महिला ने एक साथ तीन बच्चों को दिया जन्म, एक की मौत

Updated at : 31 Jul 2017 11:07 AM (IST)
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महिला ने एक साथ तीन बच्चों को दिया जन्म, एक की मौत

दोनों बेटियां न्यू बोर्न केयर यूनिट में सुरक्षित सुरेश मांझी की पत्नी 29 जुलाई से थी भरती नवादा. एक महादलित महिला ने एक साथ दो बेटियों व एक बेटे का जन्म दिया, तो चर्चा का विषय बना गया़ परंतु, दुर्भाग्य ऐसा रहा कि जन्म के बाद ही बेटे की मौत हो गयी. जबकि दो बच्चियों […]

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दोनों बेटियां न्यू बोर्न केयर यूनिट में सुरक्षित
सुरेश मांझी की पत्नी 29 जुलाई से थी भरती
नवादा. एक महादलित महिला ने एक साथ दो बेटियों व एक बेटे का जन्म दिया, तो चर्चा का विषय बना गया़ परंतु, दुर्भाग्य ऐसा रहा कि जन्म के बाद ही बेटे की मौत हो गयी.
जबकि दो बच्चियों की जान स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट की वजह से बचा लिया गया है. सदर अस्पताल में एक माह पूर्व शुरू हुआ स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट सरकारी अस्पतालों में जन्म लेनेवाले बच्चों के लिये जीवनदायिनी साबित हो रही है़ सदर प्रखंड के हरला गांव निवासी सुरेश मांझी की पत्नी काजल देवी ने दो बेटियों व एक बेटे को एक साथ जन्म दिया था. इसमें जन्म के बाद ही नवजात बेटे की मौत हो गयी. बताया जाता है कि 29 जुलाई को उसे प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया गया था.
न्यू बोर्न केयर यूनिट के लिए सदर अस्पताल के स्पेशलिस्ट तीन चिकित्सकों की टीम में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अखिलेश कुमार मोहन, डॉ सुनील कुमार तथा डॉ परशुराम भारती हैं. गरीब परिवार का सुरेश मांझी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है़ उसने बताया कि जो स्थिति थी, उसमें बच्चों को बचाना मुश्किल था़ उसने बताया कि यह पहला प्रसव है. भगवान ने उसे एक साथ वरदान के रूप में तीन बच्चे दिये, लेकिन जन्म लेते ही एक बच्चे को भगवान ने छीन लिया़ आगे के लिये अब बच्चों के बारे में नहीं सोचेंगें. इन दो बेटियों से ही संतुष्टि कर इसको बेटे और बेटी दोनों का प्यार देंगे़ सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद ने बताया कि एक माह पूर्व स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट का उद्घाटन 25 जून को हुआ था़
इस यूनिट के निर्माण में कुल लागत 60 लाख रुपये लगे है़ं एक माह में लगभग 60 नवजातों का इलाज कर उन्हें स्वस्थ कर घर भेजा गया़ यहां एक साथ 12 नवजातों को एडमिट करने की सुविधा है़ यहां वैसे नवजातों को एडमिट किया जाता है, जिसका जन्म के बाद वजन कम हो, सांस लेने में दिक्कत हो, मां का दूध पीने में खतरा हो तथा संक्रमण से ग्रसित हो. वैसे नवजातों को एडमिट किया जाता है, जिसका उम्र जन्म से लेकर 28 दिनों तक का हो़
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