सदर एसडीओ पर परिवाद दायर न्याय. सूचना के अधिकार की जद में अधिकारी

Updated at : 05 Feb 2017 6:18 AM (IST)
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सदर एसडीओ पर  परिवाद दायर न्याय. सूचना के अधिकार की जद में अधिकारी

सदर एसडीओ के साथ कौआकोल एमओ व पीडीएस दुकानदार पर भी धोखाधड़ी का केस दायर नवादा कार्यालय : सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त सूचनाओं की जद में आलाधिकारी भी आने लगे हैं. व्यवहार न्यायालय में शनिवार को आरटीआइ एक्टिविस्ट प्रणव कुमार चर्चिल ने जनवितरण संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में बरती गयी अनियमितता को […]

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सदर एसडीओ के साथ कौआकोल एमओ व पीडीएस दुकानदार पर भी धोखाधड़ी का केस दायर

नवादा कार्यालय : सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त सूचनाओं की जद में आलाधिकारी भी आने लगे हैं. व्यवहार न्यायालय में शनिवार को आरटीआइ एक्टिविस्ट प्रणव कुमार चर्चिल ने जनवितरण संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में बरती गयी अनियमितता को लेकर सदर अनुमंडल पदाधिकारी राजेश कुमार, कौआकोल प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी नीलेश कुमार सहित जनवितरण प्रणाली दुकानदार उमेश कुमार पर धोखाधड़ी सहित भादवि की अन्य धाराओं के तहत परिवाद दायर किया है.
अधिवक्ता संजय प्रियदर्शी ने बताया कि आरटीआइ कार्यकर्ता प्रणव उर्फ चर्चिल ने 20 फरवरी 2016 को लोक सूचना पदाधिकारी सह प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी कौआकोल से जन वितरण प्रणाली विक्रय केंद्र बरौन से जुलाई 2008 से जनवरी 2016 तक का भंडार पंजी, उठाव पंजी, वितरण पंजी व वितरण पंजी से संबंधित सूचना की मांग स्पीड पोस्ट से की थी. एमओ द्वारा 7500 सौ प्रति में सूचना उपलब्ध होने की बात स्वीकारी. इन सरकारी दस्तावेजों की छायाप्रति को उपलब्ध कराने के एवज में दो मार्च 2016 को आरटीआइ कार्यकर्ता चर्चिल से 15 हजार रुपये की मांग की गयी. इससे असंतुष्ट कार्यकर्ता ने प्रथम अपीलीय प्राधिकार के तहत प्रपत्र छह सदर अनुमंडल पदाधिकारी के पास दाखिल किया. 29 अप्रैल 2016 को पदाधिकारी द्वारा इस पर सुनवाई करते हुए 19 मई को सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया. उक्त आदेश पर कार्यकर्ता को अक्तूबर 2014 से जनवरी 2016 तक का अधूरा दस्तावेज उपलब्ध कराया गया. साथ ही अक्तूबर 2014 के पहले की पंजी मोमबत्ती से आग लग जाने से जल जाने की सूचना दी गयी. प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा भी दस्तावेज जलने की घटना को बिना जांच पड़ताल के सत्यापित कर दिया गया. ऐसे में एमओ द्वारा पहले पूरा दस्तावेज का विवरण 75 सौ प्रति में उपलब्ध कराने के लिए 15 हजार रुपये की मांग व उसके बाद दस्तावेज जलने की बात तर्कसंगत प्रतीत नहीं हुई. इसी को लेकर आरटीआइ कार्यकर्ता प्रवीण कुमार चर्चिल ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में भादवि की धारा 420, 487, 488 व 120 बी के तहत परिवाद पत्र संख्या 114/2017 दाखिल किया. न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए 192 सीआरपीसी के तहत इस वाद को एसीजेएम चतुर्थ के न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया है.
कब क्या हुआ
20 फरवरी 2016 : सूचना की मांग
02 मार्च 2016 : सूचना उपलब्ध कराने के लिए शुल्क की मांग
04 अप्रैल 2016: प्रथम अपीलीय प्राधिकार में आवेदन
29 अप्रैल 2016: सुनवाई के बाद दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश
19 मई 2016 : दस्तावेज उपलब्ध कराने की तिथि
18 जून 2016: अधूरा आंकड़ा उपलब्ध करा कर बाकी दस्तावेजों के जलने की सूचना
28 जून 2016: प्रथम अपीलीय प्राधिकार में मामले का निष्पादन
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