शहर की बहुमंजिली इमारतों में फायर सेफ्टी नहीं

Updated at : 26 May 2019 2:22 AM (IST)
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शहर की बहुमंजिली इमारतों में फायर सेफ्टी नहीं

मुजफ्फरपुर : शहर में दिनों-दिन बहुमंजिली इमारतों की संख्या बढ़ती जा रही है. कोचिंग संस्थान, सिनेमाहॉल, मॉल, हॉस्पिटल व होटल मल्टीस्टोरेज बिल्डिंग में चलाये जा रहे हैं. लेकिन, इन इमारतों में फायर सेफ्टी के मानकों का गंभीरता पूर्वक पालन नहीं किया जा रहा है. सुरक्षा के नाम पर फायर एक्सटींग्यूसर से काम चलाया जा रहा […]

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मुजफ्फरपुर : शहर में दिनों-दिन बहुमंजिली इमारतों की संख्या बढ़ती जा रही है. कोचिंग संस्थान, सिनेमाहॉल, मॉल, हॉस्पिटल व होटल मल्टीस्टोरेज बिल्डिंग में चलाये जा रहे हैं. लेकिन, इन इमारतों में फायर सेफ्टी के मानकों का गंभीरता पूर्वक पालन नहीं किया जा रहा है. सुरक्षा के नाम पर फायर एक्सटींग्यूसर से काम चलाया जा रहा है.

ऐसे में इन इमारतों में अगलगी की घटना होने पर काफी गंभीर नुकसान होने की आशंका है. जिला अग्निशमन विभाग ने कई बार नोटिस देकर अग्नि सुरक्षा के मानकों के अनुरूप फायर सेफ्टी यंत्र लगाने का अपील की है. इसके बावजूद मल्टीस्टोरेज बिल्डिंग के प्रबंधक इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.
सूरत में शुक्रवार को चार मंजिले कॉमर्सियल परिसर में आग लगने के बाद एक कोचिंग संस्थान में पढ़ रहे 21 बच्चों की मौत हो गयी थी. इस घटना से सबक लेते हुए जिला अग्निशमन विभाग अब कार्रवाई की मूड में है. फायर ब्रिगेड के अधिकारियों की मानें, तो जिन लोगों नोटिस किया गया है, उनके यहां अग्निशमन विभाग की टीम औचक ऑडिट करने पहुंचेगी. अगर, उनके यहां मानक अनुसार सुरक्षा यंत्र नहीं मिले, तो कार्रवाई की जायेगी.
अधिकांश फायर ब्रिगेड का नहीं है एनओसी
फायर ब्रिगेड के अधिकारियों की मानें, तो अधिकांश बहुमंजिली इमारतों के निर्माण के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं लिया गया है. टीम ने अबतक 54 मल्टीस्टोरेज बिल्डिंग का निरीक्षण किया है. उनको फायर सेफ्टी यंत्र लगाने का निर्देश भी दिया गया है. लेकिन, अबतक उनकी ओर से एनओसी के लिए पहल नहीं की गयी है. इसके अलावा एक भी कोचिंग संचालक अबतक विभाग से फायर ऑडिट नहीं करायी है.
लेनिन चौक व क्लब रोड में निजी कोचिंगमें हो चुकी है अगलगी की घटना
2017 के दिसंबर माह में काजीमोहम्मदपुर थानाक्षेत्र के लेनिन चौक स्थित एक बहुमंजिली इमारत में चल रहे एक निजी कोचिंग में शॉर्ट सर्किट से आग लग गयी थी. कोचिंग के तीन क्लास रूम में पढ़ रहे करीब 50 से ज्यादा छात्र 20 मिनट तक फंसे रहे. क्लासरूम में धुआं फैलने के कारण कई बच्चे बेहोश हो गये थे, जिनको पीछे के रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला गया था. इसके अलावा क्लब रोड स्थित एक कोचिंग में भी 2018 के अप्रैल माह में आग लग गयी थी. इसमें एक छात्र झुलस गये थे.
बहुमंजिली इमारत में फायर सेफ्टी के ये हैं मानक
फायर एक्सटींग्यूसर ( बिल्डिंग के क्षमता के अनुसार)
होज रील
डाउन कमर सिस्टम
फायर अलार्म सिस्टम
ऑटोमेटिक डिटेक्शन सिस्टम
स्प्रींकलर सिस्टम
अंडर ग्राउंड वाटर स्टैटिक टैंक 1. 25 लाख लिटर (क्षमता सहित)
ओभर हेड वाटर टैंक 25 हजार लीटर (क्षमता सहित)
यार्ड हाइड्रेंट व फायर बुकेट
ओभर हेट वाटर टैंक के पास पंप की क्षमता
स्मोक डिटेक्शन सिस्टम, मोडलर अग्निशमन यंत्र
एबीसी टाइप (मल्टी परपस ) व सीओटू टाइप (बिजली परस ) अग्नि सुरक्षा यंत्र
एक्सटेंशन लैडर
हमारे यहां बच्चों के लिए काफी स्पेश है. फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं लगाया गया है, जिसे लगाया जायेगा. कोचिंग में 400 बच्चे पढ़ते हैं. जिन कोचिंग सेंटर में एग्जिट और इंट्री का रास्ता संकरा होता है, वहां हादसों के वक्त ज्यादा दिक्कत होती है. हमलोगों ने इसका ख्याल रखा है.
प्रभात रंजन, निदेशक, ओमेगा कोचिंग, अखाड़ाघाट रोड
जहां छात्र पढ़ते हैं, वहां प्राथमिक उपचार की सामग्री और शिक्षकों को इसकी ट्रेनिंग होनी चाहिए. कोचिंग केंद्रों में फायर सेफ्टी यंत्र लगे होने चाहिए. आग लगने की स्थिति में बचाव के लिए दिशा-निर्देश कर्मचारियों को पहले ही दिया जाना चाहिए. सभी आपातकालीन मोबाइल नंबर हमें काेचिंग में डिस्प्ले करना चाहिए. आपदा प्रबंधन को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए.
शेखर कुमार, जिलाध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एवं चिल्ड्रेन वेलफेयर कमेटी
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