शराबबंदी के बाद बॉनफक्सि व व्हाईटनर की मांग बढ़ी

Updated at : 07 Apr 2016 8:43 PM (IST)
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शराबबंदी के बाद बॉनफक्सि व व्हाईटनर की मांग बढ़ी

शराबबंदी के बाद बॉनफिक्स व व्हाईटनर की मांग बढ़ी युवा पीढ़ी अब नशे के लिए कर रहे ऐसे चीजों का इस्तेमालप्रतिनिधि4नवादाबिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद शराब के शौकीन लोग शाम होते ही भटकने लगते हैं. शराब की खोज में कभी इंदिरा चौक तो कभी सद्भावना चौक तो कभी बाईपास का भी चक्कर […]

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शराबबंदी के बाद बॉनफिक्स व व्हाईटनर की मांग बढ़ी युवा पीढ़ी अब नशे के लिए कर रहे ऐसे चीजों का इस्तेमालप्रतिनिधि4नवादाबिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद शराब के शौकीन लोग शाम होते ही भटकने लगते हैं. शराब की खोज में कभी इंदिरा चौक तो कभी सद्भावना चौक तो कभी बाईपास का भी चक्कर लगाने से नहीं चूकते हैं. शाम ढले शराब पीकर मस्त होनेवाले तथा दिन भर की थकान को शराब से मिटानेवाले लोग शाम ढलते ही चौक चौराहों पर एक-दूसरे के साथ शराब के किस्से शुरू कर देते हैं. हालात यह है कि अगर किसी ने यह जानकारी दे दी कि यहां से पांच किलोमीटर दूर फलां होटल में दोगुने कीमत पर अंगरेजी शराब या देसी शराब मिल रही है तो शराब के शौकीन जल्द से जल्द पांच किलोमीटर की दूरी को कम करने का प्रयास करते हैं. बाजार में इन दिनों शराब की पूर्ण बंदी के बाद बॉनफिक्स व व्हाईटनर की मांग तेजी से बढ़ गयी है. एक अप्रैल से पूर्व तक बॉनफिक्स व ब्हाइटनर की मांग स्टेशनरी सामान के रुप में की जाती थी. अब इसकी मांग नशा का उपयोग करनेवाले लोगों द्वारा की जा रही है. एक एक दिन में किताब दुकानों से पैकेट के पैकेट बॉनफिक्स व ब्हाइटनर की मांग की जा रही है. हालात यह हो गयी है कि सुबह में बॉनफिक्स व ब्हाइटनर खरीदने वाले शाम में भी इसे खरीद रहे हैं. कुछ लोगों ने बताया कि शराब के शौक रखने वाले तथा इसकी गिरफ्त में आ चुके लोग किसी भी तरह का नशा करने को तैयार हो गये हैं. गांधी स्कूल व कन्हाई स्कूल के मैदान व बाइपास के होटलों में ऐसे नशा के शौकीन लोग बॉनफिक्स व ब्हाइटनर को एक पॉलीथीन में उलटकर बंद कर देते हैं और उसे कुछ देर बाद नाक के पास लगा कर उसका गंध अपने शरीर में लेते हैं. यह गंध उसे एक अजीब तरह का नशा प्रदान करता है. इनका सेवन करनेवाले लोगों का कहना है कि इससे शरीर में ऊर्जा मिलती है. शराब में जो नशा होती है, कहीं उससे ज्यादा नशा इसमें होती है. बिहार सरकार द्वारा बिहार को नशामुक्त प्रदेश बनाने के उद्देश्य से अपनाये गये शराबबंदी के बाद भी नशा प्रेमी अपने स्तर से नशा का जुगाड़ करने में लग गये है. बताया जाता है कि बॉनफिक्स और व्हाइटनर का निर्माण में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. कई लोग बॉनफिक्स को जला कर इसे और भी नशीला बनाते हैं. चिकित्सकों का मानना है कि शराब से ज्यादा नशा बॉनफिक्स में होती है, युवाओं में इसकी लत लग जायेगी तो इससे छुटकारा पाना काफी मुश्किल हो जायेगा.शहर में बढ़ी गांजे की बिक्रीशराब पर प्रतिबंध में बाद बाजार में गांजे की बिक्री में तेजी आ गयी है. प्रतिबंध लगने के एक सप्ताह बाद ही नशेड़ियों को इसके लत से छुटकारा पाना मुश्किल हो गया है. दिनभर की थकान को दूर करने के लिए लोग तरह तरह की वस्तुएं इस्तेमाल कर रहे है. सरकार द्वारा अंगरेजी व देसी शराब पर प्रतिबंध लगने के बाद नशे में चूर रहने वाले लोग विकल्प की तलाश कर चुके हैं. चोरी छिपे ही सही बाजार में गांजे की मांग बढ़ गयी है. नशा करने वाले लोग अब सुबह, दोपहर और शाम रुटीन बनाकर गांजे का चिलम फूंक रहे हैं. कचहरी रोड, भगत सिंह चौक, सदभावना चौक, स्टेशन परिसर सहित कई अन्य इलाके हैं जहां होटलों में बैठक गांजे का चिल्लम पर दम लगाते देखे जा सकते हैं. क्या कहते हैं अधिकारी शहर के युवा अब दूसरे तरह का नशीला पदार्थ इस्तेमाल करते हैं तो वह भी अपराध का मामला है. ऐसे स्थानों को चिह्नित कर नशा करनेवाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. विकास बर्मन, पुलिस अधीक्षक, नवादा

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