मुजफ्फरपुर: जननी सुरक्षा योजना की राशि अटकी, प्रसूताएं और परिजन काट रहे अस्पतालों के चक्कर
Published by : सुनील कुमार सिंह Updated At : 03 Jun 2026 1:30 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर
Muzaffarpur News: प्रशासनिक लापरवाही के कारण जननी बाल सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि अटक गई है. डिस्चार्ज प्रक्रिया में त्रुटियों और सुरक्षा कार्ड के अभाव में प्रसूताओं को डीबीटी का लाभ नहीं मिल रहा और वे अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं. जानिए पूरी खबर…
मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए संचालित जननी बाल सुरक्षा योजना तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. अस्पतालों से डिस्चार्ज होने के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी अनेक प्रसूताओं को मिलने वाली सरकारी प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में नहीं पहुंच सकी है. इस राशि के भुगतान के लिए लाचार महिलाएं और उनके परिजन लगातार सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने को विवश हैं.
डिस्चार्ज प्रक्रिया में त्रुटि और जननी सुरक्षा कार्ड के अभाव से फंसा भुगतान
योजना के तहत भुगतान में हो रही इस भारी देरी की मुख्य वजह डिस्चार्ज प्रक्रिया के दौरान होने वाली गंभीर त्रुटियां हैं. प्रसूताओं की जरूरी जानकारियां पोर्टल या सरकारी रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं होने के कारण तकनीकी स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. इसके अलावा कई योग्य लाभुकों के पास आवश्यक जननी सुरक्षा कार्ड उपलब्ध नहीं होने की वजह से भी उनकी प्रोत्साहन राशि को रोक दिया गया है.
48 घंटे के भीतर डीबीटी से राशि ट्रांसफर करने का दावा हुआ फेल
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने प्रोत्साहन राशि के वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की थी. इसके तहत प्रसव के 48 घंटे के भीतर लाभुक के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से राशि सीधे हस्तांतरित किए जाने का कड़ा प्रावधान किया गया था. योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य प्रबंधकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, ताकि तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं से बचा जा सके, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है.
डिजिटल भुगतान के दावों के बीच अस्पतालों के चक्कर काट रहे परिजन
अस्पताल पहुंचे प्रसूताओं के परेशान परिजनों का कहना है कि सरकार एक तरफ डिजिटल भुगतान और त्वरित सेवा की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन दूसरी तरफ गरीब परिवारों को इस छोटी-सी सहायता राशि के लिए भी हफ्तों तक सरकारी दफ्तरों और स्वास्थ्य केंद्रों में भटकना पड़ता है. अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है.
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By सुनील कुमार सिंह
सुनील कुमार सिंह प्रभात खबर मल्टीमीडिया में डिप्टी चीफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं, जिससे पाठकों को सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिलती है।
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