ब्रांडेड जैकेट व स्वेटर का युवाओं में बढ़ा क्रेज

Updated at : 30 Nov 2016 8:11 AM (IST)
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ब्रांडेड जैकेट व स्वेटर का युवाओं में बढ़ा क्रेज

नवादा नगर : ठंड का असर बढ़ते ही ऊनी कपड़ा बाजार में रौनक बढ़ गयी है. नोटबंदी के बावजूद लोग अपनी जरूरत की खरीदारी करने में जुटे हैं. घरों में जरूरत के हिसाब से लोग रजाई, कंबल आदि की उपलब्धता में लग गये हैं. जैसे-जैसे ठंड का प्रभाव बढ़ा है लोग अपनी जरूरत के मुताबिक […]

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नवादा नगर : ठंड का असर बढ़ते ही ऊनी कपड़ा बाजार में रौनक बढ़ गयी है. नोटबंदी के बावजूद लोग अपनी जरूरत की खरीदारी करने में जुटे हैं. घरों में जरूरत के हिसाब से लोग रजाई, कंबल आदि की उपलब्धता में लग गये हैं. जैसे-जैसे ठंड का प्रभाव बढ़ा है लोग अपनी जरूरत के मुताबिक बाजार में अपनी पसंद के सामान खरीदने में जुट गये हैं. बाजारों में भी ग्राहकों के पसंद के अनुरूप प्रोडक्ट मिल रहे हैं. ऑनलाइन शॉपिंग से भी खरीदारी का प्रचलन बढ़ा है.
पारंपरिक रजाई का स्थान ले रहा ब्रांडेड: घरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक रजाई के स्थान पर अब ब्रांडेड कंबल व जयपुरी रजाई स्थान बना रहा है. नये पुराने रजाई बनाने का काम करनेवाले कारीगर नये फैशन के दौर में कम काम मिलने का दंश झेल रहे हैं. रजाई के कारीगर मोहम्मद हसनैन ने कहा कि एक रजाई बनाने में लगभग डेढ़ से दो हजार रुपये का खर्च आता है.
कानपुरी अच्छा वाला रूई 140 से 160 रुपये किलो के हिसाब से मिलता है. छह गुणे आठ फुट का बड़ा रजाई बनाने में लगभग पांच किलो रूई लगता है. इसी के अनुपात में साढे तीन से चार सौ रुपये तक इसे बनाने की मजदूरी होती है. यदि सही से काम मिला तो एक दिन में कारीगर अधिकतम दो से तीन रजाई पूरा कर पाते हैं. सिजनल काम में यदि सही से कमाई नहीं होती है तो समस्या बढ़ती है बाजार में नोटबंदी का असर दिख रहा है.जिला में भी खासकर ब्रांडेड स्वेटर, जैकेट, ब्लेजर आदि का क्रेज बढ़ा है. विभिन्न कंपनियों के शो रूम में अपने पसंद के ऊनी सामान खरीदने के लिए लोग जुट रहे हैं.
ठंड के बढ़ते प्रभाव के साथ ही लोग इससे बचने के लिए अपने जरूरत के मुताबिक सामान की खरीदारी कर रहे हैं. मुख्यालय मे भी कई ब्रांडेड कंपनियों के शोरूम खुल गये हैं. यहां पसंद के मुताबिक आइटम को रखा गया है.
ऊन से बने स्वेटर में दिखता है प्यार : हाथ से बुन कर बनाये गये स्वेटर पहनने की परंपरा लगभग समाप्त हो गयी है. लेकिन, अब भी अपनेपन का अहसास हाथ से बुने स्वेटर मे दिखता है. बाजार में खुला ऊन बेचने की कई दुकानें हैं, जहां लोग अपने पसंद के रंगों के ऊन लेकर अपनों के लिए प्यार बुनने का काम कर रहे हैं. खासकर छोटे बच्चों को आने वाली शीतलहर से बचाने के लिए घर में हाथ से बनाये गये स्वेटर काफी मददगार साबित होते हैं. विभिन्न क्वालिटी व रेंज के स्वेटर बाजार में मिल रहेहैं.
खादी भंडार भी बाजार में दे रहा है चुनौती
ठंड में गरमी का अहसास दिलाने के लिए खादी भंडार के ऊनी प्रोडक्ट भी मैदान में उतरे हुए हैं. खादी ग्रामोद्योग द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न रेंज के ऊनी प्रोडक्ट की गांव देहातों के साथ ही शहरी क्षेत्र में भी अच्छी डिमांड है. युवा व नये ग्राहकों को ध्यान में रखकर विभिन्न क्वालिटी के कंबल, चादर, स्वेटर, जैकेट, टोपी, मफलर, शर्ट आदि प्रोडक्ट खादी भंडार के दुकानों में मिल रहे हैं.
खादी भंडार के दुकान में फाइन कंबल 11 सौ 20 रुपये, दो रूखा कंबल 840 रुपये, गोटेदार कंबल 10 सौ 80रुपये, काला कंबल पांच सौ, ऊलेन जैकेट 12 सौ 80, कोट 24 सौ रुपये, बंडी 10 सौ 40 रुपये, स्वेटर लगभग 12 सौ, ऊनी शर्ट नौ सौ, चादर एक से तीन हजार रुपये, शॉल एक हजार से 15 सौ, मोजा 160 रुपये, टोपी 224, मफलर 288 रुपये में खादी भंडार की दुकानों में मिल रहा है.
सड़कों के किनारे भी सज गयीं दुकानें
ऊनी कपड़ों के हरेक माल के दुकानें बाजार में कई स्थानों पर सज गयी हैं. लोगों को कम कीमत में अच्छी डिजाइन की चादर, शॉल, स्वेटर, जैकेट आदि के लिए बाजार में कई फुट कर दुकानें लग गयी हैं. लोगों इन दुकानों से भी अपने जरूरत के मुताबिक खरीदारी कर रहे हैं.
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