जिले के 460 महिलाएं आज बना चुकी है प्रगतिशील महिला की पहचान

Updated at : 04 Jun 2017 12:02 AM (IST)
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जिले के 460 महिलाएं आज बना चुकी है प्रगतिशील महिला की पहचान

बिहारशरीफ : जिले की वैसी महिलाएं जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर थी तथा समाज में उपेक्षित जीवन जी रही थी, जीविका ने उन्हें बेहतर जीवन जीने की राह दिखायी. ऐसी महिलाओं का चयन कर जीविका ने समूह निर्माण, ग्राम संगठन बनाने का प्रशिक्षण देकर इस प्रकार ट्रेंड किया है कि आज वे न केवल […]

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बिहारशरीफ : जिले की वैसी महिलाएं जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर थी तथा समाज में उपेक्षित जीवन जी रही थी, जीविका ने उन्हें बेहतर जीवन जीने की राह दिखायी. ऐसी महिलाओं का चयन कर जीविका ने समूह निर्माण, ग्राम संगठन बनाने का प्रशिक्षण देकर इस प्रकार ट्रेंड किया है कि आज वे न केवल सूबे के दूसरे जिलों में, बल्कि दूसरे प्रदेशों में जाकर वहां की महिलाओं को अर्थिक संपन्नता का गुर सीखा रही है. जिले में ऐसी करीब 460 महिलाएं हैं

जो आज जीविका की मास्टर ट्रेनर बनी हुई हैं.कल तक विधवा पर परित्यकता की जिंदगी जी रही ये महिलाएं आज अच्छी कमाई कर रही हैं और परिवार व समाज में प्रगतिशील महिला के रूप में पहचान बनाने में कामयाब हुई है.

यूपी के 10 जिलों में कर रही समूह निर्माण :
मास्टर ट्रेनर के रूप में काम कर रही जिले के ये महिलाएं आज यूपी जीविका के बुलावे पर यूपी के विभिन्न जिलों में जाकर समूह बनाकर आर्थिक संपन्नता का गुर सीखा रही हैं. यूपी के चंदौली, आजमगढ़, बहराइच, सोनभद्र, इलाहाबाद, अंबेदकरनगर, बस्ती, बिजनौर, लखिमपुर खिरी, मिर्जापुर आदि जिलों एसएचजी कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन, बीओ कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन एवं सीएलएफ कम्यूनिटि रिसोर्स पर्सन के रूप में काम कर रही है.
45 दिनों में मिल रहा 60 हजार रूपये :
जिले की ये मास्टर ट्रेनर यूपी जाती है तो एक बार में 45 दिन रहकर वहां की महिलाओं को ट्रेनिंग देती हैं. यूपी जीविका द्वारा इनके वहां रहने का प्रबंध किया जाता है. 45 दिन बाद जब वह लौटती हैं तो प्रत्येक के खाते में 60 हजार रूपये मिल जाते है. बिहार के दूसरे जिलों में जब ट्रेनिंग देने के लिए जाती हैं तो उन्हें पारिश्रमिक के रूप में अच्छी खासी रकम मिलती है. मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करने वाली इन महिलाओं का एक दिन का पारिश्रमिक 500 रूपये से लेकर 1500 रूपये तक निर्धारित है.
बिहार के कई जिलों में बन रहा कलस्टर लेवल फेडरेशन :
बिहार के कई जिलों में महिलाओं को ट्रेनिंग देने का जिम्मा नालंदा के इन मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहीं महिलाओं को सौपा गया है . ऐसे जिलों में अरवल, नवादा, शेखपुरा, जमूई, पटना, आरा आदि शामिल है.
नालंदा की इन मास्टर ट्रेनरों को झारखंड व राजस्थान में कलस्टर लेबल फे डरेशन निर्माण करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है. इस जिम्मेवारी को नालंदा की महिलाएं पूरी ईमानदारी के साथ निभा रही है. नालंदा की ये महिलाएं वहां जाकर अपने अतीत की जानकारी के साथ ही आज जिस मुकाम पर पहुंची है, उसको बताकर महिलाओं को प्रेरित कर रही है. इसका खासा प्रभाव वहां की महिलाओं पर पड़ रहा है और वह स्वेच्छा से जीविका के साथ जुड़कर आर्थिक रूप से संपन्न होने के गुर सीख रही हैं.
यूपी के इन जिलों में हो रहा काम :
चंदौली, आजमगढ़, बहराइच, सोनभद्र, इलाहाबाद, अंबेदकरनगर, बस्ती, चोपान, बिजनौर, लखीमपुर, मिर्जापुर
एसएचजी सीआर पी मेंबर – 300
वीओ सीआरपी मेंबर – 150
वन ड्राइव पेमेंट – लगभग – 60,000 रूपया.
ये हैं कुछ जिले की मास्टर ट्रेनर :
इंदू देवी, कुंती देवी, मरूवन देवी, रीता देवी, बेबी देवी , प्रियंका देवी, सबिना खातुन, पिंकी देवी, गीता देवी, बिंदू देवी, अनिता कुमारी सिन्हा, रंजू देवी .
क्या कहते हैं डीपीएम :
‘’ जिले की गरीब व सामाजिक रूप से परित्यक्त महिलाओं को जीविका के साथ छोड़कर उन्हें प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर बनाया गया है. आज ऐसे करीब 460 महिलाओं को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है. आज ये महिलाएं न केवल सूबे के दूसरे जिलों में, बल्कि दूसरे राज्यों में जाकर महिलाओं को आर्थिक संपन्नता के गुर सीखा रही हैं. इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है और परिवार के भरण-पोषण में अहम भूमिका निभा रही है’’
डॉ संतोष कुमार,डीपीएम, नालंदा
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