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जिले में 19 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

Updated at : 21 Jul 2024 11:09 PM (IST)
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जिले में 19 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

आइए हम सब पर्यावरण संरक्षण के लिए लें 11 सूत्री संकल्प

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फोटो कैप्शन – बना तालाब.

– पौधे की नर्सरी.

प्रतिनिधि, नवादा सदर

पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने जरूरी हैं. पृथ्वी बचेगी, तभी हम और आप बचेंगे. इसी सोच को लेकर जल जीवन हरियाली अभियान के तहत काम किया गया है. पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से चलाये जा रहे जल, जीवन, हरियाली अभियान के तहत जिले में कई बड़े काम हुए हैं. कोविड-19 के संक्रमण ने हमें सिखाया कि प्रकृति के साथ हमारे संबंध खराब होने के कितने खतरनाक परिणाम हो सकते हैं. वनों की लगातार कटाई से जलवायु में साफ परिवर्तन दिख रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को पेड़-पौधों के अलावा प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले चिजों के उपयोग से आमजन को रोकना है. जल, जीवन हरियाली, चारों ओर खुशहाली का 11 सूत्री संकल्प लोगों को अपनाने की जरूरत है.

पर्यावरण संरक्षण को लेकर आइये हमसब लें 11सूत्री संकल्प

1. प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी रक्षा करेंगे.

2. आसपास के तालाब, नदी, पोखर व अन्य जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करूंगा.

3. आवश्यकता से अधिक जल का उपयोग नहीं करूंगा, इस्तेमाल के बाद नल बंद करूंगा.

4. घर, विद्यालय, पड़ोस में वर्षा के जल को संचय करने के लिए प्रेरित करूंगा.

5. बिजली का उपयोग आवश्यकतानुसार ही करूंगा, घर से बाहर निकलते समय बिजली के बल्ब, पंखा बंद कर दुंगा.

6. अपने घर, विद्यालय व आस-पड़ोस को स्वच्छ रखते हुए, कूड़े को कूड़ेदान में डालूंगा.

7. प्लास्टिक, पॉलीथिन का उपयोग बंद कर कपड़े, कागज के थैलों का उपयोग करूंगा व दूसरे को प्रेरित करूंगा.

8. जीव-जंतुओं एवं पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम का भाव रखूंगा, इसके लिए यथा संभव दाना-पानी की व्यवस्था करूंगा.

9. नजदीक के कार्य पैदल अथवा साइकिल से करूंगा.

10. कागज का अनावश्यक उपयोग नहीं करूंगा, अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा.

11. मैं खुले में शौच नहीं कर शौचालय का उपयोग करूंगा

19 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

पूरे राज्य में जल जीवन हरियाली के तहत 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. नवादा जिले में इसके तहत 19 लाख लगाने का लक्ष्य रखा गया है. जिला प्रभारी मंत्री प्रेम कुमार ने विधिवत रूप से इसकी शुरुआत की है. पृथ्वी दिवस तक पौधे लगाने का टारगेट लिया गया है. वन विभाग के साथ ही मनरेगा, जीविका, लघु सिंचाई, कृषि, शिक्षा आदि विभागों की ओर से भी इस काम को पूरा किया गया. जीविका की महिलाओं ने लगभग एक लाख पौधे लगाने की बात कही जा रही है. लघु सिंचाई विभाग की ओर से बनाये गये तालाबों के किनारे 50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन यह अभी पूरा नहीं हो पाया है. सरकार ने जो लक्ष्य रखा है, इसमें इमारती लकड़ियों से संबंधित पेड़ों के अलावा एक लाख से अधिक फलदार पौधे भी लगाये जाने हैं. वन विभाग के अधिकारी ने जानकारी दी है कि जीविका की महिलाओं को फलदार पौधे उपलब्ध कराये गये हैं.

सरकार की योजनाओं से मिला प्रोत्साहन:

मुख्यमंत्री कृषि वानिकी योजना के तहत पौधारोपण करने पर किसानों को आर्थिक लाभ भी दिया गया. इस योजना के तहत कम से कम 25 पौधा लगाने वाले किसानों को शुरुआत में तो 10 रुपये प्रति पौधा की दर से सिक्योरिटी मनी देने का प्रावधान है. इसके बाद तीन वर्षों तक पौधे की सही देखभाल होने के बाद वन विभाग की ओर से समीक्षा करने पर यदि पाया जाता है कि 50% से अधिक पौधे सुरक्षित बच गये हैं, तो प्रत्येक पौधा 70 रुपये दिये जायेंगे.

जिले में 116 तालाबों का कराया गया जीर्णोद्धार

प्रकृति रक्षा के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से जल, जीवन, हरियाली योजना के तहत जिले में बेहतर लाभ मिलता दिख रहा है. लघु जल संसाधन विभाग की ओर से जिले में चयनित पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले 116 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है. इन तालाबों के अतिक्रमण को हटाते हुए इसकी खुदाई करके समाज उपयोगी बनाकर इसका निर्माण हुआ है. बरसात के समय इन बनाये गये तालाबों में पानी जमा हुआ है, जो कि हमारे लिए भूमिगत जल संरक्षित करने का एक बेहतर विकल्प बना है. वाटर लेवल भागने की समस्या को बनाये गये तालाबों के माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकेगा. भू-गर्भ जल को संरक्षित रखने के लिए जल संचय के उपाय करने जरूरी हैं.

जिला में तालाबों का निर्माण काम पूरा कर लिया गया है. बरसात के समय में यहां अब पानी जमा होने लगा है. बड़े तालाबों में पानी जमा होने के बाद निश्चित ही भूगर्भ जल अस्तर को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. गांव में बड़ा तालाब बन जाने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों को पटवन करने की सुविधा भी मिल रही है. इसके अलावा मछली पालन में वह गांव आत्मनिर्भर बना है. तालाब की खुदाई के समय निकाली गयी मिट्टी तालाब के चारों तरफ पेड़ पौधों को उगाने में मददगार साबित हुआ हैं. जल जीवन हरियाली कार्यक्रम में पहला वाक्य जल है. जल के प्राकृतिक स्रोत वर्षा जल को संचित करने में बनाये गये तालाब काफी सहायक साबित होंगे. जिले में खोदे गये कुछ तालाब राज्य के बड़े तालाबों में शामिल है. वारिसलीगंज प्रखंड के अपसढ़ तथा जमुआवां, मेसकौर तालाब, मंझवे पहाड़ी पोखर तालाब, बदलपुर नरहट तालाब, लीलो पोखर पकरीबरावां, वीरनावा काशीचक पोखर आदि प्रमुख पोखर है, जो कि जिले में बनाये गये हैं.

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