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बिहार में अब गृह विज्ञान भी पढ़ने लगे हैं लड़के, खत्म हुआ लड़कियों का एकाधिकार

Updated at : 19 Feb 2025 7:30 AM (IST)
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Home Science: विभागाध्यक्ष ने विश्वविद्यालय से गृह विज्ञान में लड़कों के एडमिशन को लेकर मार्गदर्शन मांगा है. वहीं, विश्वविद्यालय की ओर से कहा जा रहा है कि इस तरह का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है कि गृह विज्ञान में लड़कों का एडमिशन प्रतिबंधित रहेगा.

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Home Science: मुजफ्फरपुर. गृह विज्ञान विषय में अब छात्रों की रुचि बढ़ने लगी है. इस विषय में पढ़ने के लिए छात्र आगे आने लगे है. बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए कई लड़कों ने भी आवेदन किया है. विश्वविद्यालय की ओर से जारी पहली मेरिट लिस्ट में 4 लड़को को भी जगह मिली है. इसमें 3 को विश्वविद्यालय पीजी विभाग और 1 को कॉलेज आवंटित किया गया है. इसमें प्रेम कुमार, अभिनंदन कुमार व रौशन राज को पीजी विभाग आवंटित किया गया है. वहीं उदय कुमार का नाम आरएलएसवाई कॉलेज की लिस्ट में है. गृह विज्ञान इकलौता विषय है, जिसमें लड़कियों का एकाधिकार माना जाता है. हालांकि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में यह मिथक टूटता दिख रहा है.

एडमिशन के लिए पहुंचे तो सामने आया मामला

विश्वविद्यालय में पीजी सत्र 2024-26 के लिए एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है. 26 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने विभिन्न विषयों के लिए आवेदन किया हैं, जबकि पीजी विभाग से लेकर कॉलेज तक करीब साढ़े 11 हजार सीट ही है. अभी पहली मेरिट लिस्ट 10794 अभ्यर्थियों की जारी की गई है. इसमें गृह विज्ञान के 408 सीटों के लिए भी अभ्यर्थियों को विभाग और कॉलेज आवंटित किया गया है. छात्र जब विभाग में एडमिशन के लिए पहुंचे, तो मामला सामने आया. पहले लगा कि गलती से आवेदन में गृह विज्ञान का विकल्प भर दिया होगा, लेकिन छात्रों ने जब गृह विज्ञान से पीजी करने की बात कही, तो विभागाध्यक्ष ने विश्वविद्यालय से मार्गदर्शन मांगा है.

लड़कों के एडमिशन को लेकर विवि से मांगा मार्गदर्शन

विभागाध्यक्ष ने विश्वविद्यालय से गृह विज्ञान में लड़कों के एडमिशन को लेकर मार्गदर्शन मांगा है. वहीं, विश्वविद्यालय की ओर से कहा जा रहा है कि इस तरह का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है कि गृह विज्ञान में लड़कों का एडमिशन प्रतिबंधित रहेगा. केवल लड़कियों का एडमिशन लिया जाएगा. अब तक गृह विज्ञान विषय में लड़कों का आवेदन नहीं आता था, तो किसी को ध्यान भी नहीं आया. बताया जा रहा है कि कुलपति की अनुमति के बाद निर्णय लिया जाएगा. बता दें कि नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो ये छात्र भी विभाग में संपर्क किये. मेरिट लिस्ट में उनका नाम देखकर विभाग के कर्मचारी के साथ ही शिक्षक भी हैरान रह गए.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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