नकली व निम्न स्तरीय दवाओं की हो रही जांच

Updated at : 17 Apr 2015 8:56 AM (IST)
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नकली व निम्न स्तरीय दवाओं की हो रही जांच

अभियान में सरकारी अस्पताल व रिटेल शॉप भी आयेंगे दूसरे देशों द्वारा बार-बार भारत में दवाओं का स्तर निम्न होने के लगाये जा रहे आरोपों के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा पूरे देश में दवा के नकली व निम्न स्तर के होने की जांच शुरू की गयी है. जांच की जिम्मेवारी नेशनल इंस्टीट्यूट द्वारा नालंदा में […]

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अभियान में सरकारी अस्पताल व रिटेल शॉप भी आयेंगे
दूसरे देशों द्वारा बार-बार भारत में दवाओं का स्तर निम्न होने के लगाये जा रहे आरोपों के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा पूरे देश में दवा के नकली व निम्न स्तर के होने की जांच शुरू की गयी है. जांच की जिम्मेवारी नेशनल इंस्टीट्यूट द्वारा नालंदा में भी ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम द्वारा दवा दुकानों में रखी गयी दवाओं की जांच बुधवार से शुरू कर दी गयी है.
बिहारशरीफ : नकली व निम्न स्तर की दवाएं बाजार में धड़ल्ले से बिकने की अक्सर शिकायतें मिलती रहती हैं. अब मरीजों को इन नकली व निम्न स्तरों की दवाओं से जल्द ही छुटकारा मिलेगा. केंद्र सरकार ने नकली, निम्न स्तर व बिना ब्रांडेड कंपनी की दवाओं को बाजार में खुलेआम बिक्री व मरीजों के किये जा रहे आर्थिक शोषण पर लगाम लगाने की मुहिम शुरू की है.
इस मुहिम के तहत ऐसे दवाओं की जांच के लिए 10 दिवसीय अभियान शुरू किया गया है. साथ ही,इस जांच अभियान में सिविल सोसाइटी की भागीदारी भी सुनिश्चित की गयी है. जिले में दवाओं की जांच अभियान बुधवार से शुरू हो गया है. ड्रग इंस्पेक्टर राजेश कुमार के नेतृत्व में ड्रग इंस्पेक्टर परवेज अख्तर,नागेंद्र कुमार व सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि के रूप में जनता कराह कल्याण समाज के चेयरमैन जितेंद्र कुमार दवाओं की जांच का काम शुरू किया गया है.
सरकारी अस्पतालों की दवाओं की भी जांच
जांच के दायरे में केवल दवा दुकान ही नहीं आयेंगे, बल्कि सरकारी अस्पतालों,रिटेलर व थोक विक्रेताओं की दवाओं की जांच भी की जायेगी. जांच टीम के सदस्यों ने इन संस्थानों पर जाकर विभिन्न दवाओं के नमूने लेंगे और उसे जांच के लिए इंस्टीट्यूट के पास भेज दिया जायेगा. जांच रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर ऑनलाइन कर दिया जायेगा.
निर्माण कंपनी पर होगी कार्रवाई
दवाओं की जांच रिपोर्ट आने के बाद रिटेलर को इससे बरी कर दिया जायेगा. दवा का लिया गया नमूना मान के अनुरूप नहीं होने अथवा नकली होने पर रिटेलर को छोड़ दवा निर्माण करने वाली कंपनी पर कार्रवाई की जायेगी.दवाओं के लिए गये नमूने को एसओपी के डाटा से मिलान किया जायेगा. इस मिलान के बाद ही दवा की क्वालिटी का पता चल सकेगा.
एसओपी के अनुसार हो रही जांच
जिले में दवाओं की जांच स्टैंडर्ड ऑथोरिटी प्रोफेसर के हिसाब से की जा रही है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल, नोएड द्वारा जिले को दवा का मानक उपलब्ध कराया गया है. इसके साथ ही दुकानों की सूची भी उपलब्ध करायी गयी है, जहां जांच की जाती है. जांच टीम सूची में दिये गये क्रम के अनुसार दुकानों में कार दवाओं की जांच कर रही है. सूची में जिले के 10 संस्थानों के नाम हैं. बुधवार को स्थानीय पुल पर स्थित ग्रीन मेडिकल हॉल से दवाओं के छह नमूने लिये गये.
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