बिहार का वो ऐतिहासिक कॉलेज, जहां बनती थी अंग्रेजों के खिलाफ रणनीतियां, आजादी की दौड़ में महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
Published by : Preeti Dayal Updated At : 08 Aug 2025 2:02 PM
राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय
Bihar Historical College: नालंदा के हरनौत प्रखंड के सेबदह गांव में स्थित राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय जो आज भले ही साधारण नजर आए, लेकिन इसका अतीत बेहद गौरवशाली है. यह वही जगह है, जहां कभी अंग्रेजों से आजादी के लिए रणनीतियां बनायी जाती थी. साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी.
Bihar Historical College: राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय, यह वही जगह है, जहां कभी आजादी की लड़ाई लड़ने वाले वीर सेनानियों की बैठकों से गांव की गलियां गूंजा करती थीं. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ योजनाएं यहीं बनती थीं. 1936 में जब भारत अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्रता सेनानियों के आग्रह पर सेबदह गांव पहुंचे. वहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया. उस ऐतिहासिक सभा में कई बड़े नेता और स्वतंत्रता सेनानी भी मौजूद थे, जिनमें प्रमुख थे – राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन.
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने की थी कॉलेज की स्थापना….
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 1937 में इसी गांव में एक शैक्षणिक संस्था की नींव रखी थी. एक ऐसा संस्थान जो शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखता था, बल्कि आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक भी बन गया था.
महिलाओं को मिलती थी व्यावहारिक शिक्षा भी….
राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय उस समय एक अलग सोच के साथ काम करता था. यहां महिलाओं को वैद्य, शिक्षक और कलाकार बनने की पढ़ाई करवाई जाती थी. किताबों के साथ-साथ उन्हें असल जिंदगी से जुड़ी चीजें भी सिखाई जाती थीं. जैसे – सिलाई, कढ़ाई, मधुमक्खी पालन, खेती और हाथ से चीजें बनाना. खासकर महिलाओं को अलग से ट्रेनिंग दी जाती थी.
जरूरतमंद बच्चों के लिए होती थी खेती…
हित कुमार जी ने इस कॉलेज के लिए 7-8 बीघा ज़मीन दान में दी थी, जहां खेती होती थी.उससे मिलने वाला अनाज जरूरतमंद छात्राओं के काम आता था. यह कॉलेज गांधीजी के सिद्धांतों पर चल रहा था, जो लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहता था. यह सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि गांवों के लिए एक अच्छा विकास मॉडल भी था.
दूर-दूर से छात्र आते थे पढ़ने….
बिहार के इस कॉलेज की पढ़ाई इतनी अच्छी थी कि बंगाल, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी छात्र यहां पढ़ने आते थे. इसकी पहचान केवल पढ़ाई की वजह से नहीं थी, बल्कि उन लोगों की वजह से भी थी, जिन्होंने इसे एक जिवंत संस्था बनाया.
यहां से निकले जाने-माने चेहरे
इस कॉलेज ने कई नामी लोगों को आकर्षित किया. आजादी के बाद कैबिनेट मंत्री रहे लाल सिंह त्यागी ने भी यहां पढ़ाई की और सेवा दी. इसके अलावा, भोला सिंह, इंदर सिंह नामधारी और स्व. राजो सिंह जैसे प्रतिष्ठित लोगों ने भी यहीं से शिक्षा ली. इन सभी ने न सिर्फ अपने क्षेत्र में नाम कमाया, बल्कि इस संस्था की पहचान को भी आगे बढ़ाया.
हिंदी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में निभाई भूमिका
इलाहाबाद स्थित ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन’ की स्थापना 1910 में हुई थी. इसने हिंदी भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. यह कॉलेज भी इसका मजबूत साथी था. इस जुड़ाव ने सुनिश्चित किया कि यहां की शिक्षा में हमेशा राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक बनी रहे. यही संबंध इस कॉलेज को खास बनाता है.
कॉलेज की जर्जर हालत
आज राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय की हालत बेहद खराब है. इसकी इमारतें समय के साथ टूट चुकी हैं, लेकिन आज भी यह कॉलेज अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है. एक समय था जब यह कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा जैसे बड़े संस्थानों से जुड़कर काम करता था. उस दौर में यह छोटा कॉलेज भी ज्ञान का एक अहम केंद्र था.लेकिन आज़ादी के बाद कई कारणों से इसकी चमक फीकी पड़ गई है.
(जयश्री आनंद की रिपोर्ट)
Also Read: Bihar Flood News: हे गंगा मइया कुछ तो रहम कर… बक्सर से लेकर लखीसराय तक 12 जिलों में बाढ़ से हाहाकार
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Preeti Dayal
प्रीति दयाल, प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल सिटी पोस्ट लाइव से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद डेलीहंट और दर्श न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं. प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा. पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंटेंट रिसर्च, SEO आधारित लेखन, सोशल मीडिया फ्रेंडली कंटेंट तैयार करना और तेजी से बदलते न्यूज वातावरण में काम करना प्रमुख क्षमताओं में शामिल है. बिहार की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, सिनेमा और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर रुचि और समझ है. टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना कार्यशैली का हिस्सा है. प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










