ऑटो टिपर घाेटाला : भुगतान की संचिका तैयार करने वाले कर्मी घिरे, विजिलेंस ने पूछा, बिना लेटर रिसीव कैसे हो गया भुगतान

Updated at : 25 Jan 2019 5:51 AM (IST)
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ऑटो टिपर घाेटाला :  भुगतान की संचिका तैयार करने वाले कर्मी घिरे, विजिलेंस ने पूछा, बिना लेटर रिसीव कैसे हो गया भुगतान

मुजफ्फरपुर : 3.83 करोड़ रुपये के ऑटो टिपर घोटाले में फंसे आरोपितों की मुश्किलें दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही हैं. निगरानी अन्वेंषण ब्यूरो की जांच में धीरे-धीरे जो खुलासा हो रहा है, वह चौकाने वाला है. डीएसपी मो खलील के नेतृत्व में जांच टीम लगातार दूसरे दिन गुरुवार को भी नगर निगम कार्यालय पहुंची. करीब […]

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मुजफ्फरपुर : 3.83 करोड़ रुपये के ऑटो टिपर घोटाले में फंसे आरोपितों की मुश्किलें दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही हैं. निगरानी अन्वेंषण ब्यूरो की जांच में धीरे-धीरे जो खुलासा हो रहा है, वह चौकाने वाला है. डीएसपी मो खलील के नेतृत्व में जांच टीम लगातार दूसरे दिन गुरुवार को भी नगर निगम कार्यालय पहुंची. करीब तीन घंटे तक नगर आयुक्त संजय दूबे के कक्ष में ऑटो टिपर खरीदने के लिए दिये गये ऑर्डर व आपूर्ति के बाद रिसीव करने वाले कर्मियों की कुंडली खंगालते रहे.

हालांकि, प्रथम फेज में मौर्या मोटर्स पाटलिपुत्रा से 24 टिपर की आपूर्ति में पांच को छोड़ अन्य 19 टिपर को रिसीव करने की ठोस जानकारी नहीं मिल पायी. भुगतान के लिए संचिका तैयार करने वाले विकास शाखा के कर्मी से लंबी पूछताछ हुई. विजिलेंस ने सवाल किया कि बिना रिसीव लेटर भुगतान के लिए संचिका किस परस्थिति में बढ़ायी गयी? भुगतान के लिए कौन-कौन लोग दबाव बना रहे थे? क्यों न समझा जाये कि ऑटो टिपर खरीद में जो घोटाला हुआ है, उसमें अापकी सीधे तौर पर संलिप्तता है?
45 दिनों के अंदर सिर्फ पांच टिपर की है आपूर्ति
विजिलेंस को जो साक्ष्य हाथ लगे हैं, उसमें अधिकतम 45 दिनों के अंदर आपूर्ति करने के लिए जो शर्तें निर्धारित थीं, उस शर्त पर मौर्या मोटर्स की तरफ से चार दिसंबर 2017 को पांच टिपर की ही आपूर्ति हुई है. इसे बहलखाना प्रभारी रामलखन सिंह, डार्विन कुमार ने रिसीव किया है. भुगतान हुए प्रथम फेज के 19 टिपर की आपूर्ति शर्त में निर्धारित समय-सीमा के बाद 09 दिसंबर को की गयी है. बताया जाता है कि दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले कोई बाहरी व्यक्ति ने इसे रिसीव किया है. इससे संंबंधित कोई साक्ष्य निगम के पास नहीं है. वहीं 26 टिपर की आपूर्ति 20 दिसंबर को की गयी है, जिसे अवैध करार देते हुए नगर आयुक्त पहले ही वापस ले जाने के लिए मौर्या मोटर्स को पत्र लिख चुके हैं.
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