दुकानें बंद होते ही अंधेरे में डूब जाता है शहरी इलाका

Updated at : 02 Sep 2017 12:45 PM (IST)
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दुकानें बंद होते ही अंधेरे में डूब जाता है शहरी इलाका

2007 से खराब पड़ी हैं हाइमास्ट लाइटें दुरुस्त कराने पर ध्यान नहीं दे रहे जनप्रतिनिधि व अिधकारी त्योहारों में खलेगी रोशनी की कमी नवादा नगर : शहरी के लोगों को रोशनी देने के लिए नगर पर्षद की ओर से लगायी गयीं हाइमास्ट लाइटें साल 2007 से खराब पड़ी हैं. तमाम चौक-चौराहों पर बिजली के खंभों […]

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2007 से खराब पड़ी हैं हाइमास्ट लाइटें
दुरुस्त कराने पर ध्यान नहीं दे रहे जनप्रतिनिधि व अिधकारी
त्योहारों में खलेगी रोशनी की कमी
नवादा नगर : शहरी के लोगों को रोशनी देने के लिए नगर पर्षद की ओर से लगायी गयीं हाइमास्ट लाइटें साल 2007 से खराब पड़ी हैं. तमाम चौक-चौराहों पर बिजली के खंभों में लगी लाइटें बंद पड़ी हैं. शहरी क्षेत्र के प्रमुख चौक प्रजातंत्र चौक, लाल चौक, रजौली बस स्टैंड, इंदिरा गांधी चौक, भगत सिंह चौक, सदभावना चौक, पंपुकल चौक आदि के पास हाइमास्ट लाइटें लगायी गयी थीं. कुछ दिन पहले दिन इसकी रोशन से सारा एरिया चकाचक था.
अब कुछ तकनीकी खराबी के कारण ये सभी लाइटों ने आंखें मूंद ली है. नगर पर्षद क्षेत्र में लाखों की लागत से लाइटें, तो लगायी गयीं, लेकिन इसके रखरखाव नहीं होने के कारण ये सभी बेकार हो गयीं हैं.
अधिकारियों की उदासीनता के कारण चौक-चौराहों पर शाम होते ही अंधेरा फैल जाता है. इन क्षेत्रों की दुकानें बंद होने जाने के कारण यहां से गुजरने में भी लाेगों को डर लगता है. बरसात के दिनों में सड़क पर रोशनी नहीं होने के और भी अधिक खतरा है. कई स्थानों पर नालियों के ढक्कन टूटे हुए हैं. इसके चलते रात में दुर्घटना का डर लगा रहता है.
आनेवाले दिनों में दशहरा, बकरीद, दीपावाली आदि जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आनेवाले हैं. पर्व त्योहारों को देखते हुए नये स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करने के साथ ही लगायी गयी हाइमास्ट लाइटों को ठीक कराने की जरूरत है. अंधेरे में लोग अक्सर हादसे का शिकार होते हैं. नप के द्वारा नयी लाइट लगाने के लिए सशक्त समिति की बैठक में निर्णय किया गया है. नयी लाइटों के साथ ही पुरानी हाइमास्ट लाइटों को भी ठीक कराने की जरूरत है.
चार-चार लाख रुपये की थी एक-एक लाइट
शहरी क्षेत्र के आठ स्थानों पर लाइटें लगायी गयी थीं. प्रत्येक लाइट को लगाने में उस समय लगभग चार लाख रुपये की लागत आयी थी. हाइमास्ट लाइट जमीन से लगभग 25 फुट की ऊंचाई पर लगायी गयी, है जो क्षेत्र के चारों ओर रोशनी देती है. तत्कालीन विधायक पूर्णिमा यादव की अनुशंसा पर सभी स्थानों पर लाइटें लगायी गयी थीं.
शहर में खराब हानेवाली लाइटें कई दिनों से खराब पड़ी हुईं हैं. प्रजातंत्र चौक पर हाइमास्ट लाइट का बल्ब ही खराब हो गया है. भगत सिंह चौकवाली लाइट में तार टूटा हुआ है, पंपूकल चौक पर मशीन की खराबी के कारण लाइट बंद है. हाइमास्ट लाइट को ठीक करने के लिए भी दो से तीन बार प्रयास किया गया है, लेकिन इसके सार्थक परिणाम अब तक नहीं दिख रहे हैं. लगायी गयी मशीनों के रख-रखाव की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत है.
रात में पुलिस को भी होती है दिक्कत
चौक-चौराहों पर रात के समय ड्यूटी करनेवाले गश्ती दल व ट्रैफिक पुलिस भी अंधेरे के कारण जैसे-तैसे अपनी ड्यूटी निभाते हैं. प्रशासनिक अधिकारी विधि-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सीसीटीवी कैमरे और अन्य उपाय करने की बात कहता है, लेकिन यदि सड़कों पर रोशनी ही नहीं रहेगी, तो अंधेरे का लाभ उठाकर कुछ भी घटना किया जा सकता है. छिनतई या अन्य अापराधिक घटनाओं को देखते हुए भी रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था करने की जरूरत है.
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