अनदेखी. कोर्ट परिसर में बड़े आरोपितों की पेशी पर बरती जाती है सतर्कता

Updated at : 19 Apr 2016 12:53 AM (IST)
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अनदेखी. कोर्ट परिसर में बड़े आरोपितों की पेशी पर बरती जाती है सतर्कता

मेन गेट पर मेटल डिटेक्टर की सुविधा नहीं कोर्ट की सुरक्षा को लेकर मनगढ़ंत व काल्पनिक बातों का उल्लेख करने वाली स्थानीय पुलिस यहां पर पूरी तरह फेल दिखती है. मूल्यहीन निहितार्थ को एकांतिक कर पुलिस कोर्ट से संबंधित सुरक्षा को लेकर खास गंभीर नहीं है.सुरक्षा को लेकर परिश्रम में तपलीन सिपाही व हवलदार चाह […]

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मेन गेट पर मेटल डिटेक्टर की सुविधा नहीं

कोर्ट की सुरक्षा को लेकर मनगढ़ंत व काल्पनिक बातों का उल्लेख करने वाली स्थानीय पुलिस यहां पर पूरी तरह फेल दिखती है. मूल्यहीन निहितार्थ को एकांतिक कर पुलिस कोर्ट से संबंधित सुरक्षा को लेकर खास गंभीर नहीं है.सुरक्षा को लेकर परिश्रम में तपलीन सिपाही व हवलदार चाह कर भी परेशानियों का जिक्र अपने वरीय अधिकारियों से नहीं कर पाते हैं.
बिहारशरीफ : यह दु:ख पूर्ण स्मृति है. जिसकी तसवीर काफी भयानक है. निहितार्थ बस इतना है कि एकांतिक हीन मानसिकता को प्राथमिकता देने वाले कुछ भी कर के यहां से गुजर सकते हैं. स्थानीय कोर्ट कैंपस की ग्राउंड रिर्पोटिंग की एक-एक बातें सुरक्षा से जुड़ी मापदंडों की सच्ची दास्तां है.
कोर्ट में प्रवेश को लेकर बने हैं तीन द्वार
आधिकारिक तौर पर तो दो ही द्वार मान्य बताया जाता है.तीसरा द्वार का प्रयोग ज्यादातर स्थानीय छोटे-मोटे दुकानदार करते हैं.कोर्ट के मुख्य द्वार की सुरक्षा पूरी तरह अधर में है.सुरक्षा को लेकर मुख्य द्वार पर कोई भी पुलिस कर्मी की तैनाती वर्तमान में नहीं है.
कुछ यही स्थिति दूसरे द्वार की है.कुछ दिन पूर्व तक दूसरे द्वार पर मेटल डिटेक्टर के साथ एक सुरक्षा कर्मी की तैनाती रहती थी,जो अब नहीं है.पूछने पर एक सुरक्षा कर्मी ने बताया कि दुष्कर्म कांड के आरोपित विधायक राजबल्लभ यादव के आत्मसर्मपण के बाद सुरक्षा में तैनात कई सुरक्षाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है,तब से पुन:दूसरी प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है.
सिपाही व हवलदार के भरोसे सुरक्षा की कमान
कोर्ट परिसर की सुरक्षा की कमान सिपाही व हवलदार संभाल रहे हैं.एक दारोगा को भी इसकी जिम्मेवारी सौंपी गयी है.कोर्ट परिसर में ही सभी सुरक्षाकर्मी 24 घंटे डटे रहते हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक ने बताया कि हमारी ड्यूटी विशेष तौर पर परिसर के अंदर अनावश्यक भीड़ पर नियंत्रण करने से संबंधित है.इसके अलावे कोई सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाये इसे भी देखना होता है. सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि रात के वक्त खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता है.सरकारी स्तर पर सर्च लाइट की व्यवस्था नहीं है.अपने पॉकेट से टॉर्च खरीद कर रात की ड्यूटी करते हैं.
नगर थाने के अधीन है सुरक्षा की कमान :कोर्ट क्षेत्र की सुरक्षा का दायित्व नगर थाना के जिम्मे है.कोर्ट से संबंधित सुरक्षा मानकों की जानकारी देते हुए नगर थाना पुलिस ने बताया कि थाना स्तर से कोर्ट की सुरक्षा पर नजर रखी जाती है.कैंपस में सादी वरदी में भी कर्मी तैनात रहते हैं,जो संदिग्धों पर नजर रखते हैं.इसके अलावे बाइक से भी गश्त किया जाता है.
सुरक्षा कर्मियों से खाली पड़ा कोर्ट का मुख्य द्वार.
” कोर्ट परिसर की पर्याप्त सुरक्षा को लेकर एडिशनल अभियान से रिपोर्ट मांगी गयी थी.रिपोर्ट में अंदर की सुरक्षा को संतोषजनक बताया गया है.प्रवेश द्वार की सुरक्षा उम्दा नहीं बतायी गयी है,इसके व्यापक इंतजाम कराये जा रहे हैं.प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर के साथ सुरक्षा कर्मियों को लगाया जा रहा है.कोर्ट प्रवेश के लिए तीन द्वार बने हैं,जिसमें दो को बंद करने का अनुरोध किया जायेगा”
कुमार आशीष ,पुलिस सुपरिटेंडेंट,नालंदा
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