पति को सकुशल ला दीजिए हुजूर !
Updated at : 25 Aug 2017 4:49 AM (IST)
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पीड़ा. सऊदी गया युवक का सुराग नहीं, एसपी से पत्नी ने लगायी गुहार 27 मार्च को पहुंचने की सूचना दी, उसके बाद से नहीं हुई बात दुबई भेजनेवाला एजेंट भी काट रहा कन्नी नवादा : पत्नी व बच्चों के पेट पालने के लिए नवादा का एक युवक पांच माह पूर्व सऊदी अरब गया था. उसका […]
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पीड़ा. सऊदी गया युवक का सुराग नहीं, एसपी से पत्नी ने लगायी गुहार
27 मार्च को पहुंचने की सूचना दी, उसके बाद से नहीं हुई बात
दुबई भेजनेवाला एजेंट भी काट रहा कन्नी
नवादा : पत्नी व बच्चों के पेट पालने के लिए नवादा का एक युवक पांच माह पूर्व सऊदी अरब गया था. उसका आज तक कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है. पति को सही सलामत वापस लाने के लिए अंततः पत्नी एसपी से गुहार लगाने उनके चैंबर में पहुंची. नगर के पार नवादा वार्ड संख्या 26 स्थित बड़ी दरगाह मुहल्ला निवासी स्व मोख्तार खान के 37 वर्षी पुत्र मो मुजफ्फर खान पांच माह पूर्व सउदी अरब कमाने गया था.
पत्नी अनवरी खातून और 10 वर्षीय बेटा जफरान व छह वर्षीय बेटी जोया फिरदौस इस उम्मीद में दर-दर भटक रही है कि कोई तो होगा, जो उसके पति व बच्चों के पिता को ढूंढ़ कर ला देगा.
यहां तक कि युवक को मुंबई से दुबई भेजने वाला एजेंट भी फोन करने पर बात नहीं कर रहा है. पति के वियोग में स्थिति यह हो गयी है कि पत्नी व बच्चे खाने को तरस रहे हैं. बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर का किराया तक जुटाना मुश्किल हो गया है. पति की तलाश में समाज के लोगों ने मुंबई जाने की सलाह, तो दी, पर दो बच्चों के साथ इतनी बड़ी महानगरी में आर्थिक तंगी के साथ जाने का हिम्मत नहीं जुटा पा रही है. वैसे बच्चों की परवरिश अनवरी के चाचा मो गुलाम कर रहे हैं. दो दिनों पूर्व नवादा एसपी से पति को तलाश कर उसे सही सलामत वापस लाने की गुहार उसने लगायी है.
मासूम कर रहे पिता का इंतजार
प्रभात खबर की टीम इस मामले को लेकर मुजफ्फर के घर उसकी पत्नी और बच्चों से मिलने पहुंची, तो वहां का माहौल गमगीन था. जैसे ही पति के बारे में पूछा गया, तो पत्नी अनवरी फफक पड़ी. आंखों से आंसू को रोकते हुए उन्होंने बताया कि कोई मदद करनेवाला नहीं मिल रहा है. इसी दौरान मुजफ्फर की दोनों संतान स्कूल से लौट कर घर पहुंचे और उत्सुकतावश पूछने लगे. 10 वर्ष का बड़ा बेटा मो जफरान और छह वर्ष की बेटी जोया फिरदौस मां से पिता का जिक्र करते हुए कहां हैं पापा… वहीं बेटी के मुंह से निकला अंकल कोई मेरे पापा को नहीं ला देता है. मेरे पापा न बात कर रहे हैं और न ही लौट कर घर आ रहे…
उस छोटी सी बच्ची की व्यथा ने माहौल को भावुक कर दिया. मुजफ्फर की पत्नी को प्रभात खबर की टीम को देखकर एक उम्मीद जगी है. वह बार- बार पूछती की पति लौट आयेगा न. विदेश मंत्री को पत्र भेजने पर पता नहीं हमारा काम होगा या नहीं वह बार-बार कह रही थी. तीनों मां व बच्चे पति के साथ का फैमिली फोटो दिखा कर सीने से लगा रहे थे. उनके अंदर की भावना को शायद कोई समझ पाता. अनवरी के चाचा मो गुलाम ने बताया कि अब इन बच्चों की पढ़ाई कराना मुश्किल होने लगा है. स्कूल को अर्जी देकर उसके फीस माफ कराने का आग्रह करना होगा.
एक व्यक्ति के सउदी अरब में लापता होने के संबंध में आवेदन दिया गया है. इसमें पटना पासपोर्ट आॅफिस से डिटेल मांगा गया है. पासपोर्ट आफिस की विदेश शाखा से यह पता लगाया जा रहा है कि वह व्यक्ति सही में सउदी अरब गया है कि नहीं. यदि गया है, तो वह कहां गया. इसके बाद एजेंट व कंपनी से बात की जायेगी. इस मामले में पुलिस विभाग सूचना इकट्ठा कर रहा है. जल्द ही इसका पता लगा लिया जायेगा.
विकास बर्मन, एसपी
महारा कंपनी में काम करने गया है मुजफ्फर
मो मुजफ्फर खान दूसरी बार सउदी अरब गया है. वह पेशे से चालक है, जो कोलकाता में छोटे ट्रकों को चलाता था. पहली बार 2014 में वह सउदी अरब गया था. वहां एक कंपनी में चालक की नौकरी की थी. जनवरी 2017 में वह अपने घर नवादा आया था. इसके बाद वह 27 मार्च 2017 को मुंबई से ओमान एयर से सउदी गया. जिस दिन वह सउदी गया उस दिन वहां पहुंच कर सही सलामत आने की सूचना अपनी पत्नी को दी. उसके बाद से पति से संपर्क नहीं हो सका है.
जब समय और दिन बितने लगे तब उसकी पत्नी अनवरी खातून पति की खोज में जुट गयी. इस दौरान उसने मुंबई के एजेंट से संपर्क करने की कोशिश की, पर वहां का एजेंट कोई भी नोटिस लेने को तैयार नहीं है. पत्नी बताती है कि इस बार दूसरी कंपनी में काम करने गये थे. उसने बताया कि इस बार महारा कंपनी में चालक की नौकरी करने गये थे.
90 दिनों का था वीजा, बीत गये 150 दिन
अनवरी खातून ने बताया कि उसका पति 90 दिनों के बीजा पर सउदी अरब नौकरी करने गये थे. लेकिन, 150 दिन बीत गये, बावजूद उसका कोई अता-पता नहीं चल रहा है. अब कई तरह की आशंका होने लगी है. पत्नी व बच्चे अनहोनी की डर से आज भी सहमे हुए हैं. आंखों में पति के लौटने की उम्मीद की किरण और दिमाग में अनहोनी की चिंता से पूरा परिवार व्याकुल है.हाल यह है कि परिवार के सभी लोगों की सुबह रोते-रोते होती है़. खाना-पीना दुश्वार है. बच्चों की आंखें पिता का इंतजार कर रही हैं.
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