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बाबाधाम जाने के लिए ट्रेन की सीधी सुविधा नहीं, स्पेशल ट्रेन देने की मांग

Updated at : 05 Jul 2019 7:28 AM (IST)
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बाबाधाम जाने के लिए ट्रेन की सीधी सुविधा नहीं, स्पेशल ट्रेन देने की मांग

नवादा नगर : बाबा नगरी बैद्यनाथ धाम जाने के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा दिलाने की मांग स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही है. गया-किऊल रेलखंड के विद्युतीकरण होने से रूट में यातायात की सुविधा आसान हुई है. इस कारण रेल मार्ग से सावन महीने में बाबा की नगरी जाने वाले यात्रियों की अपेक्षाएं भी […]

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नवादा नगर : बाबा नगरी बैद्यनाथ धाम जाने के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा दिलाने की मांग स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही है. गया-किऊल रेलखंड के विद्युतीकरण होने से रूट में यातायात की सुविधा आसान हुई है. इस कारण रेल मार्ग से सावन महीने में बाबा की नगरी जाने वाले यात्रियों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं.

गया-किऊल रूट पर वर्तमान समय में सात जोड़ी इएमयू ट्रेनें चल रही हैं. इसके साथ गया-हावड़ा एक्सप्रेस प्रतिदिन कोलकाता तक जाने के लिए व नयी दिल्ली व कामाख्या तक जाने के लिए सप्ताह में एक दिन ट्रेन मिल रही है. सावन महीने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग करते हुए लोगों ने सांसद व अन्य जनप्रतिनिधियों से इसके लिए पहल करने की बात कही है.
स्पेशल ट्रेन देने की मांग
सावन महीने में स्पेशल ट्रेन की सुविधा देने की मांग समाज के कई वर्गों द्वारा उठायी गयी है. वरीय नागरिक संघ के डॉ श्रीनंदन शर्मा, विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक विकास कुमार आदि ने कहा कि हमारे संस्थान की ओर से देवघर व सुल्तानगंज तक जाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की गयी है. फिलहाल गया-जमालपुर पैसेंजर 53616 को जमालपुर तक ले जाया जाता है. पिछले पांच साल पहले रेलवे द्वारा इसी ट्रेन को सुल्तानगंज तक चलाया गया था. इसी प्रकार गया-झाझा पैसेंजर को देवघर तक के लिए बढ़ाया जा सकता है.
परिषद के छात्र नेताओं ने कहा कि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए गाड़ी को विस्तार रूप देने की जरूरत है.गया-हावड़ा एक्सप्रेस से सुल्तानगंज तक सीधे जाना आसान है. लेकिन, एक्सप्रेस ट्रेन होने के कारण इसमें भीड़ सबसे अधिक होती है. बाबाधाम तक पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यही ट्रेन एक मात्र सहारा है.
रूट का हो रहा विकास
रेलवे के विद्युतीकरण से यात्रियों को लाभ मिल रहा है. समय की बचत के अलावा ट्रेनों की आवाजाही सुधरी है. दोहरीकरण के काम में तेजी है. गया-किऊल रेलखंड में 336 छोटे-बड़े रेलवे पुल बनने हैं. समाज में विकास की नयी राह यातायात के साधन बढ़ने से खुले हैं.
वर्षों से उपेक्षित किऊल-गया रेलखंड में पिछले साल विद्युतीकरण व वर्ष 2020 तक दोहरीकरण का काम पूरा होना है. गया-किऊल रेलखंड के विद्युतीकरण के बाद लोगों को सुलभ व कम समय में दूरी तय करने का लाभ मिलने लगा है. देवघर जैसे धार्मिक व पर्यटक स्थल का सावन में खास महत्व को देखते हुए स्थानीय लोगों द्वारा इसकी मांग उठायी जा रही है.
दोहरीकरण के काम को समय से पूरा करने पर जोर
रेलखंड पर पुल-पुलियों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ काम को पूरा करने में देरी हो रही है. गया से आगे तथा किऊल से शेखुपरा तक तेजी के साथ दोहरीकरण के लिए काम को पूरा किया जा रहा है. जगह-जगह जरूरत के अनुसार पुल व पुलिया का निर्माण हो रहा है. कुल 31 छोटे-बड़े स्टेशनों को जोड़ने वाले गया-किऊल रेलखंड में दोहरीकरण के लिए 336 छोटे-बड़े पुल व पुलिया का निर्माण हो रहा है. अधिकतर स्थानों पर काम शुरू हो गया है या काम शुरू करने के लिए तैयारी हो रही है.
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