शिक्षकों की हड़ताल से जिले के 6.25 लाख बच्चों की पढ़ाई बाधित

Updated at : 06 May 2015 1:21 AM (IST)
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शिक्षकों की हड़ताल से जिले के 6.25 लाख बच्चों की पढ़ाई बाधित

नियोजित शिक्षकों की हड़ताल से जिले के करीब 6.25 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है. इस हड़ताल में माध्यमिक शिक्षक संघ व प्राथमिक शिक्षक संघ के शामिल हो जाने से स्थिति और विकट हो गयी है. प्राथमिक शिक्षक संघ के शामिल हो जाने से स्थिति और विकट हो गयी है. प्राथमिक शिक्षक […]

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नियोजित शिक्षकों की हड़ताल से जिले के करीब 6.25 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है. इस हड़ताल में माध्यमिक शिक्षक संघ व प्राथमिक शिक्षक संघ के शामिल हो जाने से स्थिति और विकट हो गयी है.
प्राथमिक शिक्षक संघ के शामिल हो जाने से स्थिति और विकट हो गयी है. प्राथमिक शिक्षक संघ के जिले में सदस्य बहुत ही कम है, मगर माध्यमिक शिक्षक संघ की हड़ताल में शामिल हो जाने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गयी है.
बिहारशरीफ (नालंदा) : समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर नियोजित शिक्षक 27 दिनों से चली आ रही हड़ताल के कारण जिले की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गयी है. हालांकि नियोजित शिक्षकों के हड़ताल के बावजूद काफी संख्या में स्कूल खुले हैं, मगर इन विद्यालयों में पढ़ाई नाम मात्र की ही हो रही है. जो शिक्षक हड़ताल पर नहीं है, वे केवल अपनी ड्यूटी ही बजा रहे हैं.
नियोजित शिक्षकों की इस हड़ताल में माध्यमिक शिक्षक संघ व प्राथमिक शिक्षक संघ के शामिल हो जाने से जिले में हड़ताल का बहुत ज्यादा असर तो नहीं हुआ. मगर हड़ताल कर रहे नियोजित शिक्षकों को इससे नैतिक समर्थन मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता है.
जिले में प्राथमिक शिक्षक संघ के सदस्य बहुत ज्यादा नहीं होने के कारण इसका जिले में विशेष प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है. जिले में अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ के सदस्य अधिक संख्या में हैं, मगर यह संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं हुआ है. इसके कारण प्राइमरी स्कूलों में इस हड़ताल का विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है. जिन स्कूलों में नियोजित शिक्षकों की संख्या अधिक हैं, वैसे स्कूलों में इस हड़ताल का विशेष प्रभाव देखा जा रहा है. जिले के अधिकतर विद्यालयों में नियोजित शिक्षकों के साथ-साथ वेतनमान वाले शिक्षक तैनात है. इसके कारण नियोजित शिक्षकों की हड़ताल के बावजूद स्कूल खुले दिख रहे हैं.
करीब 6.25 लाख बच्चे कुप्रभावित
शिक्षकों की हड़ताल से जिले के प्राइमरी स्कूलों, हाइ स्कूलों व प्लस टू स्कूलों के करीब 6.25 लाख बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है. इसके अलावा नियोजित माध्यमिक शिक्षकों की हड़ताल से मैट्रिक की उत्तर पुस्तिका जांचने का कार्य भी प्रभावित हो रहा है. इसके कारण मैट्रिक के रिजल्ट का प्रकाशन सही समय पर होने में संदेह पैदा हो गया है.
जिले में हैं करीब 9300 शिक्षक
जिले में प्राइमरी स्कूलों से लेकर हाई स्कूल व प्लस टू स्कूलों में करीब 9300 शिक्षक कार्यरत हैं.
इनमें से सबसे ज्यादा संख्या नियोजित शिक्षकों की है. अकेले प्राइमरी स्कूलों में करीब आठ हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं. इसके अलावा हाइ स्कूल व प्लस टू स्कूलों में करीब 1300 शिक्षक कार्यरत है.
हड़ताली शिक्षकों ने किया प्रदर्शन व सामूहिक उपवास
नियोजित शिक्षक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने मंगलवार को शहर में प्रदर्शन किया. जिले के नियोजित शिक्षकों व पुस्तकालयाध्यक्ष स्थानीय श्रम कल्याण केंद्र के मैदान में एकत्रित हुए.
नियोजित शिक्षक जिलाध्यक्ष रौशन कुमार के नेतृत्व में ‘जब तक वेतनमान नहीं, तब तक कोई काम नहीं’, ‘जब तक शिक्षक भूखा है, ज्ञान का सागर सूखा है’ समान काम, समान वेतन का नारा लगाते हुए डीइओ कार्यालय पहुंचे. डीइओ कार्यालय के समक्ष नियोजित शिक्षकों ने सामूहिक रूप से उपवास किया. इसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष ने की तथा संचालन महासचिव मो इरफान मल्लिक ने की. इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार के अड़ियल रवैये व हठधर्मिता के कारण नियोजित शिक्षक आंदोलन करने को मजबूर है.
शांतिपूर्ण तरीके से किये जा रहे शिक्षकों को दबाने के लिए राज्य सरकार तरह-तरह का कुचक्र रच रही है. उन्होंने कहा कि ‘नो वर्क, नो पे’ के राज्य सरकार के तुगलकी फरमान से शिक्षक डरनेवाले नहीं है.
उन्होंने कहा कि वेतनमान लेकर ही वे विद्यालय लौटेंगे. धरना सभा को मो इरफान मल्लिक, धर्मेद्र कुमार, मनोज कुमार आदि ने संबोधित किया. इस मौके पर सुनैना कुमारी, प्रेम प्रकाश, विनोद चौधरी, नवल किशोर शर्मा, सूर्यकांत सिंह कांत, सुनील कुमार, कौशलेंद्र ब्रrाचारी, अजय कुमार, अति उत्तम कुमार आदि मौजूद थे.
क्या कहते हैं अधिकारी
‘‘ नियोजित शिक्षकों की हड़ताल से स्कूलों के संचालन में बाधा उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता है. जिले में नियोजित शिक्षकों की संख्या अधिक होने की वजह से पढ़ाई बाधित हो रही है.
प्राथमिक शिक्षक संघ की हड़ताल में शामिल हो जाने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा है, क्योंकि प्राथमिक शिक्षक संघ के ज्यादा सदस्य जिले में नहीं है.’’
कुमार सहजानंद, जिला शिक्षा पदाधिकारी, नालंदा
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