मुसलिम बहनें बना रहीं रंग-बिरंगी राखियां

Published at :31 Jul 2013 4:08 AM (IST)
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मुसलिम बहनें बना रहीं रंग-बिरंगी राखियां

महिलाओं व बच्चियों के निर्मित राखियों की बिहार–झारखंड में खूब डिमांड नवादा : एक तरफ पवित्र रमजान का महीना और दूसरी तरफ सावन का महीना. दोनों हिंदू–मुसलिम समुदाय के लिए महत्वपूर्ण महीना माना जाता है. ऐसे में रोजा रखने वाली महिलाएं व छोटी–छोटी बच्चियों द्वारा राखी निर्माण का कार्य किया जाना आपसी सौहार्द का प्रतीक […]

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महिलाओं बच्चियों के निर्मित राखियों की बिहारझारखंड में खूब डिमांड

नवादा : एक तरफ पवित्र रमजान का महीना और दूसरी तरफ सावन का महीना. दोनों हिंदूमुसलिम समुदाय के लिए महत्वपूर्ण महीना माना जाता है.

ऐसे में रोजा रखने वाली महिलाएं छोटीछोटी बच्चियों द्वारा राखी निर्माण का कार्य किया जाना आपसी सौहार्द का प्रतीक बन गया है. रोजा रखने के कारण मुसलिम समाज की महिलाओं छोटीछोटी बच्चियां राखी निर्माण करने में जुटी है.

नगर के मिर्जापुर हाट मुहल्ले में राखी निर्माण करने में जुटी रूखसाना परवीन, साहनी परवीन, अफसाना परवीन तथा मुस्कान बताती हैं कि राखी बनाने में जो सुकून मिलता है वह दूसरे कामों में नहीं मिलता. यह बात कोई बड़े बुजुर्ग नहीं बल्कि उक्त सभी छोटीछोटी बच्चियों ने बतायी. वह बताती है कि हमारे हाथों निर्मित राखी में आपसी भाईचारा और सौहार्द होता है.

राखी निर्माता हमें मेटेरियल देते हैं और बनाने के बदले कारीगरी दिया जाता है. निर्माता कृष्णा प्रसाद भोजपुरी बताते हैं कि हिंदू महिला कारीगर द्वारा राखी निर्माण इसलिए नहीं कराते हैं कि मुसलिम महिलाओं का बनी राखी आकर्षण अधिक होती है. उन्होंने बताया कि नगर के भदौनी और अंसार नगर में भी मुसलिम महिलाएं राखी निर्माण बड़े दिलचस्पी के साथ किया करते हैं.

शहर भर में 30 से 40 मुसलिम घर हैं जहां राखी रंगबिरंगे राखी निर्माण का काम किया जाता है. हालांकि इनको अब तक हुनर के प्रति सरकारी सहायता स्वरोजगार के लिए नहीं मिला है. राखी बनाने वाली मुसलिम महिलाओं को एकदिन में दो से ढ़ाई सौ तक आमदनी हो जाती है.

प्रतिदिन एक हजार राखी एक परिवार बनाते हैं. राखी निर्माण का कार्य छह माह पहले ही शुरू किया जाता है. गणोश नाम से बनाया जा रहा राखी को बाजार में लोग अधिक पसंद करते हैं. मुसलिम महिलाओं के हाथों से बनी राखी बिहार, झारखंड में खूब मांग होती है.

झारखंड के रांची, धनबाद, तिलैया, कोडरमा, बरही तथा बिहार के गया, बिहारशरीफ, शेखपुरा, लक्खीसराय तथा जमुई में भी खूब मांग है. थोक बाजार में एक रुपये से 20 रुपये तक बेचा जा रहा है. एक सीजन में दो से ढ़ाई लाख रुपयों का कारोबार होता है. राखी निर्माण के लिए मेटेरियल मुंबई सूरत से मंगाया जाता है.

मुसलिम महिलाओं द्वारा चंदन राखी, मोती, रेशम तथा स्टोम राखी बनायी जाती है. स्टोन को ब्रासलेट नुमा बनाया जाता है. जिसका काफी डिमांड है. इसके अलावा बच्चों के लिए टेडीवियर मॉडल राखी बनायी जा रही है.

इसमें वेनटेन, छोटा भीम, डोरेमॉन तथा मिकी माउस लगाया जा रहा है. लेडीज राखी का निर्माण अभी यहां भी किया जाता है परंतु उसकी तैयारी की जा रही है. निर्माता कृष्णा प्रसाद भोजपुरी बताते हैं कि राखी का नाम गणोश राखी इसलिए रखा गया है, क्योंकि दो समुदाय में सौहार्द का एक नया रिश्ता का श्री गणोश हो सके.

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