खुशी : सुरक्षित यात्रा का लाभ ले रहे लोग, बरात में लौटी रौनक

Updated at : 21 Apr 2016 12:53 AM (IST)
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खुशी :  सुरक्षित यात्रा का लाभ ले रहे लोग, बरात में लौटी रौनक

पिछले वर्ष शराब की लत ने कई को काल-कवलित किया था. अनुमान के मुताबिक करीब 61 लोगों की मौत विभिन्न सड़क हादसों में हुई थी, जबकि शराब के नशे में घटी घटनाओं में बीस से ज्यादा लोग मारे गये थे. शादी-ब्याह के मौकों पर कई ओवरलोडेड बड़ी गाडि़यां सड़क पर पलट गयी थीं, जिसमें कई […]

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पिछले वर्ष शराब की लत ने कई को काल-कवलित किया था. अनुमान के मुताबिक करीब 61 लोगों की मौत विभिन्न सड़क हादसों में हुई थी, जबकि शराब के नशे में घटी घटनाओं में बीस से ज्यादा लोग मारे गये थे. शादी-ब्याह के मौकों पर कई ओवरलोडेड बड़ी गाडि़यां सड़क पर पलट गयी थीं, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे. शराब के नशे में धुत एक चालक पूरी बरात पार्टी को चलती ट्रेन के आगे लेकर चला गया था. इस हादसे में छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी थी.

शादी-ब्याह का माहौल भी बना है खुशनुमा

नियंत्रित रफ्तार में दौड़ रही हैं गाडि़यां
महिलाओं में अपार खुशी
शराबबंदी की सख्ती का असर दिखने लगा सड़कों पर
बिहारशरीफ : बिहार में शराब के बंद हुए महज बीस दिन हुए हैं, लेकिन इसका सकारात्मक असर नालंदा जिले में देखने को मिल रहा है. सदर अस्पताल के आंकड़े इसके ताजा उदाहरण हैं. शराब को लेकर कोई बड़ा हादसे दर्ज नहीं किये गये हैं. नालंदा पुलिस भी इस बात से सहमत है. गरमी के इस मौसम में नशे के शौकीन लोग ठंडे बियर का सेवन छक कर किया करते थे. नालंदा में सिर्फ पांच माह में 15 लाख लीटर बियर की बिक्री होती थी. बियर की यह बिक्री मार्च से जुलाई माह तक की है. आज स्थिति बदली है. नशा से तोबा कर नशे के शौकीन रहे लोग शीतल पेय पदार्थ का सेवन कर रहे हैं.
शादी-ब्याह का माहौल बना है खुशनुमा : पिछले बीस दिनों से जिले में शादी-ब्याह का कार्यक्रम धूम मचाये हुए है. सड़क पर बैंड-बाजे खूब निकल रहे हैं. कहीं से भी शराब की बू तक नहीं आ रही है. शराब के नशे में घटने वाली छिटपुट घटनाओं पर अंकुश लग गया है. नागिन डांस का प्रचलन विलुप्त होता जा रहा है.
महिलाओं में अपार खुशी: शराबबंदी की घोषणा के बाद खासकर महिला वर्ग में काफी खुशी देखी जा रही है. हरेक तबके की महिलाएं इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दे रही हैं. स्थानीय महलपर की कांति देवी बताती हैं कि उसका पति रात में शराब पीकर आता था. मारपीट व गालीगलौज नित्य दिन की बात हो गयी थी. अब ऐसी बात नहीं है. ठेला चला कर अपना व अपने परिवार का पेट पालने वाला उसका पति अब सूर्य के ढलते ही सही सलामत घर आ जाता है. बच्चों के लिए मिठाई भी लाता है. महिला कहती हैं कि वह जब तक बचेगी नीतीश बाबू को ही वोट देगी.
शराब के नशे में पिछले वर्ष मरनेवालों के आंकड़े: वर्ष 2015 में सिर्फ शराब पीकर करीब 61 लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई थी. सर्वाधिक मौतें मार्च से जुलाई माह तक की हैं. इसके अलावे करीब 35 लोग इस हादसे में शारीरिक रूप से अपंग हो गये थे. शराब के नशे में आपराधिक घटनाओं में बीस से अधिक लोगों की हत्याएं हुई थीं.
ठेला चालक मोहन मांझी भी निर्णय के पक्ष में : तसवीर व पहचान नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर ठेला चालक मोहन मांझी कहता है कि वह भी अब पूर्ण शराबबंदी के पक्ष में है. उसने अपने समाज के दूसरे लोगों को भी सरकार के इस निर्णय पर अमल करने की अपील की है. मोहन कहता है कि वह शाम को प्रतिदिन पचास रुपये की देशी शराब पी जाता था. इसके अलावे बीस रुपये चखने पर भी खर्च होता था. इस हिसाब से वह एक माह में 21 सौ रुपये सिर्फ नशे पर खर्च कर देता था. शराब के बंद हो जाने से उसके घर में खुशियां लौटी हैं.
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