अस्पताल का बिल बना देगा कंगाल! ऐसे चुनें सही हेल्थ इंश्योरेंस

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Health Insurance

सांकेतिक तस्वीर (फोटो: Canva)

Health Insurance : क्या आपका हेल्थ इंश्योरेंस अस्पताल के भारी-भरकम बिल को चुकाने के लिए काफी है? जानिए वैभव पांडेय की एक गलती ने उन्हें कर्जदार कैसे बना दिया और क्यों ‘कस्टमाइज्ड हेल्थ प्लान’ आज की सबसे बड़ी जरूरत है.

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Health Insurance: नोएडा के 36 साल के वैभव पांडेय ने सोचा था कि 5 लाख का हेल्थ कवर लेकर उन्होंने जंग जीत ली है. लेकिन जब पत्नी की हार्ट सर्जरी हुई और बिल 11 लाख आया, तो बीमा कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए. वैभव को अपनी मेहनत की कमाई खर्च करनी पड़ी और ऊपर से कर्ज भी लेना पड़ा.

आज के दौर में इलाज इतना महंगा हो गया है कि पुरानी घिसी-पिटी पॉलिसियां अब काम नहीं आतीं. अब जमाना है ‘कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस’ का. आइए जानते हैं कि यह क्या है और आपको इसे क्यों चुनना चाहिए.

क्या है कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस ?

यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी पसंद की ‘थाली’ खुद सजाते हैं. इसमें बीमा कंपनी आपको यह मजबूर नहीं करती कि आप वो चीजें लें जिनकी आपको जरूरत नहीं है. इसके बजाय, आप अपनी उम्र, बीमारी के इतिहास और परिवार की जरूरत के हिसाब से अपना प्लान खुद डिजाइन करते हैं.

एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं इसे चुनने की सलाह?

बीमा एक्सपर्ट अमित भंडारी के मुताबिक, हर इंसान की लाइफस्टाइल अलग है, तो उसका बीमा एक जैसा क्यों हो?

  • अगर आप युवा हैं, तो आप जिम इंजरी या एक्सीडेंट कवर पर ध्यान दे सकते हैं.
  • आप सिर्फ उन्हीं फीचर्स के पैसे देते हैं जो आप चुनते हैं, जिससे फालतू का प्रीमियम बचता है.
  • कस्टमाइज्ड प्लान होने से अस्पताल में ‘आउट ऑफ पॉकेट’ यानी अपनी जेब से पैसा देने की नौबत कम आती है.

आज के दौर में कितना कवर है जरूरी?

अगर आप किसी बड़े शहर में रहते हैं, तो 15 से 20 लाख रुपये का कवर अब न्यूनतम जरूरत बन गया है. इसके पीछे दो बड़े कारण हैं:

  • भारत में इलाज का खर्च हर साल 12-14% की रफ्तार से बढ़ रहा है.
  • हार्ट, किडनी या कैंसर जैसी बीमारियों का खर्च आसानी से 10 लाख के पार निकल जाता है.

पॉलिसी में क्या-क्या एक्स्ट्रा जोड़ सकते हैं ?

कस्टमाइज्ड प्लान में आपको 15-20 तरह के विकल्प मिलते हैं, जैसे:

  • मैटरनिटी कवर: अगर आप परिवार बढ़ाने की सोच रहे हैं.
  • रिस्टोरेशन बेनिफिट: अगर एक बार पूरा पैसा खत्म हो जाए, तो कंपनी दोबारा उतना ही पैसा भर देती है.
  • ओपीडी खर्च: डॉक्टर की फीस और दवाइयों का खर्च.
  • वेटिंग पीरियड कम करना: पुरानी बीमारियों (जैसे BP, शुगर) का कवर जल्दी शुरू करवाना.

बीमा लेने से पहले ये जरूर पूछें

  • क्या मेरी पॉलिसी में ‘रूम रेंट’ (कमरे के किराए) की कोई सीमा है?
  • क्या इसमें ‘रिस्टोरेशन’ का विकल्प है?
  • क्या अस्पताल के बिल में मुझे अपनी तरफ से कुछ प्रतिशत पैसा देना होगा (Co-payment)?

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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