बंगाल चुनाव: हाईकोर्ट से तृणमूल को झटका,आला अधिकारियों को हटाने के खिलाफ याचिका खारिज

Updated at : 31 Mar 2026 12:06 PM (IST)
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बंगाल चुनाव: हाईकोर्ट से तृणमूल को झटका,आला अधिकारियों को हटाने के खिलाफ याचिका खारिज

कलकत्ता हाई कोर्ट

Bengal Election: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव और गृह सचिव सहित सरकारी अधिकारियों को हटाए जाने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी है. न्यायालय ने चुनाव आयोग के फैसले में कोई हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

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Bengal Election: कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर उस याचिका को खारित कर दिया है, जिसमें तृणमूल ने बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव सहित आला अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी. न्यायालय ने चुनाव आयोग के फैसले में कोई हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. साथ ही, उच्च न्यायालय ने बीडीओ और पुलिस स्टेशन के ओसी को हटाने की याचिका भी खारिज कर दी. मंगलवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की पीठ ने इन दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया.

आयोग के मकसद पर उठाये सवाल

राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद से ही आयोग ने एक के बाद एक नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं. इस संबंध में वकील अर्क कुमार नाग ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की. मामले की सुनवाई 23 मार्च को हुई. याचिकाकर्ता की ओर से वकील कल्याण बनर्जी ने पैरवी की. उन्होंने अधिकारियों को हटाने के पीछे आयोग के मकसद पर सवाल उठाए. साथ ही उन्होंने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया.

दूसरे राज्यों में भेजे गये अधिकारी

बंगाल में 15 मार्च को चुनाव की घोषणा हुई. उसी रात आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य के मुख्य सचिव पद से हटा दिया. साथ ही जगदीश प्रसाद मीना को भी गृह सचिव पद से हटा दिया गया. इस संबंध में कल्याण ने अदालत में कहा- अधिकारियों को रातोंरात हटा दिया गया. मुख्य सचिव को हटा दिया गया. उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी. उन्हें बस हटा दिया गया. पश्चिम बंगाल की सभी समस्याओं को मुख्य सचिव देख रहे थे. उन्हें हटा दिया गया. गृह सचिव चुनाव में शामिल नहीं हैं. उन्हें सिर्फ हटाया ही नहीं गया, बल्कि दूसरे राज्य भेज दिया गया.

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तबादलों की सूची लगातार हो रही लंबी

याचिकाकर्ता का कहना था कि मुख्य सचिव और गृह सचिव के बाद, तबादलों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है. एक के बाद एक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जा रहा है. कल्याण ने इन तबादलों के उद्देश्य पर सवाल उठाए. वादी ने अदालत में तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को शक्तियां प्राप्त हैं, लेकिन वे असीमित नहीं हैं. यह तर्क दिया गया कि आयोग अपनी मनमानी नहीं कर सकता. वादी ने यह भी कहा कि आयोग की कार्रवाइयां संघीय ढांचे (राज्य-केंद्र संतुलन) को नष्ट कर रही हैं.

निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उठाए गए कदम

आयोग ने यह कहकर जवाब दिया कि ये कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उठाए गए थे. पिछली सुनवाई में आयोग के वकील ने कहा-इन सभी फैसलों (अधिकारियों को हटाने) के पीछे कई कारण हैं. पांच राज्यों में मतदान हो रहा है, स्थिति हर जगह एक जैसी नहीं है. अधिकारियों के तबादले अन्य जगहों पर भी हुए हैं। स्थिति के अनुसार कदम उठाए जाते हैं. आयोग ने एक ही दिन में राज्य के बीडीओ और विभिन्न पुलिस थानों के ओसी समेत 267 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. मंगलवार को मामला दर्ज होने पर उच्च न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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