फंसे या फंसाये गये राजबल्लभ ?

Updated at : 23 Feb 2016 6:08 AM (IST)
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फंसे या फंसाये गये राजबल्लभ ?

नाबालिग के दुष्कर्म का मामला. चौक-चौराहों पर हो रही लोगों के बीच चर्चा नवादा (सदर) : नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित विधायक राजबल्लभ प्रसाद के बारे में चौक-चौराहों पर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. लोगों के बीच बहस छिड़ी है कि राजबल्लभ प्रसाद खुद फंसे हैं या […]

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नाबालिग के दुष्कर्म का मामला. चौक-चौराहों पर हो रही लोगों के बीच चर्चा
नवादा (सदर) : नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित विधायक राजबल्लभ प्रसाद के बारे में चौक-चौराहों पर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. लोगों के बीच बहस छिड़ी है कि राजबल्लभ प्रसाद खुद फंसे हैं या विरोधियों की साजिश के शिकार हुए हैं.
बाजार के चौक-चौराहों पर बस राजबल्लभ प्रसाद की ही चर्चा. कई लोग इस मुद्दे को बिजनेस से जोड़ कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश का परिणाम बताते हैं. वहीं, एक धरा खुद फंसने की बात कह रहा है.
इस मामले में नालंदा जिले के गिरीयक प्रखंड से जुड़े एक नेता का नाम धीरे-धीरे सामने आ रहा, जिसने हाल के कुछ माह से राजबल्लभ प्रसाद से अलग होकर अपना व्यवसाय शुरू किया था. राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि लड़की द्वारा बताये गये घटनास्थल गिरीयक में उसी नेता का नाम बार-बार सामने आ रहा है, जबकि कई जगहों पर यह भी चर्चा हो रही है कि पैसे के लेन-देन के कारण ही मामले का खुलासा हुआ है. कई लोग इस मामले में चुप्पी साधे रहना ही बेहतर समझते हैं.
राजबल्लभ प्रकरण में विरोधी नेताओं द्वारा इस तरह की घटना को अंजाम दिये जाने की बात कही गयी है. बाजार में यह भी चर्चा है कि स्कूली छात्राओं को मोह जाल में फंसा कर आरोपित सुलेखा कुमारी द्वारा कई राजनीतिक रसूखदारों के पास पहुंचाये जाने का काम किया जाता था. सुलेखा की गिरफ्तारी के बाद ही ऐसे रसूखदार नेताओं के नाम खुलने के आसार हैं. सुलेखा के मोबाइल में नवादा जिला ही नहीं, प्रदेश स्तरीय कई बड़े नेताओं के मोबाइल नंबर भी अंकित होने की बात कही जा रही है. लोगों का कहना है कि सुलेखा के मोबाइल के कॉल डिटेल्स पिछले एक साल के निकाले गये, तो वैसे कई नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं, जो हमेशा सुलेखा की सेवा का लाभ उठाते रहे हैं. बाजार में तरह-तरह की चर्चा के दौरान यह भी मामला सामने आ रहा है कि कहीं खुद की गरदन को फंसते देख राजनेताओं द्वारा सुलेखा को बीच रास्ते से ही न हटा दिया जाये.
राजबल्लभ प्रसाद के सर्मथकों का मानना है कि राजबल्लभ प्रसाद पर पिछले 10 वर्षों से विधायक नहीं रहने के दौरान भी इस तरह का आरोप नहीं लगा. अब विधायक बन कर सत्ता में पहुंचने के बाद कुछ विरोधी तत्वों द्वारा विधायक की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस द्वारा इस मामले में अब तक न तो सुलेखा से जुड़े परिजनों की गिरफ्तारी की गयी है, न ही आरोपित सुलेखा की. राजबल्लभ प्रसाद राजनीतिक, व्यावसायिक प्रतद्विंद्विता या साजिश के शिकार बने हैं, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो पायेगा.
अंतत: आना होगा कानून की शरण में ही : अपने हर हथकंडे अपना चुकने के बाद लोगों की जुबान पर यह वाक्य होता है- हमें कानून पर भरोसा है. जांच के बाद सब साफ हो जायेगा.
कानून इंसाफ दिलायेगा. ऐसा ही बयान राजद के जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार व राजबल्लभ प्रसाद के भाई विनोद यादव संयुक्त रूप से दे चुके हैं. पर, सवाल यह है कि आखिर कानून से आंख-मिचौनी क्यों की जा रही है? मामला जो भी हो, उन्हें कानून की शरण में आना ही चाहिए. अन्यथा आमजनों का भरोसा उठ जायेगा. अपराधबोध के नजरिये से खुद को बचाना होगा.
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