सोनपुर में जल छाजन के गुर सीखेंगे किसान, आयेगी हरियाली
Updated at : 21 Nov 2017 4:36 AM (IST)
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किसानों का जत्था नालंदा से हुआ रवाना जत्थे में प्रगतिशील किसान शामिल बिहारशरीफ : खेतों की बेहतर सिंचाई के गुर जिले के किसान सोनपुर में सीखेंगे. जल छाजन योजना से फसलों को हरा-भरा बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को आधुनिक टिप्स बतायेंगे. सोनपुर मेले में सूबे के जाने-माने कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा जल संचय […]
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किसानों का जत्था नालंदा से हुआ रवाना
जत्थे में प्रगतिशील किसान शामिल
बिहारशरीफ : खेतों की बेहतर सिंचाई के गुर जिले के किसान सोनपुर में सीखेंगे. जल छाजन योजना से फसलों को हरा-भरा बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को आधुनिक टिप्स बतायेंगे. सोनपुर मेले में सूबे के जाने-माने कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा जल संचय करने के बारे में गुर बतायेंगे. ताकि किसान सालोंभर अपनी फसलों की सिंचाई कर खेतों में हरियाली ला सके. यह बातें जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने सोमवार को कही. इससे पहले जिला कृषि पदाधिकारी ने जिला कृषि कार्यालय परिसर से नालंदा के किसानों के जत्था को सोनपुर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
तीन दिनों तक सीखेंगे टिप्स
नालंदा के तीस किसान तीन दिनों तक सोनपुर मेले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत फसलों की सिंचाई के लिए जल संचय करने का टिप्स सीखेंगे. जल संचय करने के गुर सीखने के लिए नालंदा से तीस किसानों का दल सोनपुर रवाना हुआ है.
डीएओ अशोक कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिले में क्रियान्वित की जा रही है. यह योजना फसलों को हरा-भरा बनाने में किसानों के लिए सहायक सिद्ध हो रही है. इस योजना के तहत तालाब का निर्माण जिले में कराया जा रहा है. तालाब निर्माण के लिए सरकार की ओर से निर्धारित अनुदान की राशि भी किसानों को उपलब्ध करायी जा रही है. तालाब निर्माण कर किसान आसानी से जल का संचय कर सकते हैं. जल संचय होने से किसान अपनी सुविधा के अनुसार खेतों में लगी फसलों की पटवन कर सकते हैं. समय पर फसलों की सिंचाई होने से इसकी उपज भी अच्छी होगी. जब फसल अच्छी होगी तो किसान आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे.
बरसात के बाद पानी का संचय करना होगा आसान
डीएओ कुमार ने कहा कि सोनपुर मेले में प्रशिक्षण प्राप्त कर नालंदा के प्रगतिशील किसानों को जल संग्रह करने में आसानी हो जायेगी. आमतौर पर देखा जाता है कि बरसात के मौसम में बारिश होने के बाद यूं ही पानी बेकार बह जाता है. यदि किसान इसे संचय करने के तौर तरीके जान जायेंगे तो उन्हें जल संचय करने में आसानी तो होगी ही. साथ ही, बरसात का पानी भी बर्बाद नहीं हो सकेगा. इस तरह किसानों को बरसात के बाद भी फसलों की सिंचाई करना आसान हो जायेगा. इस अवसर पर भूमि संरक्षण के सहायक अमित कुमार समेत कई लोग मौजूद थे.
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