फाइलेरिया के रोकथाम के लिए चला अभियान

Updated at : 14 Dec 2015 7:13 PM (IST)
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फाइलेरिया के रोकथाम के लिए चला अभियान

फाइलेरिया के रोकथाम के लिए चला अभियान 14 से 16 तक मुफ्त बांटी जायेगी खुराकराष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस का हुआ उद्घाटनफोटो-6प्रतिनिधि, नवादा (नगर)राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस के अवसर पर मुफ्त दवा वितरण कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार को सदर अस्पताल परिसर में हुई. राष्ट्रीय बैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ जगदीश शर्मा ने […]

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फाइलेरिया के रोकथाम के लिए चला अभियान 14 से 16 तक मुफ्त बांटी जायेगी खुराकराष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस का हुआ उद्घाटनफोटो-6प्रतिनिधि, नवादा (नगर)राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस के अवसर पर मुफ्त दवा वितरण कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार को सदर अस्पताल परिसर में हुई. राष्ट्रीय बैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ जगदीश शर्मा ने किया. डाॅ शर्मा ने बताया कि फाइलेरिया परजीवी संक्रमित मच्छर काटने से हो सकता है. रोग का लक्षण आठ से 16 महीने या उससे अधिक समय के बाद दिखाई पड़ता है. संक्रमित व्यक्ति में मच्छर काटने के बाद न तो कोई लक्षण दिखता है और न ही खून में फाइलेरिया के परजीवी मिलते हैं. बाद के समय में इसकी पहचान तब होती है, जब मरीज को बार-बार जाड़ा या कंपकपी के साथ बुखार आता है. पसीना आना, सर दर्द, जोड़ों में दर्द, भूख में कमी, उल्टी आदि बार-बार होने से फाइलेरिया के लक्षण प्रतीत होते है. फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहते हैं. फाइलेरिया के बचाव का सबसे अच्छा उपाय फाइलेरिया रोधी डाइथाइल कार्वामाजीन (डीइसी) दवा का सेवन करना है. यह दवा खून में फाइलेरिया के परजीवी को मार देता है व इसके प्रसार को भी रोकता है. कार्यक्रम के दौरान डाॅ उमेश चंद्रा, डाॅ अशोक कुमार, राजीव कुमार आदि मौजूद थे. मुफ्त दवा का वितरण शुरूफाइलेरिया रोग से बचने के लिए मुफ्त दवा का वितरण शुरू किया गया है. डीइसी दवा दो वर्ष से ऊपर के लोगों को दिया जाता है. दो से पांच वर्ष आयु के बच्चों को सौ मिली ग्राम की एक गोली, छह से 14 वर्ष के किशोरों को दो सौ मिली ग्राम की गोली व 15 वर्ष से ऊपर के लोगों को तीन सौ एमजी की दवा खिलाया जाना है. इस दवा को साल में एक बार जरूर लेना चाहिए. फाइलेरिया से बचाव जरूरीफाइलेरिया रोग मच्छर के काटने से होता है. मच्छरों के लारवा को पनपने नहीं देना चाहिए. घरों में मच्छरदानी का उपयोग, खिड़कियों में जाली लगवाने आदि की व्यवस्था कर मच्छर काटने से बचा जा सकता है. दवा की खुराक खिलाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को जिम्मा दिया गया है, जो घर-घर जाकर दवा खिलायेंगी.

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