बज्जिका अकादमी का गठन, द्वितीय राजभाषा का दें दर्जा

Published at :10 Feb 2025 1:23 AM (IST)
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बज्जिका अकादमी का गठन, द्वितीय राजभाषा का दें दर्जा

बज्जिका अकादमी का गठन, द्वितीय राजभाषा का दें दर्जा

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-बज्जिका साहित्यकार हरेंद्र सिंह विप्लव की मनायी जयंती

मुजफ्फरपुर.

अखिल भारतीय बज्जिका साहित्य सम्मेलन व विश्व बज्जिका परिषद के संयुक्त तत्त्वावधान में; छोटी सरैयागंज में श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट भवन के सभागार में, लोक भाषा बज्जिका के कवि प्रो हरेंद्र सिंह विप्लव की जयंती पर समारोह हुआ. साहित्यकारों ने राज्य सरकार पर बज्जिका भाषा की उपेक्षा का आरोप लगाया. साथ ही बज्जिका अकादमी बनाने की मांग रखी. साहित्यकारों ने कहा कि बज्जिका को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दें. कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गान से हुआ. मुख्य अतिथि देवेंद्र राकेश, कार्यक्रम अध्यक्ष उदय नारायण सिंह व संयोजक आचार्य चंद्र किशोर पाराशर ने संयुक्त रूप से दीप जला कर उद्घाटन किया व हरेंद्र सिंह विप्लव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की. मौके पर बज्जिका भाषा के 10 साहित्यकारों को महाकवि हरेंद्र सिंह विप्लव स्मृति साहित्य साधना सम्मान दिया गया.

सरकारी सहयोग नहीं, पिछड़ती जा रही बज्जिका

देवेंद्र राकेश ने कहा कि बज्जिका बिहार की प्राचीनतम लोक भाषा है. इसे लोकप्रिय बनाने में महाकवि विप्लव का अहम योगदान है. उनके महाकाव्य कच- देवयानी भारतीय भाषाओं में रचित अन्य महाकाव्य के समतुल्य है, जो बज्जिका भाषियों के लिए गर्व का विषय है. आचार्य चंद्र किशोर पाराशर ने कहा कि बज्जिका भाषा की अकादमी नहीं होने से इसके रचनाकारों व उनकी रचनाओं को सरकारी सहयोग नहीं मिल पाता है. इसके कारण बज्जिका पिछड़ती जा रही है. उदय नारायण सिंह ने कहा कि महाकवि विप्लव की दर्जनों पुस्तकें आज धरोहर हैं और अप्रकाशित पांडुलिपियों को प्रकाशित करवाना, हम सबों का कर्तव्य है. मौके पर मणि भूषण प्रसाद सिंह अकेला, पद्मनाभन विप्लव, अनिल, रघुनाथ, हंस लाल शाह, डॉ अनिल धवन, अरुण शुक्ला ने भी संबोधित किया. धन्यवाद ज्ञापन अरुण शुक्ला ने किया.

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