ-साथ बीपीएससी के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो सके. महाधिवक्ता ललित किशोर की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज करते हुए इस मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग को ठुकरा दिया.
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