Bihar Cyber Crime: मुजफ्फरपुर में सिंडिकेट स्थापित कर रहे साइबर ठग, छात्रों का भी हो रहा इस्तेमाल
Published by : Anshuman Parashar Updated At : 28 Aug 2024 10:05 PM
Bihar News
Bihar Cyber Crime: मुजफ्फरपुर साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रह है. साइबर ठगी के लिए प्रमंडल और जिला स्तर पर आइटी के जानकार युवकों को जानकारी देकर उन्हें प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त किया जा रहा है.
Bihar Cyber Crime: मुजफ्फरपुर साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रह है. साइबर ठगी के लिए प्रमंडल और जिला स्तर पर आइटी के जानकार युवकों को जानकारी देकर उन्हें प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त किया जा रहा है. सीमावर्ती देशों में बैठे साइबर ठगों का गैंग फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड से खाता खोलने, मोबाइल क्लोनिंग, लिंक के माध्यम से ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए कॉलेज के छात्रों का भी इस्तेमाल हो रहा है.
नौकरी का झांसा देकर फोन कर ठगी की शिकार बनाया
इस कारण कभी लोगों को झूठी केस में फंसाने की तो कभी परीक्षा में नंबर बढ़वाने और पार्ट टाइम नौकरी का झांसा देकर फोन कर ठगी की शिकार बनाया जा रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले में विभिन्न थाना क्षेत्रों से साइबर ठग गिरोह के शातिरों ने आठ महीनों में छह करोड़ से अधिक रुपये की ठगी की है. हालांकि, पुलिस ने कई मामलों में कार्रवाई कर राशि होल्ड करायी है. साथ ही कई शातिरों की गिरफ्तारी भी की गयी है, लेकिन यह गैंग इतना एक्टिव है कि एक शातिर पकड़ा जाता है तो ये लोकेशन और ठगी का पैटर्न तुरंत बदल देते हैं.
एक साथ सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रखते नजर
साइबर फ्रॉड गिरोह के सदस्य प्रशिक्षण लेते ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपनी नजर रखते हैं. उन्हें पता है कि वर्तमान समय में युवाओं का न्यूनतम चार से पांच घंटे स्क्रीन टाइम सोशल मीडिया पर गुजरता है. ऐसे में उन्हें पार्ट टाइम जॉब, शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट का प्रलोभन दिया जाता है. एक बार जाल में फंसते ही उन्हें वाट्सएप और टेलीग्राम के ग्रुप्स में जोड़ दिया जाता है. यहां पहले से ही इस ग्रुप से जुड़े शातिर मौजूद होते हैं.
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नये शिकार को देखते ही वे तरह तरह का स्क्रीनशॉट शेयर करने लगते हैं. ताकि नये जुड़े व्यक्ति को यह विश्वास हो सके कि पैसा इन्वेस्ट करने पर उन्हें अच्छा मुनाफा होगा. धीरे-धीरे कर जब सारे पैसे शातिर ठग लेते हैं तो या को उन्हें ब्लॉक कर देते हैं या उसके बाद रिप्लाई देना बंद कर देते हैं. प्राथमिकी दर्ज होने या कार्रवाई होने की स्थिति में ठगी के दौरान प्रयोग किए जा रहे सभी नंबर बंद हो जाते हैं
साइबर नियंत्रण के लिए प्रयास कर रही पुलिस, 3.41 करोड़ रुपये बचाये
जिले में साइबर थाना की स्थापना होने के बाद से साइबर अपराधियों पर नकेल कसा जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले में साइबर ठगी के कुल 103 मामले दर्ज किए गये. वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में साइबर थाने में 69 और अन्य थानाें को मिलाकर एक सौ से अधिक मामले दर्ज किये गये हैं. पुलिस का दावा है पिछले वित्तीय वर्ष में प्राथमिकी के बाद 3.41 करोड़ की राशि होल्ड करायी गयी है. साइबर सेल लगातार विभिन्न सोशल मीडिया सेल पर सक्रिय है.
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By Anshuman Parashar
अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.
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