अनुदानित बीज लेने के लिए किसान तैयार नहीं

Updated at : 13 Jun 2015 10:38 AM (IST)
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अनुदानित बीज लेने के लिए किसान तैयार नहीं

प्रखंड स्तर पर आयोजित बीज व उपादान वितरण कैंपों में टर्न अप नहीं हो रहे किसान बिहारशरीफ : खरीफ मौसम 2015 में किसानों को उन्नत धान का प्रभेद उपलब्ध कराने के पूरे जिले में प्रखंड स्तर पर बीज व उपादान वितरण शिविर लगाये जा रहे हैं. पूर्व में आठ जून तक प्रखंड स्तर पर शिविर […]

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प्रखंड स्तर पर आयोजित बीज व उपादान वितरण कैंपों में टर्न अप नहीं हो रहे किसान
बिहारशरीफ : खरीफ मौसम 2015 में किसानों को उन्नत धान का प्रभेद उपलब्ध कराने के पूरे जिले में प्रखंड स्तर पर बीज व उपादान वितरण शिविर लगाये जा रहे हैं. पूर्व में आठ जून तक प्रखंड स्तर पर शिविर लगाने की तिथि निर्धारित की गयी थी. बाद में कृषि विभाग द्वारा इस बढ़ा कर 12 जून कर दिया गया है.
निर्धारित तिथि बार-बार इसलिए बढ़ाया जा रहा है,क्योंकि इस बार इन बीज वितरण कैंपों में किसान टर्न अप पर्याप्त संख्या में नहीं हो पा रहे हैं. इसके कारण बीज वितरण का विभाग का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है.
इस वर्ष किसान उन्नत प्रभेद के धान का बीज अनुदान पर खरीदने के लिए मारामारी करते थे. इस बार ऐसा क्या है कि किसान अनुदान पर उन्नत प्रभेद के धान का बीज खरीदने से हिचक रहे हैं. विभाग के अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा है. किसानों को कैंपों में खींच लाने के उद्देश्य से उन्हें मोटिवेट करने का कार्य भी किया जा रहा है. इसके बाद भी नतीजा उत्साहवर्धक नहीं है. इसके कारण विभाग के अधिकारियों के सिर पर बल पड़ गये हैं.
बाजार से ऊंचे दाम पर मिल रहे हैं बीज
कई किसानों ने बताया कि खरीफ 2015 के लिए चयनित संकर धान के प्रभेद की किसानों को उपलब्ध कराने के लिए जो मूल्य सूची निर्धारित की गयी है,वह मार्केट रेट से काफी अधिक है. किसानों ने बताया कि विभाग के कैंपों में जो रेट पर धान के बीज मिल रहे हैं, उससे कम मूल्य पर खुले बाजार में मिलते हैं.
किसान सलाहकारों को करनी पड़ती है खुशामद
किसानों को अनुदान पर बीज प्राप्त करने के लिए किसान सलाहकारों के आगे पीछे लगना पड़ता है और उनकी खुशामद करनी पड़ती है. मान मनोव्वल करने के बाद जब बीज व अनुदान मिल जाता है तो अनुदान प्राप्त करने के लिए विभाग के कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है. काफी भाग दौड़ के बाद भी अनुदान की राशि नकद नहीं मिल पाती है. आरटीजीएस के माध्यम से बैंक के खाते में भेजी जाती है. इतनी दौड़ धूप करने के बाद किसानों को थोड़े पैसे की बचत होती है. इतनी जलालत ङोलना किसान नहीं चाहते हैं.
क्या कहते हैं किसान
कैंपों में धान की बेहतर क्वालिटी नहीं रहती है. दूसरे अनुदान के नाम पर कैंपों में धान की कीमत खुले मार्केट से अधिक होती है. इसके कारण किसान कैंपों से धान के बीज खरीदने से हिचक रहे हैं.
राम प्रवेश प्रसाद, किसान, बलधा-सरैया
नालंदा कृषि विभाग के कैंपों से कई बार उन्नत प्रभेद के धान के बीज खरीद चुका हूं. अनुदान के इन बीजों ने बार-बार धोखा दिया है. सारी पूंजी डूब गयी है. उपज नहीं हुई. विभाग से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
मित्र कुमार, सूड़ी, इस्लामपुर
क्या कहते हैं अधिकारी
कैंपों में अधिक दाम पर धान का बीज बेचे जाने के आरोप के बारे में कुछ नहीं कह सकता. कैंपों में उपलब्ध सभी किस्मों के धान के बीज के पैकेट पर राज्य सरकार की मुहर लगा हुआ है.
अगर कोई बीज किसानों को धोखा देता है तो किसान बिल, कैश मेमो विभाग को दिखा कर शिकायत करें. किसानों को मुआवजा दिया जायेगा और संबंधित कंपनी पर कार्रवाई की जायेगी. कैंपों में बिकने वाले बीजों के संबंध में विभाग गारंटी किसानों को देता है.
बैद्यनाथ रजक, जिला कृषि पदाधिकारी नालंदा
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