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मलमास मेले से पहले कुंडों को करें पुनर्जीवित

Updated at : 04 Dec 2019 8:03 AM (IST)
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मलमास मेले से पहले कुंडों को करें पुनर्जीवित

बिहारशरीफ/नालंदा : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर के जमीनदोज कुंडों को मलमास मेला शुरू होने से पहले पुनर्जीवित करने का आदेश जारी किया है. अस्तित्वहीन इन कुंडों को पुनर्जीवित करने के लिए लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पर्यटन विभाग, पंचायती राज विभाग के सचिव और नालंदा के डीएम को सीएम ने आदेश जारी किया […]

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बिहारशरीफ/नालंदा : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर के जमीनदोज कुंडों को मलमास मेला शुरू होने से पहले पुनर्जीवित करने का आदेश जारी किया है. अस्तित्वहीन इन कुंडों को पुनर्जीवित करने के लिए लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पर्यटन विभाग, पंचायती राज विभाग के सचिव और नालंदा के डीएम को सीएम ने आदेश जारी किया है.

मुख्यमंत्री के इस कार्रवाई से अस्तित्वहीन कुडों के पुनर्जीवित होने की उम्मीदें प्रबल हो गयी हैं. इतना ही नहीं, पहले की तरह अब तीर्थयात्री सभी कुंडों में स्नान-दान कर पुण्य लाभ ले सकेंगे. मुख्यमंत्री द्वारा यह कार्रवाई ‘प्रकृति’ के अनुरोधपत्र पर की गयी है. ‘प्रकृति’ के अध्यक्ष नवेंदू झा और सचिव रामविलास ने यह जानकारी दी. मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में ‘प्रकृति’ ने कहा है कि राजगीर गर्म जल के कुंडों के लिए विश्वविख्यात है.
यहां 22 कुंड और 52 धाराओं से गर्म जल का प्रवाह होता है, लेकिन गोदावरी और दुखहरनी कुंड वर्षों से अस्तित्व में नहीं है. दोनों कुंड जमींदोज हो गये हैं. अनंत कुंड में जल प्रवाह दशकों से बंद है. ज्ञापन में कहा गया है कि गोदावरी कुंड जलदेवी मंदिर के समीप गोदावरी और सरस्वती नदी के संगम पर बना था. नदी की उड़ाही के दौरान इसका अस्तित्व समाप्त हो गया है.
यही हाल दुखहरनी कुंड का है. यह वैतरणी घाट और शालीग्राम कुंड के बीच श्मशान के पास था. इस कुंड के समीप एक मंदिर भी था, जहां कुंड में स्नान के बाद पूजा-अर्चना की जाती थी. अब न कुंड है न मंदिर. इन कुंडों के जमींदोज होने के बाद यहां 22 की जगह 20 कुंड ही शेष रह गये हैं. पौराणिक विरासत को बचाने के लिए जमींदोज इन कुंडों को पुनर्जीवित करना आवश्यक प्रतीत होता है.
ज्ञापन में कहा गया है कि शालीग्राम कुंड की सीढ़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं. इन सीढ़ियों से उतरना-चढ़ना संभव नहीं है. इस कारण तीर्थयात्रियों को इस कुंड में स्नान करने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है. राजगीर का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक राजकीय मलमास मेला 18 सितंबर, 2020 से शुरू होने वाला है. वह 17 अक्तूबर तक चलेगा.
खास बातें
राजगीर में 22 कुंड व 52 धाराओं से गर्म जल का होता है प्रवाह
गोदावरी और दुखहरनी कुंड वर्षों पहले समाप्त हो चुका है अस्तित्व
शालीग्राम कुंड की सीढ़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त, उतरना-चढ़ना मुश्किल
18 सितंबर से 17 अक्तूबर, 2020 तक चलेगा राजकीय मलमास मेला
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