खाली हाथ नहीं लौटते याचक

Published at :15 Oct 2015 6:58 PM (IST)
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खाली हाथ नहीं लौटते याचक

खाली हाथ नहीं लौटते याचक नारदीगंज स्थित काली मंदिर का इतिहास काफी पुरानाफोटो-1,2प्रतिनिधि, नारदीगंज आश्विन माह के शुक्लपक्ष में नवरात्र शुरू होते ही प्रखंड के विभिन्न गांवों में मां दुर्गा व माता काली की आराधना शुरू हो गयी हैं. इस अवसर पर नारदीगंज बाजार में मां काली व माता दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण कई […]

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खाली हाथ नहीं लौटते याचक नारदीगंज स्थित काली मंदिर का इतिहास काफी पुरानाफोटो-1,2प्रतिनिधि, नारदीगंज आश्विन माह के शुक्लपक्ष में नवरात्र शुरू होते ही प्रखंड के विभिन्न गांवों में मां दुर्गा व माता काली की आराधना शुरू हो गयी हैं. इस अवसर पर नारदीगंज बाजार में मां काली व माता दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण कई दशकों से बाजारवासियों के द्वारा श्रद्धा व उत्साह से किया जा रहा है. इसके अलावा बस्ती बिगहा बाजार, परमा, बनगंगा, मसोढा, हंडिया आदि गांवों में भी मंदिरों व पूजा पंडालों में पूजा-अर्चना की जाती है. इस अवसर पर पूजा पंडालों व मंदिरों को आकर्षक बनाने में लोग लगे हुए हैं. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हो रहा है. श्रद्धालुओं द्वारा पूजा की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है़काली मंदिर का इतिहास इस मंदिर का इतिहास का काफी पुराना हैं. सैकड़ों वर्षों से नारदीगंज बाजारवासी मंदिर में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना करते आ रहे हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा अर्चना करनेवाले याचक कभी भी खाली हाथ नहीं लौटते हैं. भक्तों के मनोवांछित मनोकामनाएं माता पूरा करती हैं. सप्तमी को पट खुलते ही नारदीगंज बाजार के अलावा दूर-दराज के लोग खोइचा भरने के लिए आते है. लोग श्रद्धा से अपनी पारी का इंतजार करते हैं. इस अवसर पर श्री श्री महाकाली पूजा समिति द्वारा तीन दिवसीय जागरण कार्यक्रम किया जाता है. मंदिर के पुजारी 75 वर्षीय बाबू लाल पांडेय ने बताया कि इस मंदिर में सैकड़ों वर्षों से भक्तजन पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. आयोजक मंडल के शिवशंकर कुमार गुप्ता, राकेश कुमार, आनंद कुमार, विनोद राम, राजू कुमार, रंजीत कुमार, गौतम कुमार, किशोरी राम आदि ग्रामीणों द्वारा पूजा-पंडालों की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है़दुर्गा मंदिर का इतिहास इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1967 में हुई. स्थानीय बाजारवासियों के माध्यम से पूजा अर्चना की व्यवस्था की जाती है. मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा अर्चना करनेवाले भक्तों की मन्नते पूूरी होती है. श्री श्री दुर्गा पूजा नाट्य कला परिषद के माध्यम से पूजा व सांस्कृतिक कार्यक्रम किया जाता है. पुजारी संतोष पांडेय ने बताया कि मां का पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती हैं. आसपास के अलावा दूर-दराज के लोग अपनी मन्नते मांगने इस दरबार में आते हैं. आयोजक मंडल के सदस्य रामशरण पांडेय, सुजीत कुमार, मुन्ना कुमार, संजय साव, संदीप कुमार आदि कार्यकर्ताओं के माध्यम से पूजा व सांस्कृतिक कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में लगे हुए है.बस्ती बिगहा मंदिर का इतिहासयह मंदिर काफी ऐतिहासिक है. माता दुर्गा की की प्रतिमा की स्थापना वर्ष 1954 से की जा रही है़ आसपास के लोगों में धारणा है कि मां की महिमा अगम अपार है. इस अवसर का इंतजार श्रद्धालुओं को साल भर से रहता है़ सप्तमी के दिन से याचक पूजा अर्चना करने व मां का खोइचा भरने के लिए उमड़ने लगते हैं. यह दौर दशमी तक रहता है. ग्रामीणों के अलावा दूर-दराज के लोग मां की चौखट पर अपना माथा टेकना नहीं भुलते हैं. पुजारी विनय पांडेय ने बताया कि माता के यश का गुणगान कई शहर व गांव में फैला है. हजारों भक्त दुर्गा पूजा पर इकट्ठे होते हैं. श्री दुर्गा नाट्य कला परिषद बस्ती बिगहा के माध्यम से पूजा व नाट्य मंचन का आयोजन होता है़ पूजा प्रबंधक कार्तिक गुप्ता, अवध साव सहित अन्य ने बताया मां की पूजा अर्चना व सांस्कृतिक कार्यक्रम नाट्य मंचन की तैयारी की जा रही है.

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