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गोभी की फसल पर डायमंड बैक मोथ का हमला

19 Oct, 2015 10:24 pm
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गोभी की फसल पर डायमंड बैक मोथ का हमला

गोभी की फसल पर डायमंड बैक मोथ का हमला पत्तियों का चट कर पहुचां रहा नुकसान खरीफ समाप्त होने के बाद सब्जी में नुकसान किसानों के समक्ष नुकसान भरपाई की चुनौती वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरगोभी की फसल में डायमंड बैक मोथ का हमला खूब हो रहा है. गाेभी की फसल बरबाद हो रही है. खेतों में […]

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गोभी की फसल पर डायमंड बैक मोथ का हमला पत्तियों का चट कर पहुचां रहा नुकसान खरीफ समाप्त होने के बाद सब्जी में नुकसान किसानों के समक्ष नुकसान भरपाई की चुनौती वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरगोभी की फसल में डायमंड बैक मोथ का हमला खूब हो रहा है. गाेभी की फसल बरबाद हो रही है. खेतों में हरा चमकदार और लंबा कीड़ा पत्तियों पर अनगिनत रेंग रहा है. हर दिन पत्तियों को चट कर रहा है. धान बरबाद होने के बाद किसानों को सब्जी की खेती से उम्मीद थी. लेकिन, यह कीड़ा किसानों की कमर तोड़ रहा है. किसानों का कहना है कि गोभी की स्थिति काफी बिगड़ रही है. माधोपुर के किसान सोनू कुमार बताते हैं कि यहां के खेतों की स्थिति ठीक नहीं है. गोभी से काफी उम्मीद थी. लेकिन पत्तियां खाकर गोभी को समाप्त कर रहा है. ऐसे में किसानों की पूंजी भी डूब सकती है. बंदरा योगेंद्र प्रसाद बताते हैं कि पात गोभी या फूलगोभी सबका हाल काफी बेकार हो गया है. कीड़े खेतों में गोभी को चट कर रहा है. इतने नुकसान की भरपाई कहां से होगी? खेतों को कीड़ा से करें बचाव पौधा संरक्षण विभाग से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष पानी नहीं होने से कई कीड़े- मकोड़े पनपे हैं. किसानों को सूझबूझ के साथ दवा की उचित मात्रा का प्रयोग करना होगा. दवा के साथ प्रति लीटर पानी में एक एमएल स्टिकर यानी चिपचिपा पदार्थ का प्रयोग जरूर करें. उपनिदेशक पौधा संरक्षण तिरहुत प्रमंडल अविनाश कुमार ने बताया कि किसान इस कीड़ा से गाेभी को बचाने के लिए नीम तेल चार से पांच एमएल प्रति लीटर पानी में घाेल बनाकर सुबह में छिड़काव कर दें. कम करें रासायनिक दवाओं का प्रयोग अविनाश बताते हैं कि रासायनिक कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कम करें. दवा का प्रयोग करने के कम से कम 10 दिन बाद ही गोभी को खाने के काम में ला सकते हैं. इससे पूर्व गोभी का प्रयोग खतरनाक हो सकता है. इसके अलावे किसान प्रोफेनोफॉस डेढ़ एमएल प्रति लीटर पानी, मालाथियान 50 इ सी डेढ़ एमएल दवा एक लीटर पानी में, साइपरमेथरीन 10 इसी 1 एमएल दवा प्रति लीटर पानी में, क्लोरोपाइरीफॉस 20 इ सी दवा डेढ़ एमएल दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. पानी के साथ दवा का घोल बनाते वक्त स्टिकर का प्रयोग अवश्य करें. किसान इनमें से किसी एक दवा का ही प्रयोग करें. कृषि विज्ञान केंद्र सरैया के पौधा संरक्षण रोग विशेषज्ञ हेमचंद्र चौधरी ने बताया कि किसान लैम्बडा साइहोलोथ्रिन दो एमएल दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.

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